मां भारतीय, पति दुबई में और बच्चे पाकिस्तानी

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मैं भारत की रहने वाली हूं, मगर मेरे दोनों बच्चे पाकिस्तानी हैं। मेरा पाकिस्तान का वीजा एक्सपायर हो चुका है। फरवरी में नया वीजा लेने बच्चों के साथ भारत आई थी। अब एंबेसी बंद है। बच्चे बीमार हैं, उन्हें अकेले पाकिस्तान कैसे भेज दूं?

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ये कहना है भोपाल की रहने वाली समरीन का। दरअसल, समरीन के दोनों बच्चे मध्यप्रदेश के उन 9 बच्चों में शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान भेजने को लेकर असमंजस है। ये बच्चे पाकिस्तान के नागरिक हैं क्योंकि इनके पिता पाकिस्तानी हैं और मां भारतीय। अब इन बच्चों को वापस पाकिस्तान भेजने को लेकर मप्र सरकार ने भारत सरकार से सलाह मांगी है।

इधर, समरीन इस बात से चिंतित है कि बच्चे पाकिस्तान में अकेले कैसे रह पाएंगे? बच्चों के पिता दुबई में हैं और पाकिस्तान में केवल बूढ़ी सास है। भारतीय नागरिक होने से उसे भी पाकिस्तान का वीजा नहीं मिलेगा। इसी असमंजस के बीच समरीन को भारत सरकार के जवाब का इंतजार है।

समरीन की ही तरह पाकिस्तान से कुछ ही दिन पहले आया सुनील भी असमंजस में है। उसका पूरा परिवार छह महीने पहले ही पाकिस्तान से भारत आया था। उन्हें लॉन्ग टर्म वीजा मिल गया, मगर सुनील को नहीं मिल सका। अब उसे वापस जाना होगा। मगर, परिवार का कहना है कि वहां कुछ बचा ही नहीं है तो अकेला क्या करेगा?

2017 में शादी, पाकिस्तान में विजिटर वीजा पर रहती है समरीन दैनिक भास्कर ने जब समरीन से संपर्क किया तो उन्होंने पहले बात करने से इनकार कर दिया था। बाद में वह बात करने के लिए जैसे-तैसे राजी हुईं। समरीन ने बताया कि 2017 में उनकी शादी पाकिस्तान के रहने वाले सद्दाम से हुई थी। पिछले आठ साल से वह विजिटर वीजा पर पाकिस्तान में ही रह रही है। उनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा साजिल 6 साल का और छोटी बेटी जुनैरा डेढ़ साल की है।

दोनों बच्चे पिता की तरह पाकिस्तान के नागरिक हैं। समरीन से पूछा कि वह भारत कब और कैसे आई? तो वह बोली- इसी साल 28 फरवरी को विजिटर वीजा एक्सटेंड कराने दोनों बच्चों के साथ भारत आई थी। दिसंबर में पासपोर्ट की अवधि भी खत्म हो रही है। ऐसे में वो भी रिन्यू कराना था।

समरीन से पूछा कि इतने सालों से पाकिस्तान में विजिटर वीजा पर क्यों रह रही है? वहां की नागरिकता क्यों नहीं ली? तो मुस्कुराते हुए बोली कि वहां नागरिकता जल्दी नहीं मिलती।

खबरों से पता चला- वीजा रद्द कर दिए गए समरीन बताती है- मैं किसी काम से प्रयागराज गई थी। वहां भोपाल के डीसीपी दफ्तर ने संपर्क किया और भोपाल वापस आने के लिए कहा। मैं वापस पहुंची तो पुलिस ने घर आकर हमारे डॉक्यूमेंट्स की जांच की। एक आवेदन लिखा, जिसमें पासपोर्ट और बच्चों के वीजा एक्सटेंशन की बात लिखी।

पुलिस ने मेरे साइन लिए और कहा- जब जाना होगा तो आपको इन्फॉर्म कर दिया जाएगा। तब तक इंतजार करें।

समरीन कहती हैं- अभी पाकिस्तान जाना मुश्किल है। मेरी और दोनों बच्चों की तबीयत खराब है। दिल्ली में पाकिस्तानी एंबेसी बंद है। ऐसे में वीजा कैसे मिलेगा? बच्चों को अकेले पाकिस्तान कैसे और किसके पास भेजूंगी?

