टीकमगढ़ जेल से जुड़ी एक और याद का आज दुखद अंत हो गया।Ajay vishnoi

टीकमगढ़ जेल से जुड़ी एक और याद का आज दुखद अंत हो गया। मैं जबलपुर जेल से ट्रांसफर होकर टीकमगढ़ गया था। उसके बाद भाई शंकरलाल तिवारी, गौतम जी एवं एडवोकेट मिश्रा (हमारे हेमंत मिश्रा जी के पिताश्री) रीवा जेल से ट्रांसफर होकर आए थे। उनके पैरों में बेड़ियाँ थीं, हाथों में हथकड़ियाँ, और उन हथकड़ियों-बेड़ियों को जोड़ने वाला एक डंडा था — एक-एक कदम चलना भी कठिन था।
सौभाग्य था कि तब तक टीकमगढ़ जेल पर मेरा नियंत्रण हो चुका था। मेरे कहने पर तुरंत तीनों की हथकड़ी और बेड़ियाँ खुलवा दी गईं।
बाद में शंकरलाल जी के साथ युवा मोर्चे में काम किया, वे विधायक बने, और लंबे समय तक हम विधानसभा में साथ-साथ बैठे। शंकरलाल जी प्रखर वक्ता, मुखर व्यक्तित्व और अद्भुत ओज के धनी थे।
आज उनके देवलोकगमन के समाचार ने मुझे भीतर तक दुखी कर दिया है। अफसोस है कि अमेरिका में होने के कारण मैं भाई शंकरलाल तिवारी जी को अंतिम विदाई देने नहीं जा पा रहा हूँ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि भाई शंकरलाल तिवारी जी को अपने चरणों में स्थान दें।
ॐ शांति… ॐ शांति… 🙏
