आज उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पूरा हुआ छठ महापर्व

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चार दिन तक चली सूर्य उपासना की परंपरा आज सुबह पूरी हो गई। कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर आज छठ महापर्व का आखिरी दिन है। भोपाल के 52 घाटों पर सुबह की पहली किरण के साथ श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को दूध, जल और प्रसाद से अर्घ्य अर्पित किया। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ।

कमला पार्क, वर्धमान पार्क (सनसेट पॉइंट), खटलापुरा घाट, प्रेमपुरा घाट, हथाईखेड़ा डैम, बरखेड़ा और घोड़ा पछाड़ डैम पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हर घाट पर छठी मैया के गीत गूंजते रहे और श्रद्धा का माहौल बना रहा।

इधर, शीतलदास की बगिया में भोपाल दक्षिण पश्चिम विधायक भगवान दस सबनानी भी आए। उन्होंने लोगों को छठ पर्व की शुभकामनाएं दी। भोजपुरी एकता मंच द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

नगर निगम ने घाटों पर सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई की व्यवस्था की थी। पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी सुबह से मौजूद रहीं। श्रद्धालुओं ने शांति और अनुशासन के साथ पूजा संपन्न की।

देखिए तस्वीरें…

भोपाल के घाटों पर सुबह से ही श्रध्दालु जुटने लगे।
भोपाल के घाटों पर सुबह से ही श्रध्दालु जुटने लगे।
महिलाओं ने पूजा की तैयारी की।
महिलाओं ने पूजा की तैयारी की।
सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ।
सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ।

व्रती महिलाओं ने पारण किया

अर्घ्य के बाद व्रती महिलाओं ने पारण किया। भोजन में चावल, दाल, साग, सब्जी, पापड़, बड़ी, पकौड़ी और चटनी शामिल रही। व्रत समाप्त करने के बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि रविवार शाम अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु पूरी रात भजन गाते रहे। सोमवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा समाप्त हुई। इस बार भोपाल में सबसे अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे। दीयों की रोशनी, सजावट और लोकगीतों से पूरा शहर छठ मैया की भक्ति में सराबोर रहा।

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