श्रीमती लैला फर्नांडिस का निधन दिल्ली में
कल देर रात एक दुखद सूचना मिली की श्रीमती लैला फर्नांडिस का निधन दिल्ली में हो गया। देर रात मुझे श्री जयंत तोमर जी ने फोन पर सूचना दी तथा अल सुबह कोलकता के साथी श्री नूर अहमद ने इसकी पुष्टि की। श्रीमती लैला फर्नांडिस एक भद्र और विचार वान महिला थी जो अपने जीवन में सदैव अपने विचारों और कामों तक सीमित रहीं।उनका परिचय स्वर्गीय जार्ज फर्नांडिस से 1971 में बांग्लादेश के युद्ध के समय हुआ था। वह रेड क्रास की बड़ीअधिकारी थी और श्री फर्नांडिस उस समय सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष थे जो मदद सामग्री आदि लेकर मुक्ति वाहिनी के लोगों की मदद करने के लिए गए थे ।उसके बाद ही उनकी शादी हुई और उनका एक बेटा है सनू जो उसका प्यार का नाम था । उसका पूरा नाम सुशांत है। वह विदेश में है उसकी पत्नी जापानी है वह भी विदेश में है और लैला जी दिल्ली में अपने पैतृक मकान में ही रहती थी। सनू का जन्म रेल हड़ताल शुरु होने की कुछ दिनों पूर्व ही हुआ था
जब स्वर्गीय जार्ज गंभीर रूप से बीमार हुए और उनका बोलना चलना भी लगभग बंद हो गया था पहचानना भी बंद हो गया तब उस आखिरी दौर में श्रीमती लैला फर्नांडिस ने ही उन्हें अपने घर पर रखा, उनकी यथाशक्ति देखभाल की और श्री जार्ज का निधन भी उनके घर पर हुआ था।
वे एक सुशिक्षित महिला थी। उनका जीवन भी राजनीतिक परिवारों से संबंधित था।उनके पिता स्वर्गीय हुमायूँ कबीर भारत के केंद्रीय मंत्री भी रहे तथा लंबे समय तक कांग्रेस सांसद रहे। बाद में भारतीय क्रांति दल के नेता रहे और उनकी बेटी होने के नाते श्रीमती लैला फर्नांडिस ने कांग्रेस और अन्य दलों की राजनीति को नजदीक से देखा था ।बाद में शादी के बाद उनका संबंध समाजवादियों के साथ रहा और जार्ज फर्नांडिस के हर बड़े आंदोलन में या बड़ी घटनी के समय वे उनके साथ लगातार रहीं ।
1974 में जब रेल हड़ताल हुई थी और रेल हड़ताल को तोड़ने के लिए भारत सरकार ने तमाम उपक्रम किए थे एक प्रकार से अघोषित तानाशाहि जैसी स्थितियों बनी थी तब भी लैला फर्नांडिस ने अपने राजनीतिक और अपने नौकरशाही के कैरियर को दांव पर लगाकर उनका समर्थन किया था । यद्यपि उनके संबंध नेहरू परिवार से अच्छे थे, यहां तक कि जब उनकी शादी श्री जार्ज फर्नांडिस से हुई तो उनके विवाह के दो गवाहों में से एक श्री मति इंदिरा गांधी और दूसरे स्व विद्याचरण शुक्ला थे । चूंकि उनके पिता कांग्रेस पार्टी में थे और स्व जवाहरलाल जी के साथ थे इसलिए उनके पारिवारिक संबंध थे परंतु उन्होंने कभी भी उन संबंधों के आधार पर अपने विचारों को बदलने या लाभ लेना का प्रयास नहीं किया और सदैव अपने पति का साथ दिया ।1975 में जब आपातकाल लगा और जार्ज फर्नांडिस की खोज शुरू हुई फिर बाद में बड़ौदा डायनामाइट केस में उन्हें गिरफ्तार किया गया, उनके जीवन के खतरा था तो हिंदुस्तान के बाहर दुनिया में और विशेषतः यूरोप में जाकर कितने ही देश के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलना और उनके माध्यम से अपील कराना की जार्ज फर्नांडिस की जान को कोई खतरा न हो यह उनकी भूमिका थी। यद्यपि वे जेल में नहीं गई परंतु आपातकाल की असलियत को बताने के लिए दुनिया के कई देशों का उन्होंने दौरा किया। और बहुत तार्किक ढंग से दुनिया के सामने आपातकाल के नाम पर जो ज्यादतियां हो रही थी उनका खुलासा किया और लोकतंत्र का पक्ष रखा ।और दुनिया के राष्ट्रीय अध्यक्षों को सहमत कराकर उनसे आपातकाल के खिलाफ उसे वापस लेने के लिए और स्वर्गीय जार्ज फर्नांडिस के जीवन को बचाने के लिए अपील भी कराई। वे आंदोलन की भी सहभागी थी। जब वह अपने रेड क्रास की नौकरी से हट गई और जार्ज फर्नांडिस के साथ तुगलक क्रिसेंट पर रहती थी उस समय में हिंद मजदूर किसान पंचायत का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष था और कार्यालय काम भी देखता था क्योंकि मैं और स्वर्गीय नरेंद्र गुरु जब भी दिल्ली में रहते थे तो वहीं से कार्यालय का काम करते थे । हमारा दिन के खाने की व्यवस्था लैला जी के द्वारा ही होती थी। वे कहती है कि कि मुझे आप लोगो को खाना खिलाने से खुशी होती है बस मुझे पहले बता दिया करें, क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि राजनीति के
लोग खाना बनवा लेते हैं और फिर पहुंचते नहीं है।
आगे की अनेक अप्रिय घटनाओं के बाद भी उन्होने सदैव अपने जीवन को एक सिद्धांत निष्ठा विचारवान चरित्रवान और ईमानदार व्यक्ति के रूप में जिया।
हम उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके बेटे सनू को अपनी संवेदनाएं प्रेषित करते हैं। पता नहीं की सनू इस समय दिल्ली में है या नहीं मुझे जानकारी नहीं है क्योंकि सनू विदेश में नौकरी करते हैं उनकी पत्नी भी जापानी है ,वह लोग शायद पहुंच पाए या नहीं पहुंच पाए मुझे पता नहीं है।
रघु ठाकुर
संरक्षक लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी
16 मई 2025
