शिलॉन्ग में राजा-सोनम के हनीमून के आखिरी 9 घंटे
राजा रघुवंशी मर्डर केस की जांच हमारे राज्य की SIT कर रही है। जब तक वह विफल नहीं होती, CBI की कोई जरूरत नहीं। राज्य सरकार किसी भी अपराधी को संरक्षण नहीं देगी, चाहे वह स्थानीय हो या बाहरी।

मेघालय के पर्यटन मंत्री पॉल लिंगदोह ने ये बयान 8 जून को दिया था। दूसरी तरफ, कैबिनेट में उन्हीं के साथी कैबिनेट मंत्री एलेक्जेंडर लालू हेग ने कहा था, ‘अगर किसी को मेघालय पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वे केंद्रीय या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के पास जा सकते हैं। हमें कोई आपत्ति नहीं है।’
दोनों मंत्री SIT की जांच को लेकर इतने कॉन्फिडेंट इसलिए थे, क्योंकि टीम पांच दिन की जांच के बाद इस केस में अहम सुराग जुटा चुकी थी। दरअसल, राजा का शव मिलने के बाद ही मेघालय सरकार ने केस की जांच के लिए SIT बनाई थी। इसका मकसद गुमशुदा सोनम की तलाश करना था।
मेघालय पुलिस ने इसे ‘ऑपरेशन हनीमून’ नाम दिया था और इसके लिए 5 टीम बनाई थीं। इन टीमों ने जैसे-जैसे सबूत जुटाना शुरू किए, वैसे-वैसे सोनम पर शक गहराता चला गया। दैनिक भास्कर ने ऑपरेशन हनीमून से जुड़े किरदारों से बात कर समझा कि आखिर कैसे SIT ने सबूत जुटाए और हत्या वाले दिन 9 घंटे में क्या हुआ था…पढ़िए रिपोर्ट

ऑपरेशन हनीमून में 15 अफसर शामिल 2 जून को जैसे ही इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी का शव खाई में पड़ा मिला, मेघालय पुलिस को यकीन हो गया था कि ये केस इतना आसान नहीं है। भास्कर से बात करते हुए मेघालय के गृह मंत्री प्रेस्टोन टेनसांग कहते हैं- हनीमून मनाने आए कपल में से एक की हत्या और दूसरे का गायब होना, हमारे लिए चिंता का विषय था। सबसे बड़ी चिंता इस बात की थी कि इस घटना से हमारे राज्य के टूरिज्म बिजनेस पर बुरा असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा- मेघालय में हर साल 13 लाख पर्यटक आते हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर टिका है, इसलिए हमने इस पूरे मामले की जांच के लिए तत्काल ही SIT का गठन किया।

अब पांचों टीम और उनके काम के बारे में सिलसिलेवार जानिए…
पहली टीम: हत्या वाले दिन का पूरा एनालिसिस राजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और उसके मोबाइल एक्टिवेशन से ये पता चल गया था कि 23 मई को ही राजा की हत्या की गई। हत्या से कुछ देर पहले ही सोनम की अपनी सास उमा से बात हुई थी। इस बातचीत में सास ने सोनम से राजा के बारे में पूछा था तो उसने कहा था- वो आगे निकल गए और मैं पीछे छूट गई।
लेकिन, गाइड के बयान के मुताबिक सोनम की राजा और तीन युवकों से ज्यादा दूरी नहीं थी। पुलिस ने राजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की टाइमिंग और सोनम की सास से बातचीत की टाइमिंग को मैच किया। इससे ये पता चला कि 23 मई को दोपहर 1.43 बजे सोनम ने अपनी सास से बात की थी, इसके आधे घंटे के बाद ही राजा का कत्ल किया गया था।
सुराग: होम स्टे संचालक से पता चला कि सोनम ने सुबह साढ़े 5 बजे चेकआउट का प्लान बनाया था। उसने सास को उपवास के बारे में झूठ बोला था, जबकि उसने भरपेट खाना खाया था।

दूसरी टीम: सीसीटीवी फुटेज जुटाने की जिम्मेदारी राजा और सोनम 21 तारीख को शिलॉन्ग पहुंचे थे। यहां उन्होंने एक होटल में रूम लिया था। 22 मई को दोनों सोहरा के लिए निकले। सोहरा में थाने के पास ही बने एक होटल में कमरा लेने पहुंचे, लेकिन होटल में जगह नहीं थी। उन्होंने होटल में अपना सामान रखा और घूमने निकल गए।
इसी दिन दोनों मावलखियात गांव पहुंचे। फिर सोहरा पुलिस थाना क्षेत्र के नोंग्रियात गांव में लिविंग रूट ब्रिज को देखने के लिए स्कूटी किराए पर ली। पुलिस के मुताबिक, वे एक रात के लिए होम स्टे में रुके और अगले दिन मावलखियात लौटने के लिए चेक आउट किया था। दोनों के इस रूट को ट्रेल करने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए।
सुराग: पुलिस को राजा और सोनम का स्कूटी से एक होटल में पहुंचने का सीसीटीवी मिला। इस फुटेज में सोनम की कुछ गतिविधियां संदिग्ध थीं। राजा जब होटल के भीतर था, तब सोनम बाहर आई। उसने मोबाइल से किसी को मैसेज भेजे। इसके बाद वह भीतर गई और दोनों साथ में बाहर आए। सोनम फिर मोबाइल से किसी को मैसेज भेजने में जुटी थी और राजा स्कूटी स्टार्ट कर रहा था।
देखिए, दो तस्वीरें…


