भोपाल रियासत काल में नवाब खास लोगों को भेजते थे ग्रीटिंग

0
Spread the love

भोपाल रियासत काल में नवाब खास लोगों को भेजते

थे ग्रीटिंग: कोलकाता-मुंबई से आती थीं चाॅकलेट;

लाल कोठी पर होता था नए साल का जश्न

अलीम बजमी. भोपाल

31 दिसंबर 2025। भोपाल रियासतकाल में भी भोपाल में नया साल धूमधाम से मनाया जाता था। इसके सूत्रधार अंग्रेज अफसर होते थे। नए साल पर लाल कोठी (अभी राजभवन) में जश्न होता तो दिन में श्यामला हिल्स स्थित कैप्टन कुक के बंगले (वर्तमान में सीएम हाउस) में दोपहर भोज का आयोजन होता था। इसी तरह, नवाब हमीदुल्लाह सभी को नए साल की मुबारकबाद के ग्रीटिंग कार्ड भेजा करते थे। एंग्लो-भोपाल संधि के कारण भोपाल रियासत में (1816-19) अंग्रेज अफसर बड़ी संख्या में आए थे। इनके कारण भोपाल में नए साल पर जश्न मनाए जाने की रिवायत पड़ी। तब भोपाल में आम आदमी का इससे कोई सरोकार नहीं था। न ही आम तबके में नए साल के अवसर पर सांस्कृतिक यानी रंगारंग आयोजन लेकर कोई आकर्षण था।

रियासत काल में लाल कोठी में अंग्रेज पॉलिटिकल एजेंट का निवास था। यहां नए साल पर जश्न होता। इस दौरान गीत-संगीत की महफिल सजती तो भोपाल स्टेट में बड़े पदों पर आसीन अंग्रेज अफसर सपरिवार इसमें शामिल होते थे। लाल कोठी को आकर्षक ढंग से सजाया जाता था। खासतौर पर हर उम्र के लोगों के बीच चाॅकलेट बांटी जाती थी। इसे मुंबई और कोलकाता से बुलवाया जाता था। बुजुर्गों की मानें तो ये सिलसिला नवाब सिकंदर जहां बेगम के दौर में पॉलिटिकल एजेंट जेडी कुनिनघम हेमिल्टन के कार्यकाल से शुरू हुआ। ये सिलसिला भोपाल रियासत के भारत संघ शासन में 1949 में विलय तक चला।

भोपाल में श्यामला हिल्स स्थित वाटर वर्क्स इंजीनियर कैप्टन कुक के बंगले पर दोपहर में भोज होता था। यहां सांस्कृतिक आयोजन भी होते थे। नए साल के तोहफे के रूप में कोलकाता से खासतौर पर बुलाए गए अंग्रेजी कैलेंडर को बांटा जाता था। इसमें यूनियन जैक के साथ गर्वनर जनरल समेत अन्य बड़े अंग्रेज अफसरों की तस्वीर रहती थीं।

दूसरी ओर, नए साल में नवाब हमीदुल्ला खां मुंबई से ग्रीटिंग कार्ड छपवाकर बुलवाते थे। इसकी खासियत भोपाल के किसी एक स्थान, आयोजन अवसर की फोटो का छपा होना था। मसलन, चिकलौद में टाइगर की मौजूदगी का फोटो रहता था। नवाब हमीदुल्ला खां ये कार्ड वायसराय से लेकर सभी अंग्रेज अफसर मित्रों को भेजते थे। इस कार्ड पर भोपाल स्टेट का लोगो (माही-मरातिब) भी होता था। बधाई का मैटर अंग्रेजी में होता था। वहीं, सीहोर में भोपाल रियासत की फौज का स्थान होने से वहां के अंग्रेज मुलाजिमों, फौजियों को एक दिन का विशेष अवकाश स्वीकृत होता था। वहां छावनी होने से रियासत के खर्च पर दिन में जश्न का इंतजाम होता था।

इस जश्न की खासियत ये थी कि भोपाल से एक हाथी को सीहोर छावनी में भेजा जाता था ताकि वो वहां अंग्रेज अफसरों के बच्चों का मनोरंजन कर सके। बच्चे हाथी की सवारी करते थे। स्टेट की ओर से सभी लोगों को सूखे मेवे, दूध -मलाई और गन्ने के रस से तैयार रसावल मिष्ठान के रूप में बांटी जाती थीं। ये शहर के पारंपरिक व्यंजन में से एक हैं।

श्यामला ड्यौढ़ी जागीर से रिश्ता रखने वाले सईदुर जफर, रशीदुर जफर की ओर से यॉट क्लब में न्यू ईयर पार्टी होती थीं। इसमें राजे-रजवाड़े से रिश्ता रखने वालों के अलावा अंग्रेज अफसर शामिल होते थे। यहां नौकादौड़ की प्रतियोगिता भी मनोरंजन की खातिर होती थीं। देखरेख के अभाव में अब यॉट क्लब का स्ट्रक्चर ही बड़े तालाब में शेष बचा है। ये तालाब के भीतर स्थित था।

सुना है कि भेल कारखाने के निर्माण के समय अंग्रेज इंजीनियर इम्पीरियल सेब्रे में न्यू ईयर पार्टी करते तो शहर की शख्सियतों को बुलाते थे, लेकिन भोपाल में नए साल पर कोई धूम-धड़ाका नहीं होता था। यानी उस दौर में नए शहर का वजूद ही नहींथा। राजधानी बनने के बाद वर्ष 1970 में भोपाल में रोटरी क्लब जैसी संस्थाएं सक्रिय होने पर यहां नया साल मनाने की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे इसका सफर बढ़ा तो अब अपने भोपाल में महानगरीय तर्ज पर नए साल को मनाया जाता है। बड़े, मझौले होटलों समेत रिसार्ट, फार्म हाउस और कुछ निजी बंगलों में पार्टी होती है। इस दौरान नए संकल्प लिए जाते हैं। मेरी और से सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं और बहुत-बहुत बधाई।

अलीम बजमी

दैनिक भास्कर भोपाल

alimbazmi786@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home2/lokvarta/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481