“विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सुख-शांति भवन में हुआ भव्य एवं प्रेरणादायी स्वास्थ्य-साधना कार्यक्रम”

सादर प्रकाशनार्थ
“विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सुख-शांति भवन में हुआ भव्य एवं प्रेरणादायी स्वास्थ्य-साधना कार्यक्रम”
“सिर्फ दवाइयों से नहीं, सोच और साधना से बनता है स्वास्थ्य!” – विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सुख-शांति भवन में गूंजा सशक्त संदेश”
“हेल्दी रहने का राज़: मेडिटेशन, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवन!”
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सुख-शांति भवन में प्रेरक कार्यक्रम
भोपाल। ब्रह्माकुमारीज़ के सुख-शांति भवन मेडिटेशन रिट्रीट सेंटर में आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के पावन उपलक्ष्य में एक अत्यंत प्रेरणादायी, जागरूकतापूर्ण एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहनों, माताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने तन-मन को स्वस्थ बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान बीके डॉ. रचना (एम डी, पी एचडी आयुर्वेद) ने अपने गहन अनुभवों को साझा करते हुए आहार, विहार, व्यायाम एवं निद्रा जैसे स्वास्थ्य के चार प्रमुख स्तंभों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यंत सहज और प्रभावशाली शब्दों में बताया कि हमें जीवन के प्रत्येक कार्य को “जागरूकता और पूर्णता” के साथ करना चाहिए। विशेष रूप से भोजन करते समय हमारा संपूर्ण ध्यान केवल भोजन पर होना चाहिए, क्योंकि उसी समय लिया गया भोजन हमारे शरीर का निर्माण करता है और उसे ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज के समय में मोबाइल, टीवी या अन्य विकर्षणों के साथ भोजन करना हमारे स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है, इसलिए हमें “डिस्ट्रैक्टेड ईटिंग” से बचना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि दिनभर में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करना चाहिए जिससे शरीर से पसीना निकले—चाहे वह व्यायाम हो, योग हो या कोई अन्य शारीरिक गतिविधि—क्योंकि पसीने के माध्यम से शरीर की विषाक्तता (टॉक्सिन्स) बाहर निकलती है और शरीर प्राकृतिक रूप से शुद्ध एवं स्वस्थ बनता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त और संतुलित निद्रा लेना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें सुपाच्य, सात्विक एवं पोषण देने वाला भोजन ही ग्रहण करना चाहिए तथा जंक फूड जैसी हानिकारक आदतों से दूरी बनानी चाहिए।
इस अवसर पर हमीदिया अस्पताल से जुड़े डॉ. संजीव जयंत ने मानसिक स्वास्थ्य के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मन का स्वस्थ और प्रसन्न रहना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मेडिटेशन एक ऐसी शक्तिशाली विधि है, जो मन को स्थिर, सशक्त और सकारात्मक बनाती है, जिससे व्यक्ति दिनभर आने वाली विभिन्न चुनौतियों का सामना सहजता से कर पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि “जितना शरीर का स्वस्थ रहना आवश्यक है, उतना ही मन का खुश और संतुलित रहना भी अत्यंत आवश्यक है”, क्योंकि मन की स्थिति ही हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करती है।
कार्यक्रम को और अधिक जीवंत एवं ऊर्जावान बनाते हुए बीके डॉ. देवयानी, बीके खुशी एवं बीके मीनाक्षी द्वारा सभी को गीतों के माध्यम से मनोरंजक एवं स्वास्थ्यवर्धक एक्सरसाइज कराई गई। उन्होंने विस्तार से बताया कि नियमित व्यायाम करने, हंसने और प्रसन्न रहने से हमारे शरीर में ऐसे सकारात्मक हार्मोन्स का स्राव होता है, जो शरीर को स्वतः हील करने की क्षमता प्रदान करते हैं और हमें दीर्घकाल तक स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
इसके पश्चात सभी उपस्थितजनों को राजयोग मेडिटेशन का गहन एवं अनुभूतिपूर्ण अभ्यास कराया गया, जिसमें शुद्ध एवं सकारात्मक विचारों के माध्यम से अपने शरीर की प्रत्येक कोशिका तक शांति, सुख और पवित्रता की दिव्य किरणों को पहुंचाकर आत्मिक हीलिंग का अनुभव कराया गया। इस अभ्यास के दौरान उपस्थित सभी ने गहन शांति, सुकून और आंतरिक शक्ति का विशेष अनुभव किया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में वरिष्ठ राजयोगिनी बीके ज्योति दीदी ने अपने अमृतमय आशीर्वचनों से सभी को निहाल करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में अनेक वरिष्ठ साधक 100 से 104 वर्ष की आयु तक भी स्वस्थ, प्रसन्न और सक्रिय जीवन जीते रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे का मूल रहस्य बताते हुए कहा कि परमात्मा से निरंतर जुड़ाव, जीवन में पवित्रता, शांति और सकारात्मकता का अभ्यास ही वास्तविक स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बड़ी-बड़ी बीमारियों का सामना करने के पश्चात भी उन योगी आत्माओं के चेहरे पर न कभी शिकन आई, न उदासी और न ही दुख के कोई चिह्न दिखाई दिए—यह परमात्म शक्ति और राजयोग की अद्भुत देन है। उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि हम अपने जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाएं, तो हम तन, मन और धन—तीनों स्तरों पर संतुलित एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
कार्यक्रम का अत्यंत सुंदर, सजीव एवं प्रभावशाली मंच संचालन बीके डॉ. प्रियंका द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को एक सूत्र में बांधते हुए सभी को जोड़े रखा।
अंत में सभी उपस्थित गणमान्य नागरिकों एवं भाई-बहनों ने प्रसाद ग्रहण किया तथा एक नवीन ऊर्जा, सकारात्मकता और स्वास्थ्य के संकल्प के साथ अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया।
