मुस्लिम ही नहीं, ईसाई-द्रूस भी हिजबुल्लाह के सपोर्टर
‘उस दिन मेरे पति और बेटी घर में थे। तभी तेज धमाका हुआ। इजराइल ने अटैक किया था। धमाका सुनकर बेटी जोर–जोर से रोने लगी। बेरूत में लगातार हो रहे हमलों की वजह से हर दिन खौफ में गुजरता है। धमाकों की आवाज सोने नहीं देती। अब यहां रहना मुश्किल है। हम दाहिया में पहले जहां थे, वो एरिया छोड़ दिया है।’
ये मिरे अस्मार हैं। लेबनान की राजधानी बेरूत के दाहिया इलाके में रहती हैं। ये एरिया हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है। इसलिए इजराइल ने सबसे ज्यादा हमले भी यहीं किए हैं। इजराइली सेना ने इस इलाके को खाली करने की चेतावनी दी है। उसके निशाने पर हिजबुल्लाह के ठिकाने हैं, जो रिहायशी इलाकों में हैं।
सेंट्रल बेरूत और सीरिया बॉर्डर के बाद दैनिक भास्कर जंग की कवरेज के लिए नॉर्थ लेबनान पहुंचा। यहीं लेबनान के सबसे मशहूर सेंट शारबेल चर्च में मिरे अस्मार से मुलाकात हुई। वे ईसाई कम्युनिटी से हैं।
नॉर्थ लेबनान का माहौल सेंट्रल बेरूत से बिल्कुल अलग है। बेरूत में हर तरफ धमाके, डर और बरबादी है। वहीं, नॉर्थ लेबनान में आम दिनों की तरह ट्रैफिक है। सड़कों पर अच्छी-खासी भीड़ है। लोग काम पर जाते दिख रहे हैं। दुकानें-बाजार खुले हैं। नॉर्थ लेबनान में इजराइली हमले का असर नहीं है। लेबनान की ज्यादातर ईसाई आबादी नॉर्थ लेबनान में ही रहती है।

ईसाई आबादी वाले इलाकों में युद्ध का सीधा असर नहीं है। यहां हमने ईसाइयों के अलावा लेबनान की तीसरी सबसे बड़ी कम्युनिटी द्रूस के लोगों से भी बात की।
1. मिरे अस्मार, बेरूत दाहिया में रहते थे, हमलों के बाद घर छोड़ा मिरे अस्मार युद्ध से बचने के लिए बेरूत से नॉर्थ लेबनान आई हैं। वे कहती हैं, ‘ये हमारे लिए बहुत मुश्किल वक्त है। हम बेरूत में दाहिया में रहते हैं। वहां बमों की आवाज आती रहती है। मेरे बच्चे डर जाते थे, इसलिए हमने घर छोड़ दिया और दूसरी जगह रहने लगे।’

मिरे कहती हैं, ‘हम सेंट शारबेल चर्च आए हैं। अब सिर्फ चमत्कार की उम्मीद है, जो इस युद्ध और तबाही को रोक सके। लेबनान में रहने वाले क्रिश्चियन भी इस युद्ध से प्रभावित हैं। हम रोज हो रहे धमाकों को रोकना चाहते हैं। ये धमाके हमें डरा रहे हैं। जल्द से जल्द ये युद्ध रोका जाना चाहिए।’
‘हमारी अर्थव्यवस्था तबाह हो रही है। स्कूल बंद हैं। युद्ध की वजह से अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है। जरूरत की चीजें महंगी हो रही हैं। अगर युद्ध ऐसे ही चलता रहा तो जीना और मुश्किल होता जाएगा।’

2. केलियन, बेरूत खिड़की से बम गिरते, धुआं उठते देखते हैं, कई रातों से सोए नहीं ईसाई कम्युनिटी से ही आने वाली केलियन बेरूत के पास मट्टन में रहती हैं। काम के सिलसिले में कनाडा में रहती थीं, लेकिन लेबनान में 17 सितंबर को हुए पेजर्स अटैक से पहले वे लेबनान लौट आई थीं।
केलियन बताती हैं, ‘मेरे घर की खिड़की से पूरा बेरूत शहर दिखता है। शहर में कहीं भी ब्लास्ट होता है, तो मेरे घर तक आवाज आती है। आवाज के पहले तेज रोशनी दिखती है। स्ट्राइक हो जाने के बाद काला धुआं और धूल का गुबार दिखता है। दिन हो या रात, कई बार ऐसा होता है। न जाने कितने दिन से मैं ठीक से सोई नहीं हूं।’

