173 सीटों पर BJP-कांग्रेस की सीधी टक्कर
2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ 52 सीटें जीती। 17 प्रदेशों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। दूसरी तरफ BJP ने 303 सीटें जीतीं। 10 राज्यों की लगभग सभी सीटें BJP को मिलीं।
इसके बावजूद नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं के भाषण के केंद्र में कांग्रेस ही रहती है। 1 अप्रैल से 20 मई तक PM मोदी के X पर कुल 1159 पोस्ट किए। इनमें सबसे ज्यादा 200 बार कांग्रेस का जिक्र किया।
90 सीटें जीतकर BJP का खेल बिगाड़ सकती है कांग्रेस
2019 लोकसभा चुनाव में 190 सीटों पर BJP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। इनमें से 175 यानी 92% सीटों पर BJP ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस सिर्फ 15 सीटें ही अपने पाले में कर पाई। यानी देश की एक तिहाई सीटों पर BJP और कांग्रेस की सीधी टक्कर है। इनमें BJP सैचुरेशन में पहुंच चुकी है। अब यहां कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है।

2024 के आम चुनाव में कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर INDIA अलायंस बनाकर चुनावी मैदान में है। कांग्रेस ने अलायंस में मौजूद पार्टियों के लिए उन इलाकों में सीटें छोड़ दीं, जहां क्षेत्रीय दल मजबूत स्थिति में थे। कांग्रेस ने इस बार 328 उम्मीदवार ही मैदान में उतारे, जबकि 2019 में 421 उम्मीदवारों के साथ कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में BJP ने हिंदी पट्टी यानी नॉर्थ और वेस्ट के राज्यों में जिन सीटों पर एकतरफा जीत हासिल की थी, उन्हीं सीटों पर कांग्रेस और BJP के बीच सीधी टक्कर रही थी। ऐसे में BJP के विजयरथ को रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस के कंधों पर ही है।
‘द प्रिंट’ के एडिटर शेखर गुप्ता लिखते हैं, ‘कांग्रेस जितनी भी नई सीटें जीतेगी, भाजपा के कुल आंकड़े में उतनी कटौती होगी। कांग्रेस की 52 सीटों में अगर 10 और सीटें भी जुड़ गईं तो यह BJP के लिए 10 सीटों का नुकसान ही होगा और अगर वह 90 के आंकड़े पर पहुंच गई तो वह भाजपा को 272 के आंकड़े से नीचे ही रोक सकती है। वहीं अगर कांग्रेस को 100 सीटें मिल गईं तो राष्ट्रीय राजनीति में उथल-पुथल मच जाएगी।’
कांग्रेस के पास हिंदी पट्टी और पश्चिमी भारत में सबसे ज्यादा स्कोप
उत्तर भारत के राज्यों में 106 सीटों पर आमने-सामने की टक्कर थी, जिसमें BJP ने 100 सीटें जीतीं और कांग्रेस 6 पर सिमट गई। अगर इन सीटों पर 2024 में कांग्रेस की सीटें बढ़कर 30 भी हो गईं, तो 24 नई सीटें BJP के खाते से कटेंगी। योगेंद्र यादव समेत कई सेफोलॉजिस्ट कांग्रेस के लिए इसे असंभव नहीं मानते।

पश्चिमी भारत यानी गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और दमन दीव की 44 सीटों पर BJP और कांग्रेस की सीधी टक्कर रही। 2019 में BJP ने इनमें से 42 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस के हिस्से में केवल 2 सीटें आईं थीं। यहां कांग्रेस को कोई भी बढ़त BJP को ही झटका देगा।

