भारत सरकार ने अटारी बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया

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कल रात यह संतोषप्रद समाचार मिला कि भारत सरकार ने अटारी बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया है, पाकिस्तानी राजनयिकों और नागरिकों को भारत छोड़ने को कह दिया है, जल समझौता स्थगित कर दिया है और पाकिस्तान में अपना उच्चायोग भी बंद किया जा रहा है।

ये समाचार पढ़कर मुझे चार माह पहले की मेरी एक पोस्ट याद आई, जिसमें मैंने लिखा था कि बांग्लादेश के मामले में भारत सरकार को यही करना चाहिए था (स्क्रीनशॉट देखें)। यह निराशाजनक है कि बांग्लादेश के मामले में भारत सरकार ने कुछ भी नहीं किया, लेकिन यह बहुत अच्छा है कि पाकिस्तान के खिलाफ तुरंत कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। मैं इसके लिए सरकार का आभारी हूँ। मैं पहले भी कह चुका हूँ कि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों से हमें युद्ध करने की जरूरत नहीं है, बल्कि आर्थिक हमले करके उन्हें बहुत आराम से धराशायी किया जा सकता है।

मैं जानता हूँ कि अधिकांश लोग इस बात को कभी नहीं समझ सकेंगे कि मैं कभी सरकार की आलोचना और कभी सराहना क्यों करता हूँ। लेकिन मैं यह पहले भी कह चुका हूँ कि मैं किसी का समर्थन या विरोध तर्क के आधार पर करता हूँ। मैं किसी नेता या सरकार के समर्थन में इतना अंधा नहीं हो सकता कि मुझे उसकी कमियां और गलतियां दिखना बंद हो जाएँ और न मैं किसी के विरोध में इतना अंधा हो सकता हूँ कि उसमें मुझे कोई अच्छाई ही न दिखे। जो लोग भावुक मन के हैं, वे किसी का समर्थन या विरोध अपनी पसंद नापसंद के हिसाब से करते हैं, लेकिन मेरे लिए तर्क और कर्तव्य भावनाओं से ऊपर हैं। इसलिए मैं गलत को गलत और सही को सही बोलता हूँ।

परसों की घटना के प्रति अपनी अपनी भावनाएँ और आक्रोश कल हम सबने अपने अपने ढंग से व्यक्त कर लिया है। सरकार की आलोचना और बचाव भी कर चुके हैं। लेकिन अब एकजुट रहकर सरकार के साथ खड़े रहने का समय है। सरकार क्या कर रही है, इस पर अवश्य ध्यान बनाए रखना चाहिए, लेकिन रोज इसी मुद्दे पर सरकार की आलोचना करना भी ठीक नहीं है। पुलवामा के बाद जो हुआ, वो सबको पता है। इसलिए हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि इस बार भी सही समय पर सही काम किया जाएगा। लेकिन उसका सही समय क्या है, ये सरकार को तय करने दीजिए।

हम जैसे आम नागरिकों का इस समय यही कर्तव्य है कि सरकार के साथ खड़े रहें और सरकार का यह कर्तव्य है कि वह आवश्यक कार्यवाही अवश्य करे। सरकार और समाज दोनों को ही इस समय अपना-अपना कर्तव्य निभाना चाहिए क्योंकि केवल एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। सादर!

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