किसिम किसिम के कुकुर!
कुत्ते को आदमी का सबसे वफादार साथी माना जाता है। धर्मराज युधिष्ठिर से लेकर वर्तमान धर्मराज तक के पालतू कुत्ते कभी भी और कहीं भी सहज चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं।कुत्तों की जात की भी बातें होती हैं और उनके ठाठ की भी।
हम ठहरे ठेठ गांव वाले!हमारे उखरा में कुत्तों से जुड़े कई आख्यान मौजूद रहे हैं। हालांकि मैंने कुत्तों को ,चाहे वे गांव के हों या जंगल के,झुंड में देखा है।लेकिन पुरखों के मुंह से यह कहावत भी खूब सुनी है – बामन कुत्ता नाऊ…जात देख गुर्राऊ! साथ ही कुत्तों को एक हड्डी के टुकड़े के लिए एक दूसरे को नोचते हुए भी देखा है।उनकी नजीरें भी खूब सुनी हैं!मसलन वे तो आपस में कुत्तों की तरह लड़ते हैं।
आदमी और कुत्ते की तुलना भी अपने देश में खूब होती है!किसी भी व्यक्ति की किसी व्यक्ति के प्रति निष्ठा का मूल्यांकन करते समय अक्सर लोग कुत्ते को ही याद करते हैं। खासतौर पर नेताओं से जुड़े लोगों पर यह तुलना हमेशा चस्पा ही रहती है।किसी भी बड़े नेता के करीबी नेता को उसके साथी ही कुत्ते की पदवी से नवाजते हैं। अरे वो..उसका क्या…वो तो साहब का कुत्ता है कुत्ता!हम कितनी सांसे लेते हैं यह तक साहब को बताता है साला!ऐसे ही बड़े साहब के मुंहलगे लोगों को भी कुत्तों जैसा सम्मान दिया जाता है।
कुत्तों से जुड़ी गालियों के तो हर इलाके के हिसाब से अलग अलग शब्दकोश हैं।हर भाषा में अलग अलग।ऐसे ही दुनिया के अन्य देशों में भी होंगे।दिल्ली और भोपाल में हमने कुत्तों से जुड़े दो विशेषण और भी सुने।
दिल्ली में लोग तारीफ करते हुए सामने वाले से बड़े प्यार से कह देते हैं – यार हो तो तुम बड़ी ही कुत्ती चीज! मजाल है जो कोई बुरा मान जाए।या खुद को कुत्ता मान ले।
भोपाल में लोग गुस्से में कहते हैं – कर दिया न कुत्तापना…दिखा दी औकात !पुराने भोपाल के एक बर्रुकाट खां साहब के मुंह से एक और शब्द भी सुना था।शब्द था – कुत्ते के खाने वालों का पना! जब वे किसी पर गुस्सा होते तो आंखे लाल करते हुए कहते – कर दिया न तुमने कुत्ते के खाने वालों का पना!
खैर हर देश और काल में कुत्तों का अलग अलग तरीके से मान सम्मान होता रहा है।आगे भी होता रहेगा।अब आप सोच रहे होगें कि मैं आपको यह कुत्ता पुराण क्यों सुना रहा हूं।दरअसल मैंने ऐसा कुछ देखा जिससे मुझे लगा कि सब कुत्ते एक जैसे नहीं होते।यह अलग बात है कि कुत्ते भी यह कह सकते हैं कि सब आदमी एक जैसे नहीं होते!
