युद्ध उन्माद, ईंधन गैसकी बढ़ती किल्लत-होड़ ने बढ़ा दी मुसीबत ( श्याम चौरसिया)
ईंधन गैस सिलेंडर भराई का उत्पादन आम दिनों की तरह 50 लाख सिलेंडर से 75 लाख सिलेंडर प्रतिदिन पहुचा देने के बाबजूद ईरान-अमेरिका इजराल युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका से घबराएं, डरे, तनावग्रस्त भारतीयो में बेजरूरत अधिक से अधिक सिलेंडर संग्रह की प्रवर्ति पनप चुकी है। इस प्रवर्ति को मगरी तक पहुचाने में विपक्षी दल और फिजूल की अफवाह का जबरजस्त योगदान है। हर तरह से हताश, निराश और बार बार मुह की खाते आरहे विपक्ष को सूतक में दाल गलाने का मौका हाथ लग गया। कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष फिलहाल अपने इस मकसद में कामयाब लगते है। युद्ध उन्माद से त्रस्त आम उपभोक्ताओं में विपक्ष असुरक्षा,बेचैनी जगाने में सफल रहा। काश विपक्ष ये सोच या बता पाता कि पड़ोसी देश पाकिस्तान,बंगला देश, बर्मा, इंडोनेशिया,मलेशिया, अमेरिका अन्य यूरोपियों देशों के मुकाबले पेट्रोल-डीजल के दाम भारत मे नही बढ़े। रोजमर्रा की वस्तुओं के रेट गिर रहे है या स्थिर है। चाहे वह गेहू,आटा, दाल, खाद्य तेल, सब्जियां हो। इन आम जरूरतों के भाव पड़ोसी देशों के मुकाबले आसमान छू आम आदमी का न कचूमर निकाल रहे है। न व्यापार,व्यवसाय, आर्थिक तंत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। निसंदेह ये pm मोदी सरकार के सुशासन की बड़ी जीत है। मगर आम उपभोक्ता इस हिमालयीन उपलन्दी को अनदेखा करके केवल ईंधन गैस जुटाने में पिल पड़ा। वह भी कोरी अफवाह में फस। ये उपभोक्ताओं की कमजोरी का बड़ा प्रमाण माना जा सकता है।
सरकार बार बार स्थिति सामान्य होने,किसी भी प्रकार से न घबराने और अफवाह में न फंसने की अपील कर रही है। सरकार की इस अपील पर कम से कम ईंधन गैस के मामले में उपभोक्ता भरोसा करने की स्थिति में नही लगता।
नतीजन बतौर विकल्प उपभोक्ता इंडक्शन खरीदने भिड़ गया। दिल्ली के बाजारों में इंडक्शन का अकाल अनुभव हो रहा है। इंडक्शन के दामो में 10 से लेकर 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गयी। जब दिल्ली में ये हाल हो सकते है तो जयपुर,लखनऊ,कानपुर,आगरा, भोपाल,मुंबई, चेन्नई,कोलकत्ता कैसे अछूते रह सकते है। वहाँ भी मारामारी के अप्रिय,उत्तेजक दृष्य देखे जा रहे है। इडक्शन से बिजली की खपत बढ़ेगी। बिजली की बढ़ती खपत से शहरी या ईमानदार उपभोक्ताओं की हालात खराब हो सकती है। मगर ग्रामीणों की मौज रहेगी। वजह अधिकांश ग्रामीण बिजली पानी का बिल भुगतान करना अपनी शान के खिलाफ मानते है।
ईंधन गैस की आपूर्ति में बाधा आने से सरकार ने व्यवसायिक ईंधन गैस सिलेंडरों की बिक्री फिलहाल रोक होटल, रेस्तरांओं की मुसीबत बहुत बढ़ा दी। बहुत से होटल, रेस्तरां बंद होने की कगार पर आ गए। चाय की होटलों की भी यही हालत हो चले।
आपूर्ति में बाधा आने से गैस एजेंसियों के सामने 2026 में 2008 से 20014 जैसे हालात पैदा हो गए। लोग सिलेंडर मोबाइल से बुक करने की बजाय एजेंसियों के सामने डट हंगामा मचाने की खबरे आने लगी। कांग्रेस ने तो सोशल मीडिया पर इस तरह के पुराने फ़ोटो अपलोड करके माहौल को भड़काने में कसर नही रखी। काला बाजारी की खबरे भी आ रही है। सरकार ने काला बाजारी पर लगाम लगाने में प्रशासन को मुस्तेद कर दिया है। सक्रिय प्रशासन संदिग्ध स्थानों पर छापा मार सिलेंडर जप्ती कर प्रकरण कायम भी कर रहा है। सरकार ने जमाखोरी को गंभीर अपराधों में शामिल कर दिया है।इसके बाबजूद मौकापरस्त बाज नही आ रहे है।
कही कही सिलेंडर 12 सो लेकर 14 तक मे ब्लेक में मिलने की खबरों ने स्थिति को बेपटरी कर दिया।
होटल,रेस्तरॉ, चाय दुकानें ही बंद होने की कगार पर नही आ गई बल्कि तंगी का प्रभाव शादी विवाह पर भी पड़ा है। शादी विवाह के आयोजक, हलवाई भी व्यवसायिक ईंधन गैस सिलेंडर न मिलने से हलकान है। पकवान बनाने के लिए भट्टिया नही सुलग पा रही है।
हालांकि ये तंगी स्थाई नही है। सरकार के दावों के अनुसार कृतिम और जमाखोरी का परिणाम लगती है। मगर तंगी तो है। इससे इंकार नही किया जा सकता। कही न कही झोल तो है। यदि नही होता तो गैस सिलेंडर उत्पादन 50 लाख से 75 लाख यानी 50% बढ़ा देने के बाद तो बाजार में बरसात हो सकती थी। न होने के पीछे कही न कही व्यवस्था की नाकामी मानी जा सकती है।
ओमान, कतर आदि ईंधन गैस सप्लायर देशों से युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित तो हुई है।आपूर्ति सामान्य करने के लिए भारतीय विदेश मंत्री और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई वार्ताओं के सुखद परिणामों की बदौलत 40 लाख टन ईंधन गैस से लदे जहाज को भारतीय पोर्ट पर लगने से राहत अनुभव हो रही है। गैस और पेट्रोलियम पदार्थों से लदे जहाज रास्ते मे है। रसिया के फस चुके पेट्रोलियम जहाजों का सौदा रिलाइंस से अपनी शर्तों पर करके झटका दिया है। खबर है। इस सौदे से रिलायंस को काफी फायदा हो सकता है। सोदेबाजी का युग चल रहा है।
युद्ध का जैसा प्रतिकूल प्रभाव अन्य देशों पर पड़ा है। उनकी तुलना में भारत पर अभी 05% भी नही पड़ना सरकार के सुशासन की जीत है।
यदि उलभोक्ता विपक्षी दुष्चक्र और अफवाह में न फसे तो गैस की किल्लत से पार पाना कठिन नही है। हालात स्थाई नही है। बेपटरी नही है। कभी भी सामान्य हो सकते है।
