23 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग भोपाल में सुनवाई नियत

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लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे के खिलाफ 25 हजार का जुर्माना लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी

23 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग भोपाल में सुनवाई नियत

( दैनिक विदिशा जागरण भोपाल अंक में प्रकाशित समाचार, खबर प्रकाशन के लिए आभार )

विदिशा जागरण, भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने जबलपुर के संभागीय खेल अधिकारी एवं लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे के खिलाफ 25 हजार के जुमनि की चेतावनी के साथ कार्यवाही शुरू कर दी है। आयोग के आयुक्त ओंकार नाथ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 23 नवंबर 2025 को भोपाल स्थित आयोग कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दिया है।

सूचना छुपाने पर आरटीआई अधिनियम के तहत कार्यवाही पूरा मामला

वर्ष 2022 में दायर एक सूचना अधिकार आवेदन से जुड़ा है। अपीलार्थी विनय डेविड ने रानीताल स्थित मध्य प्रदेश तीरंदाजी अकादमी और जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग, जबलपुर से संबंधित जानकारी मांगी थी। लेकिन तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे ने आवेदन को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि आवेदन शुल्क के रूप में जमा किया गया 10 रुपए का पोस्टल ऑर्डर अधूरा था। क्योंकि उसमें ऊपर दिए विभाग या

अधिकारी का नाम नहीं था। सूचना न देने के इस निर्णय को आयोग ने कानून के विपरीत और नागरिक अधिकारों का हनन माना है। अपीलाथों ने पहले प्रथम अपील अधिकारी (पुलिस अधीक्षक, जबलपुर) के समक्ष अपील की थी, लेकिन वहां भी किसी प्रकार की सुनवाई या आदेश पारित नहीं किए गए, जिसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की।

सिर्फ पोस्टल ऑर्डर पर नाम न होने से नहीं रद्द कर सकते आवेदन 29 अगस्त 2025 को हुई सुनवाई में राज्य सूचना आयोग ने पाया कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी अधिनियम की धारा 8 और 9 के किसी भी अपवाद के तहत नहीं आती, इसलिए जानकारी प्रदान करने योग्य थी। आयुक्त ओंकार नाथ ने अपने आदेश में कहा कि आम नागरिकों को यह सामान्यत यह मालूम नहीं होता कि पोस्टल ऑर्डर किस अधिकारी के नाम देय किया जाए, इसलिए लोक सूचना अधिकारी को आवेदन स्वीकार कर जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए था, न कि उसे निरस्त करना चाहिए था। आयोग ने स्पष्ट रूप से माना कि लोक सूचना अधिकारी ने ऋक्षा अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन किया है, जो धारा 20 के तहत दंडनीय अपराध है।

एक माह में देनी होगी पूरी जानकारी : राज्य सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को आदेशित किया है कि आदेश प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर अपीलार्थी विनय डेविड को मांगी गई पूरी जानकारी एवं प्रमाणित प्रतियां निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं। यदि किसी अभिलेख की प्रति उपलब्ध नहीं है, तो उसकी स्पष्ट लिखित सूचना भी प्रदान करनी होगी।

प्रथम अपीलीय अधिकारी पर भी आयोग की नाराजगी : प्रकरण में प्रथम अपील अधिकारी एवं जबलपुर के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा को भी आयोग ने लापरवाही का दोषी माना आयोग ने पाया कि उन्होंने निर्धारित समयावधि में अपील का निराकरण नहीं किया, जो ऋऋतु अधिनियम की धारा 19(1) के विपरीत है। आयुक्त ने उनकी कार्यशैली की निंदा करते हुए समझाइश दी है कि भविष्य में वे अपीलों का निराकरण समय सीमा में करें और अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करें।

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