आजकल मैं नीदरलैंड के प्रवास पर हूं।बहुत ही सुंदर और प्यारा देश है।यहां के लोग आदमी से ज्यादा कुत्ते और बिल्लियों की संगत पसंद करते हैं।यहां मैंने कुत्तों को अपने जात भाई पर भौंकते हुए नहीं देखा। लोग सुबह शाम अपने कुत्तों के साथ घूमते हैं।रस्ते में एक दूसरे से मिलते और बात भी करते हैं।या यूं कहें कि खड़े होकर गप्प मारते हैं।
ऐसे लोगों को देखना बड़ा ही सुखद होता है।एक जगह दो या उससे ज्यादा लोग खड़े हैं।उनके कुत्तों की रस्सियां उनके हाथ में हैं।वे आपस में बात कर रहे हैं और उनके कुत्ते आपस में।मजाल क्या जो कोई उनकी आवाज सुन ले।क्या मोहक दृश्य होता है…आदमी और कुत्तों की गपशप साथ साथ।मजाल क्या जो कोई कुत्ता एक दूसरे पर गुर्राए।
यह भी पता लगा कि यहां कुत्तों को विशेषाधिकार प्राप्त हैं।वे आदमियों के साथ बस और ट्रेन में आराम से यात्रा कर सकते हैं।कोई उन्हें रोक नहीं सकता।बड़ी बड़ी कारों और मोटर बोट उनकी सेवा में तो रहती ही हैं।
लेकिन उनके कुत्तापने के लिए यहां कोई जगह नहीं है।बराबरी के बाद भी आदमी आखिर आदमी ही है।अगर किसी के कुत्ते ने किसी को काट लिया तो उसे कोई रियायत नहीं मिलती।काटने वाले कुत्ते को सीधे स्वर्ग भेज दिया जाता है।ताकि वह अपनी योनि सुधार सके।हमारे यहां की तरह नहीं।मालिक कुत्ते के लिए खुद मरने आ जाएगा लेकिन कुत्ते पर पत्थर भी नहीं फेंकने देगा।
गलियों में आवारा कुत्तों द्वारा सरे राह लोगों को नोच नोच कर मार डालें या फिर मालिक अपने पालतू कुत्तों को किसी पर भी दौड़ा दे,सामान्य बात है।किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
अब तो लोग ऐसे ऐसे कुत्ते पाल रहे हैं जो मालिक के इशारे पर टारगेट हिट करते हैं।कुछ कुत्ते तो इस तरह से प्रशिक्षित किए जाते हैं कि उनके काम से आप यह अंदाज ही नहीं लगा सकते कि यह कुत्ते का काम है या आदमी का।
यहां का कुत्ता आदमी के साथ रहता है।लेकिन अगर उसने किसी को काटा तो खत्म कर दिया जाता है।
लेकिन अपने देश में.. वहां तो टारगेट हिट करने वाले कुत्ते सार्वजनिक रूप से सम्मानित किए जाते हैं।उन्हें बड़े बड़े आसनों पर बैठाया जाता है।
जितना ज्यादा कटखना कुत्ता उतना ज्यादा मालिक का प्यारा!उतना ही ज्यादा सम्मानित!जिस हैसियत का शिकार उसी हैसियत के अनुसार हड्डी।अगर कुत्ते ने बड़े आदमी को काट लिया और उसका देश व्यापी विरोध हुआ तो उस कुत्ते का प्रमोशन पक्का। उसकी सुविधाएं और दर्ज़ा सब बढ़ेगा।
जरूरी नहीं है कि इस प्रजाति के कुत्ते आपको कुत्ते जैसे ही दिखाई दें।आपको गौर से देखना पड़ेगा तब ही समझ पाओगे।
क्योंकि कुत्ते जो सम्मान पा रहे हैं उसे देखते हुए बहुत से लोगों में “कुत्तापने” का भाव इतनी तीव्रता से जागृत होता है वे कुत्ते को पछाड़ने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं।
मजे की बात यह है कि कुत्तापने के भाव से ग्रसित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।उनमें भी गलाकाट प्रतिस्पर्धा चल रही है।इस प्रतिस्पर्धा में एक दूसरे को पछाड़ने के लिए कुछ भी कर गुजर रहे हैं। समाज बंटे या देश वे अपने मालिक के लिए कुछ भी कर रहे हैं।
और मालिक…उसके लिए अपने कुत्ते सर्वोपरि हैं। शाही कुत्ते!देसी कुत्ते!विदेशी कुत्ते!हरियाणवी कुत्ते।झारखंडी कुत्ते!पहाड़ी कुत्ते!भेड़ों को घेर कर रखने वाले कुत्ते! कुत्ते को खाने वाले कुत्ते! धार्मिक कुत्ते!अधार्मिक कुत्ते!तरह तरह के कुत्ते।उसे सब अति प्रिय हैं।सबका ख्याल रखता है।पूरी शिद्दत के साथ।
अब आप कुत्तों की नस्लें मत खोजने लगना।देखना है तो कभी गौर से मालिक को देखना।उसका कुत्तापना कब उसके चेहरे पर आता है।
फिलहाल तो आप पहलगाम देखो।कश्मीर देखो।पाकिस्तान देखो।सिंधु का रुकता पानी देखो। देशप्रेम की सुनामी देखो। और मालिक की दहाड़ देखो। बस….चेहरे का कुत्तापन मत देखना!
अरुण दीक्षित
25.04.2025
अलमीर
नीदरलैंड
