दुनिया में हर व्यक्ति सुख की चाह में दौड़ता रहता है।

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स्वजन प्रणाम
सुविचार
दुनिया में हर व्यक्ति सुख की चाह में दौड़ता रहता है।वह जीवन भर सुखी रहना चाहता है,लेकिन सुख की चाह कब पूरी होगी वह नहीं जानता। मृगमरीचिका की भांति वह बस भटकता रहता है। सुख की चाह ऐसी प्रबल होती है कि वह दुख का कारण बनने लगती है।सुख कब दुख में बदल जाता जाता है उसे पता नहीं चलता है। जो सुख के क्षण उसके करीब होते हैं वह उसे अनुभव नहीं कर पाता। उसे बड़ी खुशी की लालसा रहती है।उसे दीर्घकालिक सुख चाहिए होता है।मनुष्य को यह समझ लेना चाहिए कि उसका वर्तमान ही उसके सुख का कारण बन सकता है।अगर वह अभी सुख का अनुभव कर रहा है तो निश्चित ही कल सब ठीक ही होगा। अगर उसे दुख और विपत्ति या प्रतिकूलता को भी हंसते हुए टालने का हुनर आ जाए तो वह दुख के नागपाश में कभी भी नहीं फस सकता है। फिर वह हर क्षण को सुख में जीने लगेगा। उसे हर परिस्थित में आनन्द की अनुभूति होने लगेगी।
यदि “सुख” की इच्छा है तो “चरित्र” का निर्माण में लगे रहना चाहिए,
यदि “धन” की कामना है तो “आचरण” को सदैैव ऊँचा रखना चाहिए,
और यदि “स्वर्ग” की ईच्छा हो तो देवताओं के जैसे “पूज्यनीय” बनने का प्रयत्न करते रहना चाहिए।
🌳🌳विजय राघव गढ़ 💐🌳

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