सद्दाम ने कहा- अपनों को खोने का दर्द बड़ा होता है भास्कर ने समरीन से पहलगाम अटैक को लेकर पूछा तो वह बोलीं- जो लोग मारे गए हैं, उनके परिवार के लोग ही इस दर्द को जानते हैं। सीमा पार से आए दहशतगर्दों को पकड़ना चाहिए।

इस मसले को लेकर भास्कर ने समरीन के पति और दोनों बच्चों के पिता सद्दाम से भी मोबाइल पर बात की। सद्दाम ने कहा- 2019 के बाद भारत- पाकिस्तान के बीच सब अच्छा चल रहा था। पहलगाम में जो हुआ, वो बहुत दर्दनाक है। जिन्होंने अपनों को खोया है, उनका दर्द बहुत बड़ा है। हम तो वीजा सस्पेंशन के फैसले से ही परेशान हो गए।

सद्दाम कहते हैं कि दोनों मुल्क के बीच ऐसा कुछ होगा, ये सपने में भी सोचा नहीं था। कई दिनों बाद मेरी पत्नी और बच्चे नानी के घर गए थे। बच्चों का वीजा भी बड़ी मुश्किल से मिला था। पिछले सात-आठ दिन मुश्किल भरे रहे हैं।

मैं पाकिस्तान में नहीं हूं। बॉर्डर पर जो हालात हैं, उन्हें देखकर काम में मन नहीं लग रहा है। मेरे बच्चे छोटे हैं, वो अपनी मां के बगैर नहीं रह सकते हैं। दोनों देशों की सरकारें आपस में बैठकर लोगों के वीजा मामलों को देखें। जो रुकने के काबिल हैं, उन्हें रुकने की इजाजत देनी चाहिए।

समरीन अपनी बहन और बेटी के साथ। उसने कहा- सीमा पार से आए दहशतगर्दों को पकड़ना चाहिए।
समरीन अपनी बहन और बेटी के साथ। उसने कहा- सीमा पार से आए दहशतगर्दों को पकड़ना चाहिए।

अब बात पाकिस्तानी हिंदू परिवार की…

मां बोली- बेटा पाकिस्तान में किसके पास जाएगा ये सवाल है 60 साल की पूरी बाई का। दरअसल, वह 6 महीने पहले अपने पूरे परिवार के साथ पाकिस्तान छोड़कर भारत आई है। परिवार में छह सदस्य हैं, मगर सबसे छोटे बेटे सुनील को छोड़कर बाकी सभी को विजिटर वीजा मिला। पूरी बाई उनके पति, बड़ा बेटा- बहू और पोता सभी भारत आ गए। सुनील पाकिस्तान में ही रहा।

सुनील के परिवार के बाकी सदस्यों ने यहां आकर लॉन्ग टर्म वीजा के लिए अप्लाई कर दिया। उन्हें ये वीजा मिल गया। सुनील कुछ ही दिन पहले लौटा है, लिहाजा वह शॉर्ट टर्म वीजा पर भारत आया। पहलगाम अटैक के बाद अब उसका ये वीजा रद्द हो गया है। बेटे को अकेले पाकिस्तान जाना होगा, ये सोचकर मां परेशान है।

भाई ने कहा- पाकिस्तान में डर लगता था सुनील की नानी और दादी भी पाकिस्तान की ही रहने वाली थीं। 12वीं तक की पढ़ाई भी पाकिस्तान में ही हुई है। सुनील के भाई हरीश कहते हैं कि पाकिस्तान में मैं और पिताजी कपड़े की दुकान पर काम करते थे। कुछ दिनों बाद सुनील भी हमारे साथ दुकान पर काम करने लगा।

भारत आने की क्या वजह रही? ये पूछने पर हरीश ने बताया- वहां हिंदू परिवारों को टारगेट किया जाता है। मेरा 5 साल का बेटा है, पत्नी की तबीयत खराब रहती है। वह लकवे की शिकार है। उसका वहां इलाज भी ठीक से नहीं हो रहा था। जब भारत सरकार ने नागरिकता कानून में संशोधन किया तो पाकिस्तान में रह रहे हमारे जैसे कई हिंदू परिवारों को भारत आने की आस बंधी। छह महीने पहले हम सबकुछ बेचकर भारत आ गए।

सुनील के भाई हरीश ने बताया कि 3 साल की कोशिश के बाद उन्हें वीजा मिला है।
सुनील के भाई हरीश ने बताया कि 3 साल की कोशिश के बाद उन्हें वीजा मिला है।

मौसा-मौसी भारत में ही रहते हैं दरअसल, सुनील के मौसा मेयो कुमार सितलानी भी पाकिस्तान में रहते थे। 1992 के बाद वो अपने पूरे परिवार के साथ भारत आ गए। उनके पास भारत की नागरिकता है। सुनील का परिवार इस समय मौसा के ही साथ रह रहा है।

सितलानी भी कहते हैं कि पाकिस्तान रहने लायक जगह नहीं है। वहां तो दो टके का आदमी भी ताना मारता है कि तुम तो हिंदू हो, यहां कैसे रह सकते हो?

सितलानी कहते हैं कि ये परिवार हमारी गारंटी पर भारत आया है। एक सदस्य को छोड़कर पूरे परिवार के पास लॉन्ग टर्म वीजा है। अब वो वहां अकेला क्या करेगा?

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