तीसरी टीम: मोबाइल कॉल डिटेल एनालिसिस इस टीम ने सोनम और राजा के फोन नंबरों की कॉल डिटेल्स खंगालनी शुरू की। सोनम की कॉल डिटेल से पता चला कि वह राज कुशवाह से बात करती थी। ये बात राजा से छिपकर होती थी या नहीं, पुलिस को ये नहीं पता था। 23 मई के बाद सोनम का मोबाइल बंद हो गया था, लेकिन राज कुशवाह का नंबर एक्टिव था।
उसकी चुनिंदा नंबरों पर लगातार बात हो रही थी। पुलिस ने इन नंबरों को सर्विलान्स पर लिया। ये देखा कि क्या ये नंबर मेघालय में एक्टिव थे या नहीं। बाद में मेघालय पुलिस की एक टीम इंदौर भी पहुंची थी, लेकिन ये लड़के घर पर नहीं मिले।
सुराग: टेक्निकल एनालिसिस से पता चला कि जिस दिन राजा-सोनम मेघालय आए थे, उसी के आसपास ये नंबर भी एक्टिव हुए थे। सोनम के नंबर से इनमें से किसी एक नंबर पर मैसेज भी भेजे गए थे।

चौथी टीम: लोकल गाइड और स्थानीय लोगों से इनपुट जुटाए एक टीम ने लोकल गाइड, होम स्टे संचालक और स्थानीय लोगों से इनपुट जुटाने का काम किया। इसी टीम को मावलाखियात के गाइड अल्बर्ट पैड ने बताया था कि 23 मई की सुबह 10 बजे उसने राजा और सोनम को तीन अन्य पर्यटकों के साथ नोंग्रियात से मावलाखियात के बीच देखा था। तीनों पर्यटक राजा के साथ आगे चल रहे थे, जबकि सोनम पीछे थी। वे सभी हिंदी में बात कर रहे थे। वो समझ नहीं पाया कि वे क्या बोल रहे थे।
अल्बर्ट ने ये भी बताया कि एक दिन पहले उसने कपल से पूछा था कि नोंग्रियात तक चढ़ने के लिए क्या उन्हें गाइड की जरूरत है, तो उन्होंने मना कर दिया था और दूसरे साथी गार्ड की सेवा ली थी।
सुराग: सीसीटीवी का एनालिसिस करने वाली टीम को एक और फुटेज मिला था, जिसमें 22 मई की शाम को ये तीनों लड़के नजर आए थे। इन्हें अल्बर्ट को दिखाया तो उसने इनमें से एक की शिनाख्त की थी।

पांचवीं टीम: सोशल मीडिया पोस्ट का एनालिसिस एक टीम को सोनम और राजा के सोशल मीडिया अकाउंट्स का एनालिसिस करने के लिए कहा गया था। दरअसल, हनीमून पर आने वाले कपल अक्सर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर तस्वीरें अपलोड करते हैं। पुलिस इसके जरिए उनकी आखिरी लोकेशन ट्रेस करना चाहती थी। क्योंकि राजा की लाश जिस खाई में मिली, वहां तक पहुंचना मुमकिन नहीं था।
पुलिस की थ्योरी थी कि राजा की हत्या कर आरोपियों ने लाश को खाई में फेंका और सोनम को अपने साथ ले गए थे। जब पुलिस ने राजा और सोनम के सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगाले तो उनकी एक भी तस्वीर नहीं थी। जबकि वे ऐसी कई जगहों पर घूमने गए थे, जहां अक्सर कपल सेल्फी लेते हैं। पुलिस ने जब इसका साइकोलॉजिकल असेसमेंट किया तो पता चला कि सोनम और राजा के बीच सबकुछ अच्छा नहीं था।
सुराग: राजा और सोनम का मोबाइल 23 मई की दोपहर एक साथ बंद हुआ। इससे पहले राजा के इंस्टाग्राम अकाउंट से दोपहर 2 बजे एक पोस्ट हुआ, जिसमें लिखा- सात जन्मों का साथ…। पुलिस को शक इसलिए हुआ, क्योंकि इससे पहले सोनम ने राजा के साथ तस्वीर वाली एक भी पोस्ट शेयर नहीं की थी।

