विधायक ,मंत्री के जाल में मत्स्य विभाग ….?
भारत का सबसे बड़ा बांध इंदिरासागर डेम स्थानीय नेताओ के कांटे में उलझा ….विगत डेढ़ वर्षो से करोड़ो रुपये का जो राजस्व मत्स्य विभाग व मध्यप्रदेश शासन को मिलना था वह स्थानीय क्षत्रपों एवं जनप्रतिनिधियों की लूट खसूट का ऐश गहा बन गया है आलम ये है कि मत्स्य अधिकारी एवं विभाग पुलिस थानों के चक्कर लगा लगा कर थक गया लेकिन सुनवाई के नाम पर सरकारी कागज़ पर एक एफआईआर तक दर्ज नही हो पाती इससे क्षेत्री भाजपा नेताओं के आतंक को समझा जा सकता है । ऐसा नही है कि संचालक मत्स्य विभाग मध्यप्रदेश शासन में वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत नही कराया हो बार बार गंभीरता पूर्वक विभाग के वरिष्ठ अफसरों माननीय मंत्री महोदय तक को पत्रचार किया गया लेक़िन पूरा मामला सत्ता पक्ष के जुड़गे लोगो के होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है ….
इसका खामियाजा मत्स्य विभाग सेकड़ो करोड़ो रूपये की बाली देकर चुका रहा है और प्रदेश सरकार कर्ज से चल रही है …..और भाजपा देश की सबसे अमीर पार्टी में 10 वर्षो में सुमार है ….?
सत्ता पक्ष के लचर रवैये के कारण कोईभी बड़ी कंपनी अथवा व्यवसाई इंदिरासागर डेम को लेने में रुचि नही दिखा रहा ….?
ऐसे में नए मुख्यमंत्री डॉ मोहान यादव को विशेष तौर पर पूरे मामले की समीक्षा कर खुद एक जाल बिछाना होगा तभी कांटे में मछली मारने वाला बड़ा राजनीति मगरमच्छ फसेगा वही जनता को असामाजिक तत्वों को संरक्षण देने वाले सत्ता धारी ,पुलिस ,प्रशासन को संरक्षित जाल में फासे मत्स्य विभाग को मुक्त कराने हैतू योजना बनानी होगी और भाजपा के जनप्रतिनिधियों के जाल में फसे मत्स्य विभाग को भी बचना होगा …?
