राजगढ़ : भाजपाई जीत के प्रति कम आशावान-(श्याम चौरासिया )

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मप्र में तीसरे दौर में सम्पन्न 09 लोकसभा श्रेत्रो में राजगढ़ में सर्वाधिक करीब 77% वोटिंग का कीर्तिमान रचने के बाबजूद कुछ भाजपाई विश्लेषक बीजेपी की बजाय कंग्रेस के राजा दिग्गी के सर सेहरा बंधने की भविष्यवाणी कर चौका रहे है। ठीक इसके विपरीत एक भी बड़े से बड़ा और अदने से अदना कांग्रेसी बीजेपी की जीत को गले उतारने के लिए तैय्यार नही लगता। ये अंतर, मनोदशा, आत्मविश्वास,और भक्ति को प्रकट करता है। जबकि बीजेपी के पास बूथ लेबल तक सक्रिय संगठन है। कांग्रेस के पास मंचीय सूरमाओं की टुकड़ियां है।
इस खासियत के बाबजूद यदि राजा दिग्गी के बाजी मारने की भविष्यवाणी कुछ भाजपाई विश्लेषक करते है तो कांग्रेसियो की बल्ले बल्ले तो बनता ही है।
समूचे देश मे कांग्रेस के प्रति विश्वास का घोर अभाव है। राहुल,सोनिया सहित अधिकांश नेता जमानत पर है। झारखंड, राजस्थान सहित अन्य सूबो ने कांग्रेसी मंत्रियों के यहां पड़े छापो में करोड़ो नोटो के पहाड़ बरामद हो रहे है। राहुल के बेतुके, अमर्यादित बयानों ओर पाक के राहुल की जीत की मन्नत मांगने के बाबजूद यदि राजगढ में कमल की बजाय पंजा बाजी मारता है तो चिता का विषय हो सकता है। वो भी भाजपा के गढ़ मालवा में। जबकि बीजेपी की आंधी नही बल्कि सुनामी चल रही है।
राजगढ़ की 08 ने 06 सीटों पर बीजेपी और 02 पर कांग्रेस का कब्जा है। 02 राजमंत्री नारायण सिंह पवार, गौतम टेटवाल, विधायक मास्टर हजारीलाल दांगी, मोहन शर्मा,अमर सिंह जैसे जुझारू,व्यापक जनाधर वाले जौहरियों की वजह से बीजेपी के सारे ग्रह बलवान लगते है। जबकि कांग्रेस के पास पूर्व विधायक रामचन्द्र दांगी, कृष्ण मोहन मालवीय, लक्ष्मण सिंह-छोटे राजा जैसे दिग्गजों की पूँजी है। लक्ष्मण सिह हालिया विधान सभा चुनाव में चाचौड़ा से 61 हजार मतों से हार चुके है। कांग्रेस ने सुसनेर, राघोगढ़ सीट 05 हजार के अंदर के अंतर से जीती।जबकि बीजेपी ने 06 सीट औसतन 42 हजार के भारी अंतर से जीती। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को 04.30 लाख मतों के भारी अंतर से चित्त किया था।
रिकार्ड तोड़ फसल काटने के बाबजूद यदि बीजेपी टसक जाती है तो इस अप्रिय अनहोनी के लिए बीजेपी नही बल्कि बीजेपी प्रत्याशी रोडमल नागर की नकारात्मक ओर खो-बत्ती देने की नीतियां जिम्मेदार मानी जा सकती है। यदि पांसा पलटता है तो उसके लिए कांग्रेस नही बल्कि राजा दिग्गी के व्यक्तिगत समंध ओर उनकी it टीम की जीत होगी। राजा की it टीम के फैलाए झूट, प्रपंच,रायते का जबाब भाजपाई क्यो नही दे पाए? यदि दिया तो उस पर जनता ने विश्वास क्यो नही किया? इन यक्ष प्रश्नों पर सवाल जरूर खड़े हो सकते है।
बीजेपी किसान मोर्चे के मानसिह टोंका, राजगढ़ बीजेपी उपाध्यक्ष अमित शर्मा, पूर्व विधायक राजवर्धन सिह, प. हरिचरण तिवारी, बद्रीलाल यादव आदि बीजेपी के भारी मतों से जीत के प्रति पूरी तरह आशावान है। विधायक मास्टर हजारीलाल दांगी दो कदम आगे जाकर कहते है। 33 साल बाद राजगढ़ की सुध लेने और दर्शन देने वाले राजा का सूर्य अस्त हो चुका है। चमक,दमक,विश्वास खो चुके है।
Evm में बंद जनमत 04 जून को खुलेगा। तब तक अटकलों, कयासों, चुस्कियों का दौर चलता रहेगा।

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