जबलपुर में जिस बैंक से सोना लूटा,वह पहले एनजीओ था
जबलपुर जिले में संभवतः पहली बार इतनी बड़ी दिनदहाड़े लूट की वारदात हुई है। जिले के खितौला क्षेत्र में स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखा में सोमवार सुबह पांच लुटेरे सिर्फ 18 मिनट में लगभग 14.5 करोड़ रुपए का सोना और 5 लाख रुपए नकद लेकर फरार हो गए। यह वारदात इतनी सफाई से अंजाम दी गई कि बैंक कर्मचारियों को भी शुरुआत में संदेह नहीं हुआ।
लुटेरे बैंक में घुसे,कट्टे की नोक पर जेवरात बैग में भरे। इस बीच उन्होंने बैंककर्मियों को धमकाया। उनसे अपने बैग में सोना भरवाया और आखिर में बाथरुम में बंद कर चले गए।
घटना जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित सिहोरा के मेन रोड पर हुई। यह बैंक 8 साल पहले तक एनजीओ हुआ करता था। लूट की इस बड़ी वारदात को पकड़ने के लिए अब सिर्फ जबलपुर ही नहीं, बल्कि कटनी, दमोह, मंडला और डिंडौरी जिलों की पुलिस भी तलाश में जुटी है। पुलिस ने अब तक 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले हैं, लेकिन लुटेरों का कोई सुराग नहीं मिला है।

2017 था में बना था बैंक, पहले एनजीओ था
इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक मार्च 2017 में लघु वित्तीय बैंक बना और जनवरी 2018 से इसका संचालन शुरू हुआ। इससे पहले यह एक एनजीओ के रूप में काम करता था। जबलपुर जिले में इस बैंक की कई शाखाएं हैं, जिनमें से एक सिहोरा में है।
घटना वाले दिन सोमवार सुबह 7 बजे, समूह लोन विभाग के कर्मचारी बैंक पहुंचे और लॉगिन करने के बाद चले गए। 7:30 बजे सफाईकर्मी संतराम बर्मन पहुंचा और सफाई कार्य में जुट गया। सवा आठ बजे बैंक मैनेजर अंकित सोनी और डिस्ट्रिक्ट मैनेजर राघवेंद्र पटेल आए और रोजमर्रा के काम में लग गए।

8:57 बजे घुसे लुटेरे, 18 मिनट में बैंक लूट लिया
सुबह 8:57 बजे, तीन बाइकों पर सवार पांच लुटेरे ब्लैक हेलमेट पहनकर बैंक में दाखिल हुए। बैंक के कर्मचारी पहले तो उन्हें आम लोग समझते रहे और काम में लगे रहे। तभी एक बदमाश मैनेजर अंकित सोनी के पास पहुंचा और कट्टा दिखाकर बोला, “बैंक में डकैती पड़ रही है, अगर किसी ने शोर मचाया तो गोली मार दूंगा।”
इसके बाद लुटेरों ने मैनेजर से लॉकर की चाबी मांगी। लॉकर दो चाबियों से खुलता है, एक अंकित के पास थी, जो उसने दे दी। कुछ देर बाद बैंक अधिकारी रीना पटेल अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गईं, उन्हें पहले यह नहीं समझ आया कि बैंक में लूट चल रही है। लुटेरों ने उनसे भी लॉकर की चाबी छीन ली और फिर लॉकर खोलकर जेवरात निकालने लगे।

बैंककर्मियों को धमकाया, मदद भी करवाई
लुटेरे कट्टे की नोक पर जेवरात बैग में भर रहे थे। इस बीच उन्होंने बैंककर्मियों को धमकाया, ‘तुम लोग भी मदद करो, जेवरात बैग में भरने में।’ जब कर्मचारियों ने धीमी गति से काम किया, तो लुटेरों ने उन्हें हटा दिया और खुद तेजी से सोना भरना शुरू कर दिया।
लूटपाट के दौरान उनकी नजर कैश काउंटर पर पड़ी, जहां 5 लाख रुपए नकद रखे थे। वे इसे भी लेते गए।
कर्मचारियों को बाथरूम में बंद कर हुए फरार
18 मिनट की इस लूट के दौरान लुटेरों ने न सिर्फ गोल्ड और कैश लूटा, बल्कि सभी बैंककर्मियों को अलग-अलग बाथरूम में बंद कर दिया और फिर बाइकों पर सवार होकर फरार हो गए।
बैंक अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि सामान्यतः बैंक की नकद लिमिट 10 से 12 लाख रुपए होती है। राखी के त्योहार को देखते हुए दो दिन पहले एटीएम में 5 से 7 लाख रुपए डाले गए थे और बाकी 5 लाख बैंक में रखे गए थे।

सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं
पुलिस जांच में सामने आया कि बैंक में करोड़ों रुपए का सोना रखा था, लेकिन सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं थे। न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात था, न चैनल गेट था। बैंक मुख्य सड़क पर स्थित है, इसलिए लुटेरे आम लोगों की भीड़ में शामिल होकर बड़ी आसानी से दाखिल हो गए और लूट को अंजाम दे दिया।

15 थाने समेत क्राइम ब्रांच लुटेरों की तालाश में
सुबह 11 बजे जब एसपी संपत उपाध्याय को लूट की सूचना मिली, तो उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद डीआईजी अतुल सिंह, एएसपी सूर्यकांत शर्मा और एएसपी जितेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। डीआईजी के निर्देश पर पूरे जिले में नाकाबंदी कर दी गई है।
लुटेरों की तलाश के लिए 15 थानों की पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें लगी हैं। 100 से ज्यादा CCTV कैमरे खंगाले जा चुके हैं, लेकिन लुटेरे अभी तक पकड़ से बाहर हैं। सभी लुटेरे ब्लैक हेलमेट पहने हुए थे, जिससे पहचान मुश्किल हो रही है। पुलिस अब सिहोरा और जबलपुर की उन दुकानों से भी पूछताछ कर रही है जहां से हाल ही में एक साथ 5 हेलमेट खरीदे गए हों।
लूटे गए सोने का बीमा था
पुलिस की जांच में पता चला है कि लॉकर में रखा सारा सोना ग्राहकों का था और 14.5 करोड़ रुपए के इस सोने का बीमा भी कराया गया था।
हालांकि इस घटना के बाद बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जहां अन्य बैंक सुबह 10:30 बजे खुलते हैं, वहीं इसाफ बैंक सुबह 7 बजे ही खुल जाता है। इतनी बड़ी संपत्ति होने के बावजूद बैंक ने न तो कोई सुरक्षा गार्ड रखा, और न ही बैंक की सुरक्षा के लिए बुनियादी उपाय किए।

