शपथपत्र ओर शपथग्रहण में मचो मचोना अनेकों सबालो का जन्म भी हो सकता : पवनघुवारा भूमिपुत्र
शपथपत्र ओर शपथग्रहण में मचो मचोना अनेकों सबालो का जन्म भी हो सकता : पवनघुवारा भूमिपुत्र
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जन मानस में चिंता हो रही अनेकों सबालो का जन्म भी हो सकता है जैसे अगर चिकित्सा में भी कहीं अब सब जगह शपथ पत्र देकर ही मिलेगा प्रवेश तभी हो सकेगा डाक्टर आयोगों से निदान अन्यथा आप सही हो अथवा नही यह निर्णय रहेगा शपथ पत्र आधारित । क्या अस्पतालो मे मरीज को शपथ पत्र भी लगेगा ,मरीज अपने स्वास्थ्य के बाहरी लक्षण तो डाक्टर को बताए यहां तक तो ठीक है लेकिन इलाज की जांच के लिए देना चाहिए शपथ पत्र यदि मरीज ने जो लक्षण बताये और उससे अधिक जांच रिपोर्ट में अधिक आई बीमारी तो डाक्टर कर सकता हैअपना बचाव की मरीज ने जो शपथ पत्र में लिखा था उसी आधार पर डाक्टर कहे कि इलाज जो करना था वह मेने तो अपना कर्तव्य पूरा किया। पवनघुवारा ने जनहितार्थ ध्यान आकर्षित करते हुए विज्ञप्ति में लिखा है कि आज जिस तरह से शपथपत्र ओर शपथग्रहण दोनों स्थिति परिस्थितियों में मचो है जो मचोना आखिर क्या आयोगों में हो रही प्रयोगात्मक परीक्षाएं है। गोरतलब है कि एक वोटर कई बार वोट कैसे कर सकता है l और भी कई प्रश्न है जिनका जवाब जानना हम सबकी जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है,अपने देश में जहां सीता की अग्निपरीक्षा का उत्सव हमारी संस्कृति भी है । सीज़र की पत्नी को संदेह से परे होना चाहिए।
यह एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को संदेह से परे होना चाहिए, खासकर जब वह किसी महत्वपूर्ण पद या जिम्मेदारी पर हो। यह कहावत जूलियस सीज़र की पत्नी के संदर्भ में आई है, जो रोमन इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थीं।
इस कहावत का अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी प्रतिष्ठा और विश्वास को बनाए रखने के लिए संदेह से परे होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति पर संदेह किया जाता है, तो इससे उसकी प्रतिष्ठा और विश्वास को नुकसान पहुंच सकता है।
आशा ही नहीं विश्वास है चुनाव आयोग को स्वेच्छा से खुद को जाँच के लिए प्रस्तुत करना चाहिए। संविधान द्वारा आपको दी गई शक्तियों का उपयोग करें और अपने उच्च पद को सौंपी गई ज़िम्मेदारी को पूरा करें । (पवनघुवारा भूमिपुत्र टीकमगढ़ )
शपथपत्र ओर शपथग्रहण में मचो मचोना अनेकों सबालो का
http://dhunt.in/11r1Hd
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जन मानस में चिंता हो रही अनेकों सबालो का जन्म भी हो सकता है जैसे अगर चिकित्सा में भी कहीं अब सब जगह शपथ पत्र देकर ही मिलेगा प्रवेश तभी हो सकेगा डाक्टर आयोगों से निदान अन्यथा आप सही हो अथवा नही यह निर्णय रहेगा शपथ पत्र आधारित । क्या अस्पतालो मे मरीज को शपथ पत्र भी लगेगा ,मरीज अपने स्वास्थ्य के बाहरी लक्षण तो डाक्टर को बताए यहां तक तो ठीक है लेकिन इलाज की जांच के लिए देना चाहिए शपथ पत्र यदि मरीज ने जो लक्षण बताये और उससे अधिक जांच रिपोर्ट में अधिक आई बीमारी तो डाक्टर कर सकता हैअपना बचाव की मरीज ने जो शपथ पत्र में लिखा था उसी आधार पर डाक्टर कहे कि इलाज जो करना था वह मेने तो अपना कर्तव्य पूरा किया। पवनघुवारा ने जनहितार्थ ध्यान आकर्षित करते हुए विज्ञप्ति में लिखा है कि आज जिस तरह से शपथपत्र ओर शपथग्रहण दोनों स्थिति परिस्थितियों में मचो है जो मचोना आखिर क्या आयोगों में हो रही प्रयोगात्मक परीक्षाएं है। गोरतलब है कि एक वोटर कई बार वोट कैसे कर सकता है l और भी कई प्रश्न है जिनका जवाब जानना हम सबकी जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है,अपने देश में जहां सीता की अग्निपरीक्षा का उत्सव हमारी संस्कृति भी है । सीज़र की पत्नी को संदेह से परे होना चाहिए।
यह एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को संदेह से परे होना चाहिए, खासकर जब वह किसी महत्वपूर्ण पद या जिम्मेदारी पर हो। यह कहावत जूलियस सीज़र की पत्नी के संदर्भ में आई है, जो रोमन इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थीं।
इस कहावत का अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी प्रतिष्ठा और विश्वास को बनाए रखने के लिए संदेह से परे होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति पर संदेह किया जाता है, तो इससे उसकी प्रतिष्ठा और विश्वास को नुकसान पहुंच सकता है।
आशा ही नहीं विश्वास है चुनाव आयोग को स्वेच्छा से खुद को जाँच के लिए प्रस्तुत करना चाहिए। संविधान द्वारा आपको दी गई शक्तियों का उपयोग करें और अपने उच्च पद को सौंपी गई ज़िम्मेदारी को पूरा करें । (पवनघुवारा भूमिपुत्र टीकमगढ़ )
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यह एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को संदेह से परे होना चाहिए, खासकर जब वह किसी महत्वपूर्ण पद या जिम्मेदारी पर हो। यह कहावत जूलियस सीज़र की पत्नी के संदर्भ में आई है, जो रोमन इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थीं।
इस कहावत का अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी प्रतिष्ठा और विश्वास को बनाए रखने के लिए संदेह से परे होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति पर संदेह किया जाता है, तो इससे उसकी प्रतिष्ठा और विश्वास को नुकसान पहुंच सकता है।
आशा ही नहीं विश्वास है चुनाव आयोग को स्वेच्छा से खुद को जाँच के लिए प्रस्तुत करना चाहिए। संविधान द्वारा आपको दी गई शक्तियों का उपयोग करें और अपने उच्च पद को सौंपी गई ज़िम्मेदारी को पूरा करें । (पवनघुवारा भूमिपुत्र टीकमगढ़ )
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