प्रसन्नता का सूत्र

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राधे – राधे – आज का भगवद् चिन्तन
13 – 01 – 2025
|| प्रसन्नता का सूत्र ||

? जीवन में सुख-दुःख का चक्र सदैव चलता रहता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बड़ी से बड़ी विपदा को भी हँसकर झेल जाते हैं तो कुछ लोग ऐसे होते हैं जो एक दुःख से ही इतने टूट जाते हैं कि पूरे जीवन उस दुःख से मुक्त नहीं हो पाते हैं। जीवन की वास्तविकता यह है, कि जो बीत गया सो बीत गया, उसमें तो कुछ नहीं किया जा सकता पर इतना अवश्य है, कि उसे भुलाकर अपने भविष्य को एक नईं दिशा देने का प्रयास सदैव किया जा सकता है।

? जलती अग्नि में घी डालने से अग्नि और धधकने लगती है एवं दुःखों की अग्नि में पुरानी स्मृतियों की आहुति देने से भी दुःख रूपी ज्वाला जीवन को और जलाने लगती है। भूतकाल के पुराने दुःखों को बार-बार याद करना वास्तव में स्वयं के वर्तमान को भी दुःखमय बनाना ही है। दु:ख होने पर भी उसको विस्मृत कर देना सुखी होने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। जिसको ये कला आ जाती है उसका जीवन प्रसन्नतापूर्ण अवश्य बन जाता है।

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