हम भारत को कहां ले जा रहे हैं?
हम भारत को कहां ले जा रहे हैं?
——————————————— रघु ठाकुर
कल रात 12 मार्च को मैं भोपाल से तमिलनाडु एक्सप्रेस से दिल्ली आया था। B2 कोच में 41 नंबर बर्थ पर मेरा आरक्षण था। इसी कोच में 42,43,44, 45 और 48 पर 5 नौजवान जो एसआरएम यूनिवर्सिटी,चेन्नई (तमिलनाडु) में पढ़ते हैं,इसी कोच में उनका भी आरक्षण था। रात में लगभग 10:30 बजे हम लोगों ने अपना बिस्तर लगाया और सोने ही जा रहे थे परंतु ये नौजवान मित्र जिनमें राजस्थान, हैदराबाद और हरियाणा-पंजाब के छात्र थे, का आपसी समभाषण शुरू हो गया। गन्दी से गन्दी बाजारू गालियों का इस्तेमाल और वह भी जोर-शोर से ये नौजवान कर रहे थे। लगभग 1 घंटे के बाद मैंने उन्हें रोका और कहा कि अब आप लोग भी सो जाइए। वे कुछ देर चुप रहे और फिर उसी रफ्तार से आपस में गंदी गाली और गन्दी घटनाओं की चर्चा उन्होंने शुरू कर दी।
जिन बच्चों के माता-पिता लाखों रुपए खर्च करके इन बड़े-बड़े नामधारी प्राइवेट विश्वविद्यालयों में पढ़ने भेजते हैं पर इन निजी शिक्षा दुकानों की असलियत क्या है? और वहां किस युवा पीढ़ी का निर्माण हो रहा है? उसका खुलासा इस घटना से होता है।
यह किसी एक विश्वविद्यालय या कॉलेज की घटना नहीं है बल्कि हमारे देश के विश्वविद्यालयों में बढ़ रही विकृत जीवन शैली का एक छोटा सा हिस्सा है।
कल यही नौजवान देश के बड़े इंजीनियर बनेंगे, बड़े पदों पर जाएंगे, देश के नीतियों के निर्माता बनेंगे। परंतु जिस सभ्यता के ये प्रतीक बन रहे हैं क्या ये देश को कुछ दे सकेंगे? यह विषय किसी एक दल का नहीं है, किसी एक जाति धर्म का नहीं है बल्कि समूची युवा पीढ़ी के निर्माण का है और इस पर देश को विचार करना चाहिए।
हमारे देश की शिक्षा पद्धति और शिक्षा युवा पीढ़ी को कहां ले जा रही है? यह भी विचारणीय है।
नई शिक्षा नीति के दस्तावेज में नैतिक शिक्षा का जिक्र है। परंतु क्या वास्तव में जमीनी स्तर पर कोई नैतिक-मूल्य शिशुओं और युवकों के मन में डाले जा रहे हैं! कम से कम, मैं,जो निरंतर देश में दौरा कर देख रहा हूं मुझे तो घोर निराशा है। ये हालात देश के धार्मिक समाजों, सामाजिक संगठनों,शिक्षा-जगत, बौद्धिक जगत, परिवारों और मीडिया के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए। हालांकि हमारे देश का मीडिया भी अपवाद छोड़ दें तो स्वत : नग्नता, अशिष्टता और असामाजिकता को परोस रहा है।
– रघु ठाकुर
राष्ट्रीय संरक्षक
लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी
13 मार्च, 2026 (शुक्रवार)