ईसाई समुदाय के लोग हिजबुल्लाह के बारे में क्या सोचते हैं? केलियन जवाब देती हैं, ‘मेरे जानने वाले कई ईसाई साउथ लेबनान में रहते हैं। वे हिजबुल्लाह को सपोर्ट करते हैं। हिजबुल्लाह इजराइली कब्जे के खिलाफ लड़ रहा है। साउथ लेबनान के सरहदी इलाकों में रहने वाले क्रिश्चियन भी हिजबुल्लाह का इसीलिए समर्थन करते हैं।’
केलियन बताती हैं, ‘नॉर्थ में रहने वाले ईसाई हिजबुल्लाह के बारे में अलग सोच रखते हैं। उनका कहना है कि गाजा में चल रहे युद्ध से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, तो हम इसमें क्यों पड़ रहे हैं। वे इजराइल और फिलिस्तीन के मुद्दे से दूर रहकर सिर्फ अपने बारे में सोचना चाहते हैं।’
3. फादर जॉर्ज, नॉर्थ लेबनान ईसाइयों को भी घर छोड़ना पड़ा, जंग अब खत्म है सेंट शारबेल चर्च में हमें फादर जॉर्ज मिले। वे कई साल से चर्च में रह रहे हैं और यहां की देखरेख करते हैं। इस चर्च में पूरे लेबनान से लोग आते हैं। फादर जॉर्ज अलग-अलग इलाकों के ईसाइयों से रोज मिलते हैं। हमने उनसे पूछा कि इजराइल-लेबनान जंग का ईसाई समुदाय पर क्या असर हुआ है?
वे कहते हैं, ‘युद्ध का असर बढ़ता जा रहा है। ये लेबनान के किसी एक इलाके तक ही सीमित नहीं रहा। ये साउथ लेबनान से शुरू हुआ था, लेकिन अब बढ़कर सेंट्रल लेबनान और नॉर्थ की तरफ बढ़ रहा है। हमें पता चला है कि साउथ और ईस्ट में कई ईसाई बहुल गांव के लोग पलायन कर रहे हैं।’

4. लूलू, बेरूत लेबनान में 5% द्रूस आबादी, कुछ हिजबुल्लाह के साथ बेरूत की रहने वाली लूलू सूकी द्रूस समुदाय से हैं। लेबनान की आबादी में द्रूस करीब 5% हैं। पेशे से आर्किटेक्ट लूलू कहती हैं, ‘युद्ध की वजह से मैं कई दिन से काम पर नहीं गई। हमारी जिंदगी नॉर्मल नहीं रही। जिन लोगों के पास ऑप्शन है, वे वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं।’
‘हम हमलों और धमाकों की वजह से सहमे रहते हैं। हर रात खौफनाक है। हाल में मेरे घर के पास ही स्ट्राइक हुई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि हमारा घर हिल गया। हम पूरी रात जागते रहे। उसके बाद से मुझे ठीक से नींद नहीं आ रही है। अब तो ये हर रोज हो रहा है।’

लूलू की छत से बेरूत एयरपोर्ट दिखता है। दाहिया का वो इलाका भी, जो इजराइल के निशाने पर है। हमने लूलू से पूछा कि आप इजराइल के बारे में क्या सोचती हैं? वे जवाब देती हैं, ‘इजराइल आतंकी देश है। हमारे देश पर हमला करता रहा है। वो सिर्फ हिजबुल्लाह को नहीं, दूसरे लोगों को भी मार रहा है।’
इजराइल के हमलों में बच्चों और महिलाओं की मौतें हो रही हैं। करीब 15 लाख लोग सड़कों पर रह रहे हैं। कोई सुरक्षित नहीं है। हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा।

लूलू कहती हैं, ‘मैं जिन स्कूल-कॉलेजों में पढ़ी हूं, वहां हर समुदाय के लोगों से मेरी दोस्ती रही है। मेरे कई दोस्त शिया हैं, सुन्नी हैं, क्रिश्चियन हैं। मेरे जानने वालों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई बार इजराइल वॉर्निंग देता है, अब कई बार तो बिना वॉर्निंग के हमले हो रहे हैं। ऐसे में लोगों को इलाका छोड़ने के लिए वक्त तक नहीं मिल पाता।’

5. गोशन, नॉर्थ लेबनान युद्ध अब बंद हो, हमें शांति चाहिए 63 साल के गोशन भी द्रूस समुदाय से हैं। टैक्सी चलाते हैं। वे बताते हैं कि एक महीने में लेबनान की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। लोगों में डर का माहौल है। लोग गाड़ियों में भरकर साउथ से नॉर्थ की तरफ आ रहे हैं। वे भूखे हैं। उनके पास खाने तक के लिए कुछ नहीं है। वे अपना सब कुछ पीछे छोड़कर आ रहे हैं। देश को इस हालत में देखकर मैं दुखी होता हूं। हम शांति से रहने वाले लोग हैं।’
‘इजराइल के खिलाफ ये लड़ाई सिर्फ मुसलमानों की नहीं है। ये लड़ाई हर लेबनानी की है। आपको ड्रोन की आवाज आ रही है। ये इजराइली ड्रोन हमारे देश के आसमान में उड़ रहे हैं। उनकी जब मर्जी होती है, जहां मर्जी होती है, हमला कर रहे हैं। ये क्या हो रहा है। आपने ऐसा होते हुए कहीं देखा है। हम तबाही की तस्वीरें देखते हैं, तो ये सब देखकर तकलीफ होती है।’
हमने गोशन से पूछा कि आप नसरल्लाह के बारे में क्या सोचते हैं? वे जवाब देते हैं…

