पति ने पत्नी को बेटे की हत्यारी साबित किया
हां, मैंने ही अपने बच्चे को मौत के घाट उतार दिया, लेकिन वो मेरा मैटर है, तुम्हारा मैटर नहीं। मार दिया तो मार दिया। पूरी गुनहगार मैं ही हूं। लल्ला नहीं पसंद था तो मार डाला।

रीवा जिले के मनगवां में ढाई साल पहले हुई एक मासूम की मौत का राज आखिरकार इस कॉल रिकॉर्डिंग से खुल गया। पिता की कोशिशों और पुलिस की जांच ने साबित कर दिया कि ढाई महीने के बच्चे की मौत हादसा नहीं थी। मां ने ही अपने बेटे की हत्या की थी। मनगवां पुलिस ने 6 जुलाई 2025 को आरोपी मां प्रिया गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने उसे रीवा केंद्रीय जेल भेज दिया है।
घटना 6 जनवरी 2023 की है। प्रिया ने अपने बेटे लक्ष्य उर्फ धैर्य की गला दबाकर हत्या कर दी थी। मामले में ढाई महीने बाद नया मोड़ तब आया, जब पति प्रकाश गुप्ता ने पुलिस को एक मोबाइल रिकॉर्डिंग सौंपी।
इसमें प्रिया ने कहा- मैं काफी गुस्से में आ गई थी। गलती इंसान से ही होती है, इसलिए तुम बार-बार मुझे परेशान मत करो। अब क्या तुम ये बात अपने परिवार को बताने वाले हो? मुझे पता है कि तुम अपने घर में बता दोगे, लेकिन अगर तुमने ऐसा कुछ भी करने की कोशिश की तो मैं अभी तुरंत जाकर आत्महत्या कर लूंगी और तुम बुरी तरह फंसोगे। गुस्से में इंसान कुछ भी कर देता है, उसे गुनाह नहीं मानते।
आखिर एक मां ने अपने ढाई महीने के बच्चे को गला दबाकर क्यों मार डाला? जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मनगवां पहुंची। यहां परिजन और पुलिस से बात की तो परतें खुलती चली गईं, पढ़िए रिपोर्ट…

देवर को 10 लाख रुपए देने से थी नाराज एसपी विवेक सिंह के निर्देश पर एफएसएल भोपाल से कॉल रिकॉर्डिंग की जांच कराई गई। इसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया।
पुलिस पूछताछ में प्रिया ने बताया कि घटना वाली रात देवर राकेश से विवाद हुआ था। वह पति के फोन नहीं उठाने से गुस्से में थी। पति ने जमीन खरीदने के लिए देवर को 10 लाख रुपए दिए थे।
उस दिन बच्चे ने दूध पीकर उल्टी की तो गुस्सा भड़क गया। इस कारण उसका गला दबा दिया। करीब पांच मिनट तक ऐसे ही दबाए रखा। बच्चे के छटपटाने पर भी उसने हाथ नहीं छोड़ा, जिससे उसकी मौत हो गई थी।

बोली थी- दूध नाक और गले में अटका था मां प्रिया गुप्ता (25) ने पति प्रकाश गुप्ता (30) और घरवालों को बताया कि वह लक्ष्य को दूध पिला रही थी। इसी दौरान दूध नाक और गले में अटक गया। उसकी मौत हो गई। यह सुनते ही सब सन्न रह गए। परिजन ने एक-दूसरे को संभाला और बच्चे को ले जाकर दफना दिया था।
प्रकाश उत्तराखंड में मोटर कंपनी में जॉब करते थे। बेटे की मौत से इतना आहत हुए कि घर ही लौटकर नहीं आए। बच्चे की आकस्मिक मौत का दर्द उन्हें सता रहा था। पिता से ज्यादा अगर बच्चे की मौत किसी को कचोट रही थी तो वह थे बच्चे के चाचा विकास गुप्ता।
बच्चे की मौत को 2 माह बीत गया था। सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो गया, लेकिन विकास ने जो महसूस किया था, वह उन्हें चैन से रहने नहीं दे रहा था। उधर, प्रकाश अपनी नौकरी की व्यस्तताओं की वजह से अब भी सभी बातों से अनजान थे। धीरे-धीरे उस घटना की तस्वीरें धुंधली पड़ने लगीं और प्रिया अपने मायके चली गई।

