अभिव्यक्त होने में अपना आनन्द है

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|| अभिव्यक्त होने में अपना आनन्द है ||

मेरी दूसरी पुस्तक #डायरी_का_आखिरी_पन्ना अब अपनी प्रसार यात्रा पर है। दो वर्ष पूर्व, जब मेरी पहली पुस्तक #डायरी_का_मुड़ा_हुआ_पन्ना प्रकाशित हुई थी। तब मुझे स्वयं भी विश्वास नहीं था कि उसे इतनी सराहना मिलेगी।

देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं मध्य प्रदेश गान के रचयिता श्री महेश श्रीवास्तव जी ने अपने शुभकामना संदेश में लिखा था—

“डायरी का मुड़ा हुआ पन्ना पुस्तक पढ़ी। यद्यपि यह फेसबुक पोस्ट का संकलन है, किन्तु इससे प्रकट होता है कि तुममें न केवल जीवन और घटनाओं को गहराई से समझने की शक्ति है, बल्कि साहित्यिक रूप से उन्हें अभिव्यक्त करने की सामर्थ्य भी है।….तुम अपने हो, अतः तुम्हारे लेखन को पढ़ते हुए मन में अपनत्व का भाव बना रहा।…अभिव्यक्त होने से मन को जो आनंद प्राप्त होता है, उसे करते रहो और पाठकों तक पहुँचाते रहो।”

यही प्रेरणा मेरे निरंतर लेखन का आधार बनी। इस बात का जिक्र मैंने अपनी पुस्तक की प्रस्तावना में किया है। आज पुस्तक के प्रेरणा पुरुष को अपनी कृति सौपी। यह मेरे लिए गौरव का क्षण था।

आज फिर कई सारी बातें हुई । नए विचारों का आदान-प्रदान हुआ । अभिव्यक्त पर अनुभवों का आदान प्रदान हुआ। महेश जी ने शून्य से शिखर तक कि यात्रा पर चर्चा की। अंत में इस बात पर सहमति बनी कि निरंतर लिखना ही जागृत रहने का प्रमाण है।

चूंकि महेश जी मेरे गृह जिले राजगढ़ से हैं, इसलिए मेरी बिटिया को भी उनका भरपूर स्नेह मिला। उनके दिलों में आज भी राजगढ़ का तलेन जिंदा है। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं लोक प्रकाशन के प्रमुख श्री मनोज कुमार भी साथ रहे।

— संजय सक्सेना

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