ब्रह्माकुमारीज सुख शांति भवन में राष्ट्रीय किसान दिवस के उपलक्ष में आयोजित किसान सम्मान समारोह

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किसान दिवस पर किसानों का किया निशुल्क हेल्थ चैकअप

ब्रह्माकुमारीज सुख शांति भवन में राष्ट्रीय किसान दिवस के उपलक्ष में आयोजित किसान सम्मान समारोह

राष्ट्रीय किसान दिवस पर योगिक खेती का संदेश, ब्रह्माकुमारीज़ का विशेष आयोजन

अन्नदाता के सम्मान के साथ योगिक खेती की नई दिशा

राष्ट्रीय किसान दिवस के उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारीज़ सुख शांति भवन, नीलबड़, भोपाल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कलेक्टर श्री जी.पी. माली जी, विशेष अतिथि ग्राम सरपंच श्री घनश्याम जी तथा सुख शांति भवन की निदेशिका आदरणीय नीता दीदी जी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के योगदान को सम्मान देना तथा उन्हें मानसिक, आत्मिक और प्राकृतिक रूप से सशक्त बनाने का संदेश देना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

प्रारंभ में बीके पूर्वा बहन ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर बीके हेमा बहन ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एक वैश्विक आध्यात्मिक संस्था है, जो मानव मूल्यों, आत्मिक जागरूकता और शांति की स्थापना के लिए कार्य कर रही है। संस्था समाज के विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग विंग्स के माध्यम से सेवाएं दे रही है, जिनमें ग्रामीण विकास प्रभाग प्रमुख रूप से किसानों के उत्थान, योगिक खेती, जैविक खेती और आत्मनिर्भर ग्राम निर्माण के लिए कार्य कर रहा है।

आदरणीय जी पी माली जी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि संस्थान से जुड़कर मैने अनुभव किया है कि यह ज्ञान तथा योग हमें क्रोध मुक्त बनता है। ईमानदारी तथा आपसी सद्भावना यहां शिक्षा दी जाती है तथा ईश्वर को याद करते हुए सर्व कार्यों को संपन्न करने की विधि सिखाई जाती है।
किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि अन्नदाता के परिश्रम से ही राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और समाज सुरक्षित है। साथी उन्होंने कहा कि किसानों के एकमत होने से ही मिलेगा स्थाई समाधान।

ब्रह्मकुमारीज सुख शांति भवन की निदेशिका आदरणीय नीता दीदी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का किसान केवल आर्थिक चुनौतियों से ही नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, भ्रम और अस्थिर सोच से भी जूझ रहा है। ऐसे समय में राजयोग ध्यान, जिसे ब्रह्माकुमारीज़ में सिखाया जाता है, किसान के लिए आंतरिक शक्ति का सबसे सहज और प्रभावी साधन है। उन्होंने बताया कि राजयोग आत्मा को परमात्मा शिव से जोड़ने की वह विधि है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर शांति, स्थिरता और आत्मबल का अनुभव करता है। जब किसान आत्म-स्मृति में स्थित होकर खेती करता है, तो उसके संकल्प शुद्ध होते हैं और वही संकल्प उसकी फसल और जीवन दोनों में दिखाई देते हैं।

नीता दीदी जी ने आगे कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक शिक्षा देना नहीं, बल्कि उसे व्यवहारिक जीवन और खेती से जोड़ना है। राजयोग ध्यान के अभ्यास से किसान न केवल तनावमुक्त रहता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता, धैर्य और निर्णय शक्ति भी बढ़ती है। यही कारण है कि राजयोग आज के समय में किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साधना है। राजयोग के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि राजयोग वही सहज ध्यान पद्धति है, जिसे ब्रह्माकुमारीज़ में सिखाया जाता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के सिद्धांत अनुसार बताया कि आत्मा एक चैतन्य, अविनाशी और शांति-स्वरूप सत्ता है, जबकि परमात्मा शिव सभी आत्माओं के पिता, ज्ञान-सागर और शक्ति-स्रोत हैं। राजयोग ध्यान से आत्मा परमात्मा से शक्ति लेकर शांत, संतुलित और सकारात्मक बनती है, जिसका प्रभाव किसान के जीवन, उसकी खेती और प्रकृति पर भी पड़ता है।

कार्यक्रम के दौरान बीके डॉ. प्रियांका ने एक प्रभावी एक्टिविटी के माध्यम से यह संदेश दिया कि जीवन और खेती से जुड़े निर्णयों में सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए तथा अधिक और नकारात्मक सोच से बचना चाहिए। स्पष्ट सोच और आत्मविश्वास ही सही निर्णय का आधार है।इसके पश्चात बीके डॉ. देवयानी द्वारा उपस्थित सभी लोगों को सहज राजयोग ध्यान अभ्यास कराया गया। ध्यान के दौरान प्रकृति के पाँचों तत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई तथा शुभ और सकारात्मक प्रकंपनों को संपूर्ण विश्व में फैलाने का भाव जागृत किया गया।कार्यक्रम में बीके खुशी द्वारा सभी को नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाई गई, जिसमें उपस्थितजनों ने स्वयं को और समाज को स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब किसान आत्मिक रूप से जागरूक होकर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर कार्य करेगा, तभी खेती, पर्यावरण और समाज—तीनों का कल्याण संभव होगा।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन वरिष्ठ राजयोगी भ्राता राम कुमार द्वारा किया गया। जिन्होंने साझा किया कि आज संसार में नैतिक मूल्यों का राशि सबसे बड़ी समस्या है और साथ ही राजयोग ध्यान से ही समस्याओं का स्थाई समाधान मिल सकता है।

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