भोपाल में 26.5 टन संदिग्ध गौमांस प्रकरण

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भोपाल में 17 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय के सामने 26.5 टन संदिग्ध गौमांस से भरे कंटेनर के पकड़े जाने का मामला अब दिल्ली तक पहुंचाने की तैयारी है। जय मां भवानी हिंदू संगठन के अध्यक्ष भानु हिंदू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने शुक्रवार शाम भवानी चौक पर आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का ऐलान किया।

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में भानु हिंदू ने लिखा है कि 17 दिसंबर को पकड़े गए कंटेनर का मांस नगर निगम से जुड़े ठेका संचालित स्लॉटर हाउस से निकला बताया गया है। इसे प्रशासनिक लापरवाही और संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला बताया गया है। पत्र में दावा किया गया है कि इतने बड़े स्तर पर संदिग्ध मांस पकड़े जाने के बावजूद अब तक सीमित कार्रवाई ही हुई है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि इस मामले में संगठित नेटवर्क की भूमिका हो सकती है, जिसकी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।

भानु हिंदू ने प्रधानमंत्री को यह पत्र लिखा है।
भानु हिंदू ने प्रधानमंत्री को यह पत्र लिखा है।

1000 पोस्टकार्ड, 1 लाख युवाओं का डिजिटल संकल्प

संगठन ने घोषणा की है कि भोपाल से 1000 पोस्टकार्ड प्रधानमंत्री को भेजे जाएंगे। साथ ही प्रदेशभर के 1 लाख युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। संगठन का कहना है कि यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास है।

CBI जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

  • पत्र में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं
  • पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच।
  • दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित नेटवर्क पर दंडात्मक कार्रवाई।
  • गौ संरक्षण से जुड़े अपराधों पर शून्य सहनशीलता नीति का प्रभावी क्रियान्वयन।
  • संगठन का कहना है कि आयोग कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री निवास तक ज्ञापन और प्रदर्शन के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अब मामला प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया है।

पहले कर चुके हैं मुंडन और प्रतीकात्मक विरोध

इससे पहले संगठन इस मामले को लेकर कई चरणों में विरोध दर्ज करा चुका है। नगर निगम की कार्यप्रणाली के विरोध में कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक पिंडदान कार्यक्रम किया था। वहीं, कथित प्रशासनिक निष्क्रियता के विरोध में सामूहिक मुंडन भी कराया गया। संगठन का कहना था कि यह कदम जनभावनाओं के आहत होने का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी की गई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई गई।

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