दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के तीन दिवसीय आयोजन के समापन अवसर पर आज अंतिम दिन नौ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।

दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के तीन दिवसीय आयोजन के समापन अवसर पर आज अंतिम दिन नौ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के निदेशक श्री विकास दवे जी ने की। मुख्य अतिथि थे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे विशिष्ट अतिथि के रुप में वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष श्री मुकेश वर्मा रहे। इस आयोजन में डॉ वीणा सिन्हा को विठ्ठल भाई पटेल सम्मान, दिनेश प्रभात जी को बालकवि बैरागी सम्मान, डॉक्टर उषा खरे को राजेश्वरी त्यागी सम्मान ,उल्हास तेलंग जी को आर एस तिवारी सम्मान ,डॉक्टर महेश परिमल को राजेंद्र जोशी सम्मान, डॉक्टर साकेत सहाय को अखिलेश जैन सम्मान ,श्री मोहन नागर को एनलाल जैन सम्मान ,गौरी शंकर शर्मा गौरी जी को बाबूराव गुजरे सम्मान और विनोद जैन साहब को बृजभूषण शर्मा सम्मान प्रदान किया गया ।इस अवसर पर कमलेश्वर सम्मान से सम्मानित सुरेश पटवा जी और कन्हैयालाल नंदन सम्मान से सम्मानित ओम प्रकाश क्षत्रिय की अनुपस्थिति के कारण उन्हें यह सम्मान नहीं दिया जा सका।
इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि दुष्यंत एक ऐसे रचनाकार थे जिन्हें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों कोड करता था। दुष्यन्त ने आम आदमी की तकलीफ को बयां किया अतः उनकी स्मृति में एक भव्य स्मारक भोपाल में बनना चाहिए ,क्योंकि जिस तरह हनुमान ने राम को जन-जन तक पहुंचाया वैसे ही राजुरकर ने दुष्यंत को जन -जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम संग्रहालय के माध्यम से किया है ।इस अवसर पर अतिथियों ने कहां कि समाज में काम करते हुए जो साहित्य सृजन भी करते हैं वे प्रणम्य है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोज मीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने का जो अभियान चल रहा है उसमें दुष्यंत के शेर कोड किया जा रहे हैं । उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य को हृदय में जीवित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना बहुत जरूरी है ।कार्यक्रम का संचालन बद्र वास्ती जी ने किया एवं आभार संग्रहालय के अध्यक्ष श्री रामराव वामनकर जी ने व्यक्त किया ।स्वागत वक्तव्य संग्रहालय की निदेशक करुणा राजुरकर ने दिया।