दो महीने बाद उत्तराखंड से लौटा पिता 2 महीने बाद पिता प्रकाश उत्तराखंड से छुट्टी लेकर घर आए। वह अपने छोटे भाई विकास के पास बैठे। जब दोनों भाई एक साथ बैठे तो दिल का दर्द निकल आया। प्रकाश ने भाई विकास से कहा कि पत्नी मायके में है। ढाई माह का मेरा प्यारा बच्चा भी दुनिया में नहीं रहा।
जब था तो रोज उससे वीडियो कॉल पर बात कर लिया करता था, लेकिन आज भी इस बात का बड़ा ताज्जुब होता है कि उसे सर्दी-खांसी तक नहीं थी। उसकी मौत आखिर अचानक कैसे हो गई? पैसे कितने भी लग गए हो, थोड़ा भी बीमार होने पर हमेशा उसका महंगा से महंगा इलाज करवाया। कभी भी उसके इलाज में लापरवाही नहीं बरती। फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि वह इस दुनिया में नहीं रहा।
भाई की बात सुनकर विकास के दिल में दबा राज बाहर आ गया। उसने जो बताया, उसे सुनकर प्रकाश के होश उड़ गए। विकास ने कहा- भैया, आप पूछते हो तो बताता हूं,आपकी गैर-मौजूदगी में मैंने जो भी चीजें बच्चे की मौत को लेकर महसूस की हैं, वो बिल्कुल अलग इशारा कर रही हैं।
दोनों की बातचीत शुरू हुई तो विकास ने ऐसे पांच महत्वपूर्ण बिंदु बताएं, जिन्हें उन्होंने अनुभव किया था। इस चर्चा के बाद दोनों भाइयों को भरोसा हो गया कि यह हादसा नहीं, हत्या है। आगे चलकर यही पांच पॉइंट पुलिस के लिए भी कारगर साबित हुए और ढाई महीने के बच्चे की मौत का राज खुला।

विकास ने भाई प्रकाश को बताए ये पांच पॉइंट
- डस्टबिन का रहस्य- बच्चे के गंदे कपड़े रखने वाला डस्टबिन खाली मिला। उसमें सिर्फ एक कपड़ा था। यह संकेत करता है कि बच्चे ने रात में कोई गतिविधि नहीं की, क्योंकि वह पहले ही मृत था। यह मां के दावे का खंडन करता है कि बच्चे की मौत सुबह दूध पीते समय हुई।
- मां का असामान्य व्यवहार- सामान्यतः कोई मां अपने मृत बच्चे को आसानी से नहीं सौंपती, लेकिन इस मामले में मां ने बिना किसी भावनात्मक प्रतिरोध के बच्चे को सौंप दिया, जो एक असामान्य व्यवहार था।
- बच्चे का न रोना- बच्चा जो रोज सुबह 4 बजे रोता था, उस रात बिल्कुल नहीं रोया। यह भी इस बात का संकेत है कि बच्चे की मृत्यु रात में ही हो चुकी थी।
- प्रिया का बदला हुआ रुटीन- प्रिया रोज रात को बर्तन धोने से पहले बच्चे को विकास को सौंपती थी, उस दिन ऐसा नहीं किया। यह उसके दैनिक व्यवहार से पूरी तरह अलग था।
- मृत्यु के चिह्न- जब विकास ने बच्चे को मुंह से सांस दी, तो उसके नाक से दूध की जगह खून निकला। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मृत्यु दूध पीने के कारण नहीं हुई थी, जो कि मां के दावे से उलट था।

