दशहरे की शुभकामनायें- Rajesh achal

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राज है न पाठ है
किंतु पूरा ठाठ है
इस बार जयविलास महल से दशहरा समारोह के लिए मेरे पास भी ई-निमंत्रण आया था, लेकिन टखनापीर की वजह से जा न सका. इसलिए यहीं से बाप-बेटे को शुभकामनायें दे रहा हूँ. दोनों जैसे भी हो अपनी पाग संवारे हुए हैं यही क्या कम है? वरना कितने महल खंडहर हो गए हैं. 🌹🙏
