मस्जिद को लेकर कलेक्टर की पोस्ट से भड़के हिंदू संगठन
जबलपुर के रांझी स्थित मढ़ई में गायत्री मंदिर की जमीन पर मस्जिद होने का दावा किया जा रहा है। इसे लेकर सोमवार को हिंदूवादी संगठनों ने जमकर हंगामा किया। भारी पुलिस बल के बीच कलेक्टर का अर्थी जुलूस निकाला गया।
प्रदर्शनकारी मस्जिद की तरफ बढ़े तो उन्हें बलपूर्वक रोकना पड़ा। करीब 2 घंटे बाद विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देकर अपना आंदोलन समाप्त किया। आज मंगलवार को भी जिले भर में 42 स्थानों पर प्रदर्शन किया जाना था।
हालांकि विश्व हिंदू परिषद ने आज के अपने पूरे कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। विभाग प्रमुख सुमित कुमार का कहना है कि वीएचपी के पदाधिकारियों की प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से बात हुई है। उन्हें आश्वासन दिया है कि कलेक्टर के खिलाफ जांच कमेटी गठित की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। इसके साथ ही एसडीएम को हटा दिया गया है।
कलेक्टर की पोस्ट के बाद बढ़ा था विवाद
इस हंगामे के पीछे की वजह 12 जुलाई की एक फेसबुक पोस्ट का माना जा रहा है। जबलपुर कलेक्टर के ऑफिशियल अकाउंट से शेयर की गई पोस्ट में लिखा था कि मौके पर कभी मंदिर निर्मित होने या मंदिर की भूमि पर मस्जिद निर्मित होने जैसा कोई प्रमाण नहीं पाया गया है। जांच में यह सिद्ध पाया गया है कि मस्जिद का निर्माण बंदोबस्त के पूर्व उनके कब्जे और मालिकी हक की भूमि पर ही हुआ है।
हालांकि कुछ ही घंटे बाद उसे डिलीट भी कर दिया गया था। लेकिन, तब तक यह पोस्ट हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में प्रदर्शन उग्र हो गया। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले बीते साल 2024 में भी इसी तरह का हंगामा हो चुका है।
इधर, रांझी के एसडीएम रघुवीर सिंह मरावी को हटा दिया गया। उनके स्थान पर नियुक्त नए एसडीएम ऋषभ जैन का कहना है कि यह पोस्ट कलेक्टर की जानकारी के बिना शेयर की गई थी।

लिखा-कब्जे के हिसाब से नहीं बने सर्वे नंबर
कलेक्टर जबलपुर के फेसबुक अकाउंट से जारी की गई पोस्ट में लिखा था कि रांझी एसडीएम आरएस मरावी ने जानकारी दी है कि कतिपय व्यक्तियों द्वारा रांझी तहसील की ग्राम मड़ई स्थित मस्जिद को हटाने के लिए 14 जुलाई को महाआंदोलन किए जाने का प्रचार-प्रसार विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किया जा रहा है।
कहा है कि जबलपुर तहसील रांझी स्थित ग्राम मड़ई में स्थित मस्जिद पर मस्जिद कमेटी द्वारा प्रथम तल किए जा रहे अतिरिक्त निर्माण कार्य के संबंध में बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद द्वारा शिकायत की गई थी। बताया था कि मस्जिद का निर्माण गायत्री बाल मंदिर संस्था की भूमि पर किया है और सीमांकन कर मस्जिद का निर्माण हटाया जाए।
शिकायत के संदर्भ में प्रकरण में मौका एवं राजस्व अभिलेखों की जांच की। विस्तृत सीमांकन के आधार पर वस्तुस्थिति के संबंध में एसडीएम ने कहा है कि उक्त मस्जिद का निर्माण वर्ष 1985 में किया गया है। इस प्रकार यह मामला मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित करने संबंधी किसी ऐतिहासिक विवाद से संबंधित नहीं है।
विवाद की शुरुआत मस्जिद में प्रथम तल पर अतिरिक्त निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की वजह से हुई। बंदोबस्त वर्ष 1990-91 के पूर्व मूल खसरा नंबर 326 था, जिसके कुल 8 बटांक थे। 2 बटांक 326/6 रकबा 0.008 हेक्टेयर और 326/7 रकबा 0.014 हेक्टेयर सैफुद्दीन के नाम दर्ज था।
बंदोबस्त के समय वर्ष 1990 में उस भूमि पर मस्जिद निर्मित थी लेकिन नक्शे में बटांकन नहीं हुआ था। एक बटांक खसरा नंबर 326/4 रकबा 0.022 हेक्टेयर भूमि गायत्री बाल मंदिर विद्यालय के नाम दर्ज था।
बंदोबस्त के दौरान मूल खसरा नंबर 326 के 8 बटांकों के नवीन नंबर 163 से 170 तक बने। किंतु, सर्वे नंबर मौके पर कब्जे के हिसाब से नहीं बनाए गए। नवीन सर्वे नंबरों के रकबे भी त्रुटिपूर्ण दर्ज किए गए।
गायत्री बाल मंदिर संस्था का नवीन नंबर 169 बनाया गया। यह बंदोबस्त के पहले बटांक नंबर 326/4 था। मौके पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी और न ही वर्तमान में मौके पर उक्त संस्था का कोई कब्जा है।