पति ने बाबा की कहानी बनाकर सच उगलवाया भाई के बताए बिंदुओं पर प्रकाश रातभर सोचता रहा। वह जाॅब पर वापस चला गया, लेकिन अपने बच्चे की मौत का सच जानना चाहता था। उसने सच्चाई जानने के लिए एक योजना बनाई। वह पत्नी को उसी प्रकार से कॉल कर रिस्पॉन्स करता रहा, जैस पहले किया करता था।
एक दिन बेटे की मौत की बात करते हुए उसने किसी के द्वारा कुछ कर देने की बात कही। उसने काल्पनिक बाबा की कहानी बनाकर पत्नी से कहा कि वे बाबा उसे सारी सच्चाई बता देंगे। वो बाबा के पास जाने वाला है। पत्नी इस बात से बेचैन हो गई और लगातार उससे पूछती रही कि बाबा ने क्या बताया?
दो दिन बाद पति ने मोबाइल रिकॉर्डिंग चालू करके पत्नी से कहा कि बाबा ने सब बता दिया है। पत्नी ने स्वीकार किया कि गुस्से में आकर उसने ही गला दबाकर बच्चे की हत्या कर दी थी। उसने यह भी कहा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है और धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो परिणाम बुरा होगा।

वो ऑडियो, जिससे बच्चे की मौत का राज खुला
- पति- बाबा से पूछा तो उसने सबकुछ बता दिया। उसने बताया कि कितने बजे यह सब कांड हुआ है।
- पत्नी- बाबा ने क्या बताया, मुझे भी बताओ।
- पति- बाबा ने बताया कि तुमसे जब कसम खाने को कहा, उसके बाद ही मुंह दबाया है।
- पत्नी- मेरी उसे मारने की नीयत नहीं थी। धोखे से हुआ है। मैंने मुंह दबाया और वो मर गया। अब था ही कितना बड़ा। जानबूझकर कुछ नहीं किया। धोखे से हाथ रखा और उसकी जान चली गई।
- पति- मुंह दबा दिया है न।
- पत्नी– अब किसको बताओगे, सही बताओ, तुम क्यों घुट रहे हो?
- पति- माता-पिता की इज्जत बच्चों के रहने पर ही होती है, इस बात का हमेशा ध्यान रखना।
- पत्नी- अब बचपना तो था ही।
- पति- 22-23 साल की हो गई हो, यह बचपना नहीं कहलाता है। तुम्हारी मां को पता है न यह सब।
- पत्नी- सही बताओ, किसी को बताओगे तो नहीं। सबूत दो कि किसी को नहीं बताओगे। यदि बताना है तो मैं अभी अपनी जान दे दूंगी। सबकुछ गुस्से में हुआ है।
- पति- अपनी औलाद पर ऐसा गुस्सा। विश्व में कहीं भी चले जाओ, कहीं सुनने को नहीं मिलेगा कि मां ने अपने बेटे की हत्या की है। एक-दो परसेंट को छोड़ दो तो। इंदौर में था तो यहां एक व्यक्ति को बच्चा हुआ, बच्चे के कान नहीं थे, वह उसे कचरे में फेंक कर आ गया।
- पत्नी- गुस्से में तो इंसान कुछ भी कर देता है, पता चले गुस्से में तुम मेरा ही मर्डर कर दो। सही बताओ, गुस्से में कुछ भी हो सकता है न। तुमसे ही मेरी इज्जत है, तुम नहीं चाहोगे तो कुछ नहीं होगा।
- पति- इंसान से ही गलती होती है, मैं किसी को नहीं बताऊंगा। बस यह जानना चाहता था कि आखिर बेटे की माैत कैसे हुई। तुम्हारी मां को सब पता है न।
- पत्नी- मां को पता है, जब मारा था उसके बाद ही बता दिया था।
- पति- अब मेरा भ्रम दूर हो गया। रोज तड़पता था कि बेटे की मौत कैसे हुई।
- पत्नी- तुम पर कैसे भरोसा करूं कि तुम किसी को नहीं बताओगे। गुस्सा बहुत थी। तुम बात कर लेते तो शायद गुस्सा कम हो जाता।
- पति- दो बार मैंने कॉल किया था, तुमने कसम देकर फोन काट दिया था।
- पत्नी- गुस्से में मैं अंधी हो गई थी। गलती इंसान से होती है, तुमसे भी कहीं गलती हुई होगी। कहते हैं न क्रोध में उसने फांसी लगा ली। आग लगा दी।
- पति- किस वजह से मार डाला।
- पत्नी- वजह कुछ नहीं है, गुनहगार मैं हूं।
- पति- वजह क्या रही, यह बताओ।
- पत्नी- लल्ला (बेटा) मुझे पसंद नहीं था। बस हो गया न। अब खुश न, गुनहगार मैं हूं, सबसे बता दो।
- पति- पहले क्यों नहीं मारा, जब पेट में था, तभी गोली खा लेती। जन्म देने के बाद क्यों मारा।
- पत्नी- मार दिया, मार दिया। मेरी मर्जी। अब बता दिया न, फिर क्यों मेरी जान खा रहे हो।
- पति- मुझे वजह जाननी है, भाई को जमीन खरीदने के लिए रुपए दिए, इसलिए मार दिया क्या।
- पत्नी- मुझे न तुम्हारे भाई, न भाभी, किसी से मतलब नहीं है। समझ आई बात।
- पति- मतलब तो रखना पड़ेगा। तुझे यह सब करने के लिए किसने सिखाया, यह मुझे नहीं पता।
- पत्नी- नहीं रखूंगी, हो गया तो हो गया। सिर्फ अपने माता-पिता से मुझे मतलब है। तुमसे तो बिल्कुल नहीं।
- पति- तो फिर शादी क्यों की थी।
- पत्नी- तुम अपना रास्ता देखो, मैं अपना देखती हूं, क्योंकि मैंने बेटे को मार डाला है। बता देना कि प्रिया ने हत्या की है।
- पति- एक न दिन तो बताना ही पड़ता, कितने दिन छिपाते। मारने के पीछे वजह तो है, बस बता नहीं रही हो।
- पत्नी- अब बता तो दिया, मार डाला। अब बताने को क्या बचा है। गुनहगार हो गई न अब, जो सोचना हो सोचते रहो।
टीआई को सुनाई रिकॉर्डिंग, प्रकरण दर्ज किया प्रकाश ने यह रिकॉर्डिंग अपने भाई विकास को भेजी। दोनों उसे लगातार तीन दिन तक सुनते रहे। आखिरकार दोनों ने तय किया कि रिकॉर्डिंग और बाकी की पड़ताल के आधार पर बेटे लक्ष्य को न्याय दिलाएंगे।
भाई विकास ने थाने में वो रिकॉर्डिंग टीआई को सुनाई। थाना प्रभारी ने कहा कि आप अपने भाई को बुला लीजिए। बच्चा उनका है तो शिकायत भी उनके नाम से होनी चाहिए।
इसके बाद 27 मार्च 2023 को पति की शिकायत पर प्रकरण दर्ज हुआ।

