
पूज्य “प्रभुश्री” जी ने कहा – राष्ट्र सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है, इसलिए हमें युवाओं में देशभक्ति का भाव पैदा करना चाहिए। समाज और राष्ट्र का उत्थान युवा पीढ़ी के उत्थान पर ही निर्भर है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि हम डराएँगे नहीं, पर डरेंगे भी नहीं। वास्तव में यह अवधारणा इसलिए यथार्थ है क्योंकि हम कालजयी हैं, मृत्युंजय हैं। हम उस सावित्री की संतान हैं, जो यमराज से अपने पति के प्राण ले आई थी। हम नचिकेता के देश के हैं। धर्मरक्षा के लिए समस्त भारत के सन्तों को एकजुट होकर रहना होगा, क्योंकि संत-महापुरुषों के जप-तप से ही भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार विदेशों में हो रहा है। भारत इसलिए महान कहा जाता है, क्योंकि इसमें सांस्कृतिक एकता, रक्षात्मक निरन्तरता, संविधान, कला, साहित्य, सामान्य आर्थिक समस्याएँ, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय उत्सव और राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दिया जाता रहा है। विभिन्न धर्म और जाति होने के पश्चात भी एक दृढ़ और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करने के लिए हम सब एक हो जाते हैं। भारत में 1652 भाषाएँ बोली जाती है और विश्व के सभी मुख्य धर्म के लोग यहाँ एक साथ रहते हैं। किसी भी राष्ट्र की एकता वह शक्ति है, जिसके बल पर कोई देश, समाज, सम्प्रदाय उन्नति के रास्ते पर दिन-प्रतिदिन अग्रसित होता रहता है। पूज्य “प्रभुश्री” जी ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि राष्ट्रीय एकता सशक्त और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला होती है। राष्ट्रीय एकता के छिन्न-भिन्न होने पर किसी भी देश की स्वतन्त्रता को हमेशा भय बना रहता है। राष्ट्र के विभिन्न घटकों में परस्पर एकता, प्रेम एवं भाईचारे का स्थिर रहना अत्यन्त जरूरी है, भले ही उनमें वैचारिक और धार्मिक असमानता क्यों न हो। भारत में कई धर्मों एवं जातियों के लोग रहते हैं, जिनके रहन-सहन एवं आस्था में अन्तर तो है ही, साथ ही उनकी भाषाएँ भी अलग-अलग हैं। इतना होने पर भी पूरे भारतवर्ष के लोग भारतीयता की जिस भावना से ओत-प्रोत हैं, उसे राष्ट्रीय एकता का विश्वभर में सर्वोत्तम उदाहरण कहा जा सकता है। गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था कि भारत की एकता तथा चेतना समय की कसौटी पर सही सिद्ध हुई है। आशा की जाती है कि हमारे देश की यह उदात्त भावना सदैव बनी रहेगी …।