मंदिर की भूमि पर मस्जिद का कोई प्रमाण नहीं
पोस्ट में आगे लिखा- रिपोर्ट में बताया है कि बंदोबस्त के दौरान बनाए गए नक्शे में नवीन नंबर 169 को जिस स्थान पर त्रुटिपूर्ण दर्शित किया गया, वहां पर मौके में पूर्व से ही मस्जिद बनी थी। मौके पर पुराने खसरा नंबर 326 के किसी भी बटांक में उक्त संस्था का कब्जा होना नहीं पाया गया है।
मौके पर कभी मंदिर निर्मित होने या मंदिर की भूमि पर मस्जिद निर्मित होने जैसा कोई प्रमाण नहीं पाया है। जांच में यह सिद्ध पाया है कि मस्जिद का निर्माण बंदोबस्त के पूर्व उनके कब्जे और मालिकी हक की भूमि पर ही हुआ है।
लेकिन, बंदोबस्त में नवीन सर्वे नंबर और नक्शा कब्जे के अनुसार निर्मित नहीं किए गए। जिसकी वजह से वर्तमान में विवाद की स्थिति निर्मित हुई है। बंदोबस्त की उक्त नक्शा त्रुटि सुधार के लिए न्यायालय कलेक्टर जबलपुर में प्रकरण प्रस्तुत है।
एसडीएम मरावी ने कहा कि प्रकरण में बंदोबस्त की त्रुटि का सुधार कर वर्तमान कब्जे के अनुसार नक्शा और बटांक नंबर निर्मित करने की कार्यवाही की जाएगी। मस्जिद का निर्माण बंदोबस्त के पूर्व उनके कब्जे और मालिकी हक की भूमि पर ही हुआ है।
अतः उसे हटाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। मस्जिद के संबंध में आंदोलनकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। आंदोलनकारियों को विधि-विरुद्ध कार्यवाही कर कानून व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगाड़ने के लिए कई बार समझाइश दी जा चुकी है।

बिना कलेक्टर को बताए बिना शेयर की पोस्ट इधर, कलेक्टर के फेसबुक पेज पर शेयर की गई पोस्ट को कुछ ही देर बाद डिलीट भी कर दिया। विवाद बढ़ने लगा तो कलेक्टर ने रांझी एसडीएम रघुवीर सिंह मरावी को हटाकर उनके स्थान पर ऋषभ जैन को नियुक्त कर दिया।
दैनिक भास्कर ने एसडीएम ऋषभ जैन से बात की तो उन्होंने भी माना कि फेसबुक पोस्ट की वजह से गफलत पैदा हुई। एसडीएम रांझी ने बताया कि मामला कलेक्टर न्यायालय में पेंडिंग है। लेकिन, यह पोस्ट कलेक्टर की जानकारी में लाए बिना उनके ऑफिशियल पेज से शेयर कर दी गई। इससे गलतफहमी हुई है।
एसडीएम ने कहा कि तत्कालीन अधिकारियों ने बंदोबस्त के दौरान गलतियां की थी। कुछ जगह बटांक और रकबे में बदले हुए हैं। अभी प्रकरण कलेक्टर कोर्ट में एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर लंबित है।

मालिकाना हक में मिली है जमीन इधर, मस्जिद कमेटी की तरफ से कहा गया है कि जहां पर हमारी मस्जिद बनी है, उस पर हमारा मालिकाना हक है। जिस पर कोर्ट ने भी स्पष्टीकरण दे दिया है। जहां आज मस्जिद है, 1980 से पहले भी यहां पर मस्जिद ही थी। विहिप का प्रदर्शन ओछी राजनीति के तहत हो रहा है। प्रशासन की कार्रवाई बिल्कुल सही है।
एडवोकेट इरशाद अली ने बताया-
मस्जिद के नाम पर दो खसरे 165 और 166 हैं। दोनों में नाम दर्ज था। लेकिन, प्रशासन की गलती और लापरवाही के कारण एक खसरे से मस्जिद का नाम हट गया। जिसकी त्रुटि सुधार के लिए नायब तहसीलदार के प्रतिवेदन को कलेक्टर कोर्ट में पेश किया था। जहां उसकी जांच की गई।

जानिए क्या है विवाद की जड़


हिंदू संगठनों ने लगाए ये आरोप
- खसरा नंबर 169 की जमीन पर मस्जिद निर्माण किया गया है।
- वक्फ बोर्ड के नाम पर मात्र 1000 वर्गफीट भूमि का आवंटन है।
- मस्जिद का निर्माण करीब 3000 वर्गफीट में कर दिया है।
- मस्जिद की आड़ में अवैध रूप से मदरसा संचालित होने का भी आरोप।
- मस्जिद कमेटी ने मामला हाईकोर्ट में दायर किया था, लेकिन दस्तावेज न होने के चलते केस वापस लेना पड़ा।
विहिप 2021 से लड़ाई लड़ रही विवाद इसी बात पर है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज खसरा नंबर 169 पर मस्जिद का निर्माण कैसे कर लिया गया। बड़ी बात यह भी है कि गायत्री बाल मंदिर ट्रस्ट या कोरी परिवार की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है। विश्व हिंदू परिषद ही 2021 से इस जमीन की लड़ाई लड़ रही है।
