शिवराज के मंत्रालयों का बजट एमपी के लगभग बराबर

0
Spread the love

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को जो दो मंत्रालय मिले हैं, उनका बजट एमपी सरकार के बजट के लगभग बराबर है। उन्हें कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। दोनों विभागों का कुल बजट करीब 3.07 लाख करोड़ है। जबकि एमपी सरकार का 2023-24 का बजट 3 लाख 14 हजार करोड़ के करीब था।

शिवराज के अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को टेलीकॉम मंत्री बनाया गया है। यह विभाग अब तक प्रधानमंत्री के भरोसेमंद अश्विनी वैष्णव के पास था। यानी मोदी का सिंधिया पर भरोसा बढ़ा है। वहीं, मध्यप्रदेश से 8 बार के सांसद डॉ. वीरेंद्र खटीक को एक बार फिर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।

दुर्गादास उईके को जनजातीय कल्याण मामलों का राज्यमंत्री मंत्री बनाया है। सावित्री ठाकुर को महिला बाल विकास मंत्रालय के राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एमपी के पांचों केंद्रीय मंत्रियों के विभागों का बजट केंद्र के कुल 47.65 लाख करोड़ के बजट का करीब 10 फीसदी है, जो 5 लाख करोड़ के आसपास होता है।

सिलसिलेवार समझिए क्यों मिले मंत्रालय, क्या रहेंगी चुनौतियां…

शिवराज को कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय क्यों मिले?

वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह कहते हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने एमपी के मुख्यमंत्री रहते हुए सबसे ज्यादा काम कृषि क्षेत्र में किया है। उनके कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में एमपी में कई नवाचार हुए और कई नए रिकॉर्ड बने।

  • प्रदेश की कृषि जीडीपी 2005-06 से 2022-23 तक औसतन प्रति 7% बढ़ी, जो दशक के लिए राष्ट्रीय औसत 3.8% से अधिक रही।
  • शिवराज के मुख्यमंत्री रहते एमपी को कृषि उत्पादन तथा योजना संचालन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए सात बार कृषि कर्मण अवॉर्ड मिले।
  • एमपी में 7.5 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता 6 गुना बढ़कर 43 लाख हेक्टेयर शिवराज के कार्यकाल में ही हुई।
  • किसानों की फसल के समर्थन मूल्य पर खरीदी पर बोनस की योजना शुरू हुई। इस योजना का फायदा प्रदेश के 80% से ज्यादा किसानों को मिल रहा है।
  • भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों में संशोधन कर आपदा की स्थिति में किसानों को होने वाली क्षतिपूर्ति में कई गुना की वृद्धि की।

मोदी का पहला फैसला शिवराज के मंत्रालय से जुड़ा

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यभार संभालते ही पीएम किसान निधि की 17 वीं किस्त जारी की। मोदी ने फाइल पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए काम करती रहेगी। आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में बड़े फैसले लिए जाएंगे। दूसरी तरफ शिवराज ने भी कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठक की।

इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और सरकार की प्राथमिकता किसान कल्याण है।

अब जानिए क्या रहेंगी चुनौतियां

फरवरी 2024 में मोदी सरकार द्वारा पेश लेखानुदान में कृषि मंत्रालय के लिए 1.27 लाख करोड़ तो ग्रामीण विकास के लिए 1.77 लाख करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया गया है। इस तरह से दोनों मंत्रालयों का बजट 3.04 लाख करोड़ रुपए के आसपास है। एक्सपर्ट के मुताबिक शिवराज के सामने चुनौती रहेगी कि जिस तरह से उन्होंने एमपी में कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं उसे वे देश में भी लागू करें। शिवराज के सामने जो चुनौतियां हैं।

  • कृषि काे लाभ का धंधा बनाना।
  • फसल-कटाई के बाद सरकार द्वारा पब्लिक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को प्रमोट करना।
  • एग्रो-क्लाइमेट जोन में नैनो-डीएपी के उपयोग का विस्तार।
  • ऑयल सीड्स यानी तिलहन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘आत्मनिर्भर ऑयल सीड्स अभियान’ के नियम बनाना।
  • डेयरी विकास के लिए व्यापक कार्यक्रम बनाना।
  • एग्रीकल्चर प्रोडक्शन बढ़ाने और इम्पोर्ट दोगुना करने तथा ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अगले 5 साल में और 2 करोड़ घर बनाए जाने का लक्ष्य पूरा करना।
कृषि मंत्रालय के सचिव मनोज आहूजा और ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेंद्र सिंह के साथ शिवराज की अनौपचारिक बैठक। वे 11 जून को सुबह दोनों मंत्रालय का कामकाज संभालेंगे।
कृषि मंत्रालय के सचिव मनोज आहूजा और ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेंद्र सिंह के साथ शिवराज की अनौपचारिक बैठक। वे 11 जून को सुबह दोनों मंत्रालय का कामकाज संभालेंगे।

