ज़िन्दगी के थपेड़ों का ज़िमेदार है सरकारी चरित्र प्रमाण पत्र
झोला छाप ख़बरी
ज़िन्दगी के थपेड़ों का ज़िमेदार है सरकारी चरित्र प्रमाण पत्र …..जो नागरिकों दुशासन साबित करता है ?
रोज़ाना भारत मे सेकड़ो लोगो पर थानों में किसी न किसी वजह से एफआईआर होती है और वो आरोपी बन जाते लेकिन 8 से 10 बाद कोर्ट उन्हें निर्दोष साबित कर देती है ।
ये चरित्र प्रमाण पत्र एक आम नागरिक को चरित्र हीन बना देता है । वो भी न्यायालय के फैसले के पहले ही फिर चाहे वो गुनहगार हो ही नही …..?
सेकड़ो लोग जो सरकारी नोकरी में है या प्रिवेट सेक्टर में उच्च पद पर बैठे है या फिर मालिक हो उनके चरित्र का सत्यपन कैसे हो जिनके चरित्र पर सेकड़ो दाग ,जांच ,और भ्रष्टाचार के आरोप लगे है ?
आजकल पत्रकारिता संस्था भी पत्रकारिता के लिए पत्रकारो से चरित्र प्रमाणपत्र मांगती है …..?
पत्रकार तो बेचारे वैसे ही सच को सामने लाने के चक्कर मे सबसे बड़ा चरित्र हीन हो जाता है ….? अब उसके चरित्र का सत्यपन सरकारी कागज़ पर तो पूर्ण रूप से चरित्र हीन की पॉडकास्ट के भी ऊपर होगा क्योंकि दूसरे के चरित्र को बचाने के चक्कर मे वो दुनिया ,देश ,और जनता के बीच सबसे बड़ा चरित्र हीन होता है ….? क्योकि वो दुशासन है जो सरकारी सिस्टम का चीरहरण अपनी कलम से करता है ….?
