12 घंटे वेटर, 12 घंटे पुलिस से बचने तंग-अंधेरी गली:
‘विदेश में नौकरी होगी, अच्छा पैसा होगा, ये सिर्फ एक सपना होता है। असल में वहां पहुंचकर जिंदगी जानवरों से भी बदतर हो जाती है।’ हाल ही में मलेशिया से भारत लौटे जबलपुर के मोहम्मद इमरान ने वहां रह रहे इमामुद्दीन से VIDEO कॉल पर बात की, तो उसने अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया।
इमामुद्दीन ने बताया कि पाकिस्तानी एजेंट ने उसका पासपोर्ट छीन लिया है। गुजारा करने के लिए 12 घंटे वेटर का काम तो पुलिस से बचने के लिए 12 घंटे तंग और अंधेरी गली में छिपकर जीवन गुजारना पड़ रहा है। इसके अलावा इमरान की अमृतसर के मनोज से भी बातचीत हुई।
मनोज ने बताया कि मलेशिया में अच्छी नौकरी का झांसा देकर भेजे गए बेरोजगारों की जिंदगी नर्क बन गई है। वहां न तो नौकरी मिली और न ही रहने की जगह।

दलालों का नेटवर्क जबलपुर से चेन्नई, बैंकॉक और मलेशिया तक फैला
जबलपुर शहर के रद्दी चौकी इलाके में रहने वाले 21 साल के मोहम्मद इमरान अंसारी और गोहलपुर के सरफराज अहमद मलेशिया से लौट आए हैं। उनका कहना है कि कई लड़के वहां पर फंसे हुए हैं। दलालों ने उन्हें अच्छी जॉब का कहकर भेजा, लेकिन छोटा-मोटा काम करना पड़ रहा है। जिंदगी जानवरों जैसी है। दलालों का नेटवर्क जबलपुर से चेन्नई, थाईलैंड के बैंकॉक और मलेशिया तक फैला हुआ है।
इमरान ने लिखित शिकायत में पुलिस से कहा कि उसे बताया गया था कि 8 घंटे का काम होगा। महीने के 45000 रुपए मिलेंगे। मलेशिया के रास्ते बैंकॉक पहुंचने के बाद उसे न ही नौकरी मिली और न ही ठहरने का ठिकाना।
इरफान के मुताबिक, गोहलपुर थाना अंतर्गत तलैया निवासी इश्तियाक और सलीम ने उससे पैसे लेकर नौकरी के लिए मलेशिया भिजवाया था। मामले को पुलिस ने जांच में लिया है। इसके बाद से ही सभी दलाल अंडरग्राउंड हो गए हैं।

12 घंटे की ड्यूटी के बाद छिपकर रहना पड़ रहा
इमरान ने बताया कि मार्च में जब सलीम, इश्तियाक ने जाॅब के लिए थाईलैंड के रास्ते कुआलालंपुर भिजवाया था, तब बिहार निवासी इमामुद्दीन, तनवीर और असलम से मुलाकात हुई थी। कुछ दिन तक साथ में रहने के बाद मुझे जोरवारु भेज दिया गया।
इमरान का कहना है कि असलम वापस भारत आ रहा है जबकि तनवीर और इमामुद्दीन अब भी मलेशिया में ही रुके हुए हैं। इमामुद्दीन अभी एक चाइनीज होटल में वेटर का काम कर रहा है। वह शाम को 6 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक काम करता है और फिर दिन भर अपने कमरे में छिपा रहता है, क्योंकि उसका वीजा खत्म हो चुका है। बिहार निवासी तनवीर भी मलेशिया में है लेकिन पता नहीं है कि वह कहां पर है।

वीजा-पासपोर्ट छीनकर एजेंट अपने पास रख लेता है
अमृतसर निवासी मनोज सिंह ने बताया कि इश्तियाक का एजेंट मनोहर है। वह पंजाब में रहता है। जनवरी में उससे सोशल मीडिया के जरिए मुलाकात हुई थी। इसके बाद मनोहर ने ही इश्तियाक से बात करवाई और फिर फरवरी 2024 में 2 लाख 30 हजार रुपए लेकर थाईलैंड के रास्ते मलेशिया भिजवाया था। वहां पर सप्ताह भर रहने के बाद भी नौकरी नहीं मिली।
थाईलैंड में रह रहे नदीम से जब जाॅब के लिए मनोज ने संपर्क किया, तो उसे कुछ दिन रुकने के लिए कहा गया। बाद में नदीम ने अपना फोन बंद कर लिया। मनोज का कहना है कि पासपोर्ट के बिना लौटना मुमकिन नहीं था, इसलिए छिपकर काम किया।
मनोज सिंह ने वीडियो कॉल पर इमरान को बताया कि मलेशिया में हालात खराब होते जा रहे हैं। नौकरी के नाम पर भारतीय लड़कों के यहां पहुंचते ही वीजा-पासपोर्ट छीनकर पाकिस्तानी एजेंट नदीम अपने पास रख लेता है। एक महीने पहले रात के अंधेरे में भागे मनोज सिंह का कहना है कि वे जोरवारु में रुके थे।

मध्यप्रदेश के कई लोग फंसे, छिपकर रहना पड़ रहा
अच्छी नौकरी का ख्वाब लेकर जबलपुर का इमरान अंसारी मलेशिया गया। वहां पर नौकरी तो नहीं मिली, उल्टा उसके हजारों रुपए डूब गए। करीब चार महीने तक मलेशिया में रहकर जबलपुर आए इमरान अंसारी ने बताया कि विदेश में जिंदगी जानवरों से भी बदतर हो जाती है।
इमरान का कहना है कि मलेशिया में अभी भी मध्यप्रदेश के कई लोग हैं, जो नौकरी करने के लिए गए थे। वे छिपकर रह रहे हैं। खाने के लिए छिपकर मस्जिद जाते हैं। जो कुछ भी बचा-खुचा मिलता है, उसी से पेट भरना पड़ता है।

मलेशिया से दुबई शिफ्ट किए जा रहे युवक
मलेशिया से जबलपुर लौटने के बाद इमरान ने जब सलीम और इश्तियाक के खिलाफ पुलिस से शिकायत की, तो मामले ने तूल पकड़ लिया। सलीम और इश्तियाक अंडरग्राउंड हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि इश्तियाक अब नौकरी के लिए मलेशिया भेजे गए लड़कों को दुबई शिफ्ट कर रहा है।
जबलपुर निवासी जैत नाम का युवक भारत वापस आ रहा है। उसे जल्द ही सलीम और इश्तियाक दुबई भिजवा रहे हैं।

