निरंजन धाम में साईं आशा जगदीश के जन्मोत्सव पर सत्संग
साई आशा जगदीश के पावन जन्मोत्सव के अवसर पर निरंजन धाम संत नगर में सत्संग एवं प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख संत दामोदर दास ने जीवन में माता-पिता की महत्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रवचन दिया और कहा कि माता-पिता का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा है और हमें उनके आशीर्वाद से ही जीवन में सफलता मिलती है।

संत दामोदर दास ने अपने प्रवचन में श्री राम और रावण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, “जब रावण जैसे महापराक्रमी और अहंकारी व्यक्ति का अहंकार श्री राम के सामने नहीं टिक सका, तो हम सामान्य व्यक्तियों का अहंकार कैसे टिक सकता है?” उन्होंने अहंकार से बचने और जीवन में विनम्रता अपनाने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि जानकी का अपमान करना और उनका हरण करना ही रावण के नाश का कारण बना, जो जीवन में सच्चे मार्ग पर चलने के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है। उन्होंने मांस और मदिरा से दूर रहने और शाकाहारी जीवन जीने की प्रेरणा भी दी। उन्होंने शाकाहार को स्वास्थ्य और तात्त्विक दृष्टिकोण से श्रेष्ठ बताया और सभी को इस पर ध्यान देने की सलाह दी।

कार्यक्रम में साई आशा जगदीश के अनेक अनुयायी और सिंधी समाज के प्रमुख लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पहले 16 नवंबर से शुरू हुआ वाहेगुरु नाम सिमरन का क्रम 27 नवंबर को समाप्त हुआ, जिसमें प्रतिदिन शाम 6 बजे से 7 बजे तक सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। 28 नवंबर को संत दामोदर दास ने सुबह और शाम के दो सत्रों में सत्संग और कीर्तन आयोजित किया। लंगर प्रसादी का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं को भिक्षाटन के रूप में प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम का समापन 29 नवंबर( शुक्रवार) को सत्संग के साथ होगा, जिसमें सभी धर्म प्रेमियों से संतों का आशीर्वाद लेने की अपील की गई।
कैलाश आसवानी ने कार्यक्रम में शामिल सभी भक्तों से अपील करते हुए कहा, “संतों का आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन को सही दिशा में ले जाएं।”