दो माह बाद कब्र से निकाला गया बच्चे का शव प्रकाश ने बताया कि मामला दर्ज होने के तीन दिन बाद पुलिस, तहसीलदार और जिम्मेदारों की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया की गई। इसके बाद पुलिस ने अपराध तो दर्ज कर लिया, लेकिन कोई प्रगति इस मामले और उसकी जांच में नहीं हुई।
मामले में 1 साल से अधिक समय बीत गया। धीरे-धीरे उम्मीद टूटने लगीं। अब तक हम निराश हो चुके थे। उम्मीद की कोई किरण नहीं दिख रही थी। लगा कि हमारी सारी की सारी पड़ताल धरी की धरी रह जाएंगी और हमें न्याय नहीं मिल पाएगा।
पिता ने एसपी से शिकायत की, तब जांच आगे बढ़ी

प्रकाश ने बताया कि 2 दिसंबर 2024 को एक बार फिर हम एसपी कार्यालय पहुंचे। एसपी कार्यालय पहुंचकर एसपी विवेक सिंह से मुलाकात की। उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया। 3 दिसंबर 2024 को कलेक्ट्रेट में कलेक्टर प्रतिभा पाल,आईजी गौरव राजपूत से भी मुलाकात की। आईजी गौरव राजपूत को हमने सारे तथ्य दिए। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया और खुद मामले को व्यक्तिगत स्तर पर देखने की बात कही।
इन सारी मुलाकातों का परिणाम यह निकला कि आखिरकार जनवरी 2025 में उस ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराई गई। जांच के लिए भोपाल तक भेजा गया। सारे तथ्यों की बड़ी बारीकी से जांच की गई, जिसमें सभी बातें और आरोप सत्य पाए गए।

परिजन और पुलिस ने ये कहा…



