जम्मू कश्मीर में करीब 150 आतंकवादी सक्रिय हैं
जम्मू कश्मीर में करीब 150 आतंकवादी सक्रिय हैं। इनमें करीब 75 कश्मीरी हैं। पहलगांव में 22 अप्रैल को जिहादी आतंकवादियों ने धर्म पूछ पूछ कर 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी।
इससे मोदी सरकार हिल गई क्योंकि उसके जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य होने के दावे की कब्र खुद गई। वहीं कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार का तो मानों जनाजा ही निकल गया।
मोदी सरकार गरजने लगी बदला लिया जाएगा। आतंकवादियों को पाताल से निकाल कर लाएंगे और मार देंगे। उमर अब्दुल्ला ने भी कहा मारिये किसने रोका है। रक्षा विशेषज्ञों ने कहा केवल आतंकवादी मारना समस्या का समाधान नहीं है। आतंकियों के अब्बा पाकिस्तानी सेना को मारियेर जब पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें उनके गांवों में पहुंचेगी तब सुधरेगा पाकिस्तान और तभी रूकेगी आतंकवाद।
पर चार दिन तक कुछ हाथ नहीं लगा तो मोदीजी को योगीजी का फार्मूला याद आया। आतंकवादियों के घर गिराने शुरू कर दिये। दो दिन में 9 आतंकवादियों के घर विस्फोट कर उड़ा दिये। एक दो आतंकवादी भी टपकाये
इससे आतंकवादियों के प्रति नरमी रखनेवालों के कलेजे कांप गये। पर वे उस तरह से सुप्रीम कोर्ट जाकर मानवीय आधार पर घरों का गिराना नहीं रूकवा सकते थे जैसे योगी सरकार को रूकवा देते हैं।
तब सबसे पहले उमर अब्दुल्ला का बयान आया। आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में कोलेटरल डेमेज से बचें। बस वह यह नहीं कह पाए कि घर नहीं गिराओ।
केन्द्र सरकार भी घर गिराने का दिन रात पूरी ताकत से प्रचार करवाती रही मानों यही आतंकवाद का जवाब है। कराती भी क्यों नहीं। हत्यारे छहों आतंकवादी तो ऐसे छिप गये मानों उन्हें जमीन निगल गई हो या आसमान खा गया हो।
जबकि आतंकवादी अपने स्थानीय संपर्कों के माध्यम से छिप गये हैं। वे जंगलों में कहां मिलेंगे। वे तो किसी घर के गुप्त तहखाने में वक्त काट रहे होंगे।
याद रखिये वक्त गुजरने के साथ सब ठंडा हो जाता है। पर कम से कम जब तक सभी आतंकवादियों के घर नहीं गिर जाते मोदी सरकार को चैन नहीं लेने दें। वह आतंकवादी तो मारे ही घरों को भी गिराए। गिरफ्तारियां भी करे
गिरफ्तार करो, घर गिराओ यही योगीजी का सफल फार्मूला है। इसे सख्ती से पूरा का पूरा लागू करो मोदीजी।omprakash gour