लेबनान में हो रहे हमलों और धमाकों पर बात करते हुए गोशन भावुक हो जाते हैं। चीखकर कहते हैं, ‘स्टॉप दिस वॉर, वेअर वी आर गोइंग (ये युद्ध खत्म करो, हम कहां जा रहे हैं)… कई लोगों की मौत हो चुकी है। हमें शांति चाहिए। शांति ही एकमात्र रास्ता है।’
इजराइली PM के घर पर ड्रोन अटैक, नेतन्याहू बोले- गलती कर दी हिजबुल्लाह ने इजराइली PM बेंजामिन नेतन्याहू के घर पर शनिवार को ड्रोन अटैक किया था। इसके बाद इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली सेना लेबनान में अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन चला रही है। हिजबुल्लाह ने भी इजराइल के उत्तरी इलाकों पर कई रॉकेट हमले किए हैं।

नेतन्याहू ने अपने घर पर हुए हमले को हिजबुल्लाह की भारी गलती करार दिया। नेतन्याहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि मेरी हत्या का प्रयास हिजबुल्लाह को खत्म करने से नहीं रोक सकता।
हिजबुल्लाह ने नेतन्याहू के होम टाउन सिसेरिया को ड्रोन से निशाना बनाया था। इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया कि हमले में PM नेतन्याहू का निजी घर निशाने पर था। हमले के वक्त नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा घर पर नहीं थे।
ड्रोन सिसेरिया की एक इमारत पर गिरा। इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) के मुताबिक लेबनान ने इजराइल में 3 ड्रोन भेजे थे। इजराइली फोर्सेस ने 2 ड्रोन मार गिराए। IDF ने माना है कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम हमले को रोकने में नाकाम रहा।

WHO बोला- जंग में अब तक 43 हेल्थ वर्कर्स की मौत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने बुधवार को कहा कि 17 सितंबर से शुरू हुए हमले में इजराइल-लेबनान के बाद हेल्थ फैसिलिटी को टारगेट करके 23 हमले हुए हैं। इनमें 43 हेल्थ वर्कर्स समेत 72 लोगों की मौत हुई है। जंग वाले इलाकों में 207 प्राइमरी हेल्थ सेंटर में से 100 बंद हैं। लेबनान में हेल्थ फैसिलिटी कमजोर हुई है। लगातार काम करने की वजह से हेल्थ वर्कर्स भी थक गए हैं।
बेरूत में हिजबुल्लाह के सीक्रेट कमांड सेंटर पर हमला इजराइली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के सीक्रेट हेडक्वार्टर पर हमला किया है। इजराइली डिफेंस फोर्स ने कहा है कि रविवार सुबह एयरफोर्स ने हिजबुल्लाह के एक कमांड सेंटर और हथियार बनाने वाली अंडरग्राउंड यूनिट पर हमला किया है। इस हमले में हिजबुल्लाह का सीनियर कमांड अल-हज अब्बास सलामा की मौत हो गई। हिजबुल्लाह ने हमलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इजराइली हमले में लेबनान के 3 सैनिकों की मौत लेबनानी सेना ने बताया है कि साउथ लेबनान में उसके वाहन पर इजराइली सेना ने अटैक किया है। इस हमले में उनके तीन सैनिक मारे गए। लेबनान की सेना ने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे युद्ध से खुद को अलग रखा है। रविवार के हमले पर इजराइली सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
ईरान पर इजराइली पलटवार से जुड़े सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक इजराइल के ईरान पर हमले की प्लानिंग से जुड़ी सीक्रेट डॉक्यूमेंट अमेरिका से लीक हो गए हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इसकी जांच शुरू कर दी है। CNN ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से लिखा कि 18 अक्टूबर, शुक्रवार को टेलीग्राम पर ‘मिडिल ईस्ट स्पेक्टेटर’ नाम के चैनल ने पोस्ट किया है। इन डॉक्यूमेंट पर टॉप सीक्रेट और 15 और 16 अक्टूबर की तारीख लिखी हुई है।
ईरान ने इजराइल पर 1 अक्टूबर को 180 मिसाइलों से हमला किया था। इसके बाद इजराइल ने पलटवार करने की बात कही थी। उससे जुड़े डॉक्यूमेंट का लीक होना अमेरिका के लिए गहरी चिंता का विषय है। ये डॉक्यूमेंट सिर्फ अमेरिका और उसके सहयोगी देश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के लिए हैं। ये सभी देश खुफिया नेटवर्क फाइव आइज का हिस्सा हैं।
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