2019 में जिन 190 सीटों पर कांग्रेस और BJP के बीच सीधी टक्कर थी, उनमें से 173 सीटों पर 2024 में भी कांग्रेस ने मजबूत अलायंस के साथ उम्मीदवार उतारे थे। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा समेत 18 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों की 173 सीटें शामिल हैं। यानी कांग्रेस के कुल 328 में से 173 उम्मीदवार BJP को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
BJP साफ तौर पर जानती है कि कांग्रेस का कोई भी चुनावी फायदा सीधे तौर पर BJP का नुकसान होगा। इसलिए PM मोदी समेत तमाम BJP नेता कांग्रेस पर इतने आक्रामक रहते हैं। इसके अलावा 3 अन्य वजह भी हैं…
1. सिर्फ कांग्रेस ही BJP को पैन-इंडिया टक्कर दे सकती है
कांग्रेस ने देश पर लंबे समय तक शासन किया है। कई राज्यों में पहले सरकार रही है। पार्टी का संगठन देश के लगभग हर कोने में है। 2024 के चुनाव में BJP इन बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
CSDS के प्रो. संजय कुमार बताते हैं, ‘अगर BJP का मुकाबला किसी भी नेशनल पॉलिटिकल पार्टी से है तो वो अभी कांग्रेस ही है। 2014 और 2019 का चुनाव देंखे तो समझ आता है कि BJP के बाद कांग्रेस ही बड़ी पार्टी है और रीजनल पार्टियों की तुलना में कांग्रेस का जनाधार बड़ा है। कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो राष्ट्रीय स्तर पर BJP का मुकाबला कर रही है।’
पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘आजादी के बाद से कांग्रेस के सामने या तो कम्युनिस्ट पार्टी होती थी या फिर जनसंघ। कम्युनिस्ट पार्टियों ने कांग्रेस से अलायंस कर अपनी रेलेवेंसी खो दी और अब मुकाबला केवल कांग्रेस और BJP के बीच बन गया है। वर्तमान में BJP के बाद अगर देश भर में सांसदों, विधायकों और संगठन के लिहाज से कोई पार्टी मजबूत है तो वो कांग्रेस ही है।’
2. 125 सीटें लाकर कांग्रेस का सरकार बनाने का दावा
कांग्रेस नेता और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘अगर BJP सरकार बनाना चाहती है तो उसे 250 से ज्यादा सीटें जीतनी होंगी, जबकि कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए 125 से ज्यादा सीटें पर्याप्त होंगी।’
रेवंत के इस बयान के पीछे तर्क है कि कांग्रेस 328 सीटों पर खुद और बाकी सीटों पर अलायंस के साथ चुनाव लड़ी है। ऐसे में कांग्रेस 125 से ज्यादा सीटें जीतेगी तो अपने अलायंस पार्टनर के साथ सरकार बनने के लिए सक्षम हो जाएगी।

इस हाइपोथेसिस के उदाहरण के तौर पर 2004 का चुनाव देखा जा सकता है। 2004 में कांग्रेस के पास 145 और BJP के पास 138 सीटें थीं। कांग्रेस ने BJP से महज 7 सीटें ही ज्यादा जीतीं और गठबंधन के साथ सरकार बना ली थी।
रेवंत का इशारा है कि आज यानी 4 जून को अगर आम चुनाव 2019 के रिजल्ट में कांग्रेस अपनी सीटों पर इजाफा करती है और करीब 125 सीटों का आंकड़ा छू लेती है तो BJP के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा।
CSDS के प्रो. संजय कुमार कहते हैं, ‘पार्टियों के हिसाब से देखें तो ज्यादातर पार्टियों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और BJP के साथ कम। रीजनल पार्टियां BJP की अपेक्षा कांग्रेस के साथ गठबंधन करने में खुद को सहज पाती हैं।’
3. BJP की एंटी-मुस्लिम छवि और कांग्रेस की ‘मोहब्बत की दुकान’
21 अप्रैल 2024 को राजस्थान के बांसवाड़ा की रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘पहले जब उनकी (कांग्रेस) सरकार थी, उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब, ये संपत्ति इकट्ठी करके किसको बांटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे हैं, उनको बांटेंगे, घुसपैठियों को बांटेंगे। क्या आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा? आपको मंजूर है ये?’

फरवरी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह से एक इंटरव्यू में सवाल किया गया कि BJP मुस्लिमों को टिकट क्यों नहीं देती? इस पर शाह ने कहा, ‘भारत सरकार और एक जिम्मेदार पार्टी होने के नाते BJP का भारत के मुसलमानों के साथ वही रिश्ता है जो एक आम नागरिक के साथ होता है। मगर चुनाव में कौन वोट देता है? यह भी तो देखना पड़ता है।’
कुछ दिन पहले असम के CM और BJP नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘मैं हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करता हूं। जब तक देश में हिंदू-मुस्लिम के कुछ मसले नहीं सुलझेंगे, तब तक देश की राजनीति में हिंदू-मुस्लिम होता रहेगा।’
BJP नेताओं के ये बयान साफ इशारा करते हैं कि BJP अपने कोर वोटर यानी सवर्ण और OBC पर ज्यादा फोकस करती है। इस चुनाव में BJP की पहली पंक्ति के नेता मुस्लिमों से कतराते रहे और मुस्लिम तुष्टिकरण पर कांग्रेस को घेरते रहे।
दूसरी तरफ कांग्रेस इन्क्लूजन की बात करती है। राहुल गांधी ने इसी मुद्दे पर ‘मोहब्बत की दुकान’ नाम से पूरा कैंपेन भी चलाया था।
हर्षवर्धन त्रिपाठी बताते हैं, ‘कम्युनिस्ट पार्टियों और कांग्रेस के एक साथ आने के बाद से अब देश में राष्ट्रीय स्तर पर दो ही धाराएं हैं। एक ओर सेंटर और लेफ्ट जो कांग्रेस और उसका अलायंस फॉलो करता है। जबकि दूसरी धारा है राइट या नेशनलिस्ट जो BJP फॉलो करती है। नेशनल लेवल पर इन्हीं दोनों के बीच मुकाबला होगा।’