मोदी के 100 दिन के एक्शन प्लान को पूरा करने की चुनौती

पीएम मोदी ने सरकार बनने से पहले ही 100 दिन का एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसमें कृषि मंत्रालय को किसानों के लिए ऑयल सीड्स और पल्सेज पर ध्यान देना शामिल है। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए भूमि सुधार को तवज्जो दी गई है। इसमें जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल किया जाएगा। सरकार इसके लिए 1,035 करोड़ रुपए अलॉट कर सकती है।

सरकार 2026 के आखिर तक सभी लैंड रिकॉर्ड्स डिजिटल करना चाहती है, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को व्यवस्थित कर सके। इससे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तेज गति से आगे बढ़ाए जा सकेंगे। नई सरकार के पहले बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है।

एक चुनौती ये भी…

शिवराज के दोनों मंत्रालयों में 2-2 राज्य मंत्री

शिवराज के दोनों मंत्रालयों में 2-2 राज्य मंत्री भी बनाए गए हैं। कृषि व किसान कल्याण में टीडीपी के पेम्मासानी चंद्रशेखर और भाजपा के कमलेश पासवान को राज्य मंत्री बनाया है। चंद्रशेखर को सिंधिया के टेलीकॉम मिनिस्ट्री में भी राज्यमंत्री बनाया है। इसी तरह जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और भाजपा के भागीरथ चौधरी को ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बनाया है।

जानकारों का कहना है कि शिवराज के लिए भाजपा के सबसे बड़े पार्टनर जेडीयू और टीडीएस को साधने की चुनौती होगी। शिवराज को दोनों राज्य मंत्रियों के साथ समन्वय बनाकर रखना होगा।

वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह कहते हैं कि दूसरे राज्य भी चाहेंगे कि शिवराज ने जिस तरह से मध्यप्रदेश में कृषि के क्षेत्र में ग्रोथ दिलाई है, वैसे ही उनके राज्य में योजनाओं को लागू किया जाए। खासकर बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य, क्योंकि दोनों ही राज्यों के दोनों बड़े दल सरकार में पार्टनर हैं।

शिवराज पर इन राज्यों को कृषि व ग्रामीण विकास के लिए अधिक से अधिक बजट देने का दबाव रहेगा। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना नरेंद्र मोदी का प्रोजेक्ट है। इसके क्रियान्वयन की भी चुनौती होगी।

अब जानिए सिंधिया को क्यों दिया टेलीकॉम मंत्रालय, क्या रहेंगी चुनौतियां

ज्योतिरादित्य सिंधिया को संचार मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उनके पास सिविल एविएशन मंत्रालय था, जो इस बार राम मोहन नायडू को दिया गया है। सिंधिया पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय भी संभालेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह इसकी वजह बताते हैं कि सिंधिया को मनमोहन सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। उस समय उनका परफॉर्मेंस बेहतर रहा था। उन्होंने इस सेक्टर में जो रिफॉर्म्स किए थे, उनके परिणाम अब दिख रहे हैं। वे कहते हैं कि TRAI (टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ) को एक्टिव करने की चुनौती सिंधिया के सामने रहेगी।

वहीं, सिंधिया को पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। ये मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। केंद्रीय बजट 2022-23 में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए पीएम मोदी की पहल पर (पीएम-डिवाइन) स्कीम को एक नई केंद्रीय स्कीम के रूप में घोषित किया गया था। 12 अक्टूबर 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस स्कीम को मंजूरी दी थी।

100 फीसदी केंद्रीय वित्त पोषण वाली इस स्कीम में साल 2022-23 से 2025-26 तक 4 साल में कुल 6,600 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस स्कीम के लिए अब तक 11 प्रोजेक्ट चुने गए हैं, जिनका क्रियान्वयन पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों की सरकारों के समन्वय से किया जाएगा।

हालांकि, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम में इस चुनाव में भाजपा को झटका लगा है, यहां उसके सांसद नहीं चुने गए। जबकि इन राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। ऐसे में जानकार कहते हैं कि सिंधिया के सामने इन राज्यों में इस स्कीम को लागू करना चुनौती रहेगा।

खटीक को फिर पुराना मंत्रालय क्यों? उईके और सावित्री को मिले मंत्रालयों में क्या?

केंद्रीय कैबिनेट मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार खटीक को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी उनके पास इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी थी, इसलिए उनके सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं होगी। पिछले तीन बार से एमपी को इस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा रही है।

पहले कार्यकाल में इस विभाग की जिम्मेदारी थावरचंद गेहलोत के पास थी। दूसरे कार्यकाल में भी उन्हें यही मंत्रालय दिया गया। इस बीच कर्नाटक का राज्यपाल बनाने से पहले उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद वीरेंद्र कुमार खटीक को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की जिम्मेदारी दी गई।

दूसरी तरफ केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके को जनजातीय मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे पहली बार मंत्री बने हैं। वहीं, सावित्री ठाकुर को महिला बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। जानकार कहते हैं कि दोनों को राज्यमंत्री बनाया गया है। इस लिहाज से उनके सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं होगी। वे इन विभागों के कैबिनेट मंत्री के दिशा निर्देश पर काम करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home2/lokvarta/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481