भोपाल पुलिस के साथ एक सार्थक संवाद
आज देर शाम 7 नगर हॉकर्स कॉर्नर पर जब मैं पहुंचा तो देखा पुलिस वहां से गाडियां हटवा रही है और वीडियो बनाते हुए कह रहे थे रसीद कटेगी। अब मैं ठहरा मैं, चूंकि ट्रैफिक के अधिकांश नियमों का पालन करता हूं, गाड़ी स्पीड लिमिट में रखने को कोशिश करता हूं , स्कूटर पर हेलमेट और कार में सीटबेल्ट हमेशा लगाता हूं, मेरी गाडी की PUC भी हमेशा अपडेटेड रहती है, नो पार्किंग में गाड़ी नहीं खड़ी की कोशिश करता हूं।
मुझे अच्छे से मालूम है उस स्थान पर दोनो तरफ No Parking का कोई बोर्ड नही है और दिन में गाडियां सड़क पर सफेद लाइन के बाहर खड़े होने पर कभी चालान नही बनता। इसलिए मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ। जब मेरी गाड़ी की फोटो ली गई और एक सिपाही ने बोला आपकी रसीद कटेगी तो मैंने भी कहा आप अपना काम करिए मैं अपना करता हूं, और उस स्थान की फोटो ले ली। मैंने अपना विरोध भी प्रकट कर दिया की यहां नो पार्किंग नही है, अगर आपको चालान बनाना है तो पहले नो पार्किंग के बोर्ड लगवा दें।
तब वहां उपस्थित इंचार्ज जो एक महिला इंस्पेक्टर थीं उन्होंने बड़े अच्छे से बात करते हुए समझाया की आप चिंता नही करें हम तो वीआईपी मूवमेंट के लिए कॉरिडोर क्लियर कर रहे हैं और उसका रिपोर्ट कर रहे हैं की रोड क्लियर कर दी गई है।
उनका बात करने का अंदाज बहुत रिस्पेक्ट फुल और सभ्य था जो पुलिस विभाग की इमेज के अनुरूप तो बिलकुल नहीं। फिर उन्होंने सिपाही की मजबूरी भी बताई की प्रेशर और ओवर वर्क हमेशा रहता है इसलिए कम शब्दों में काम करने की जल्दी में प्रेशर बनाया जाता है।
हम एक ग्रुप के तौर पर पुलिस की इस मजबूरी को अच्छे से समझते हैं और जब तक जरूरी नहीं होता हम पुलिस के बारे में नेगेटिव पोस्ट अप्रूव नही करते। हेलमेट, लाइसेंस चेकिंग इन सब मामलों में हमने हमेशा पुलिस के रुख का साथ दिया है । हम स्वयं कोशिश करते हैं की सड़कों पर नियमों का पालन हो जिससे सड़कें सुरक्षित और आवगमन सुगम रहे।
उन महिला इंस्पेक्टर का नाम तो नही लिख रहा लेकिन उनके सभ्य संस्कारों के लिए उन्हे साधुवाद।
