दूल्हा-दुल्हन से बोले मंत्री- अपने ही पार्टनर के साथ जाना

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नवविवाहित जोड़ों को मंत्री की अनोखी सलाह नरसिंहपुर जिले के करेली में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में पहुंचे मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने नवविवाहित जोड़ों को एक अलग ही अंदाज में सलाह दे डाली। मंच से उन्होंने कहा कि यहां करीब 200 शादियां हुई हैं, ऐसे में पहचान का संकट हो सकता है। विदाई के समय अपने-अपने जोड़े के साथ ही जाएं। कहीं ऐसा न हो कि भूलवश अगल-बगल वाले के साथ ही निकल पड़ें।

मंत्री ने यह बात भले ही मजाकिया लहजे में कही, लेकिन अब उनके इस बयान पर लोग खूब चटकारे ले रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि मंत्री जी ने पहले ही चेतावनी दे दी है, अब कोई गड़बड़ी न हो। अपने-अपने पार्टनर के साथ ही जाएं। बाद में ये मत कहना कि बताया नहीं।

उधर, जैसे ही बात आगे बढ़ी, सियासत भी गर्मा गई। विपक्ष ने मंत्री के बयान को हाथों-हाथ लेते हुए इसे मंच की गरिमा के खिलाफ और आपत्तिजनक बताया। साथ ही इसे नवविवाहित जोड़ों का अपमान भी करार दिया।

नरसिंहपुर में मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने नवविवाहित जोड़ों को अजीब सलाह दे डाली।
नरसिंहपुर में मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने नवविवाहित जोड़ों को अजीब सलाह दे डाली।

महापौर और महिला टीआई के बीच नोकझोंक मुरैना में महापौर शारदा सोलंकी और एक महिला टीआई के बीच हुई बहस का मामला चर्चा में है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महापौर नाराजगी जताते हुए पुलिसकर्मियों से बहस करती दिखाई दे रही हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुरैना में कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के घर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने पहुंचे थे। इसी दौरान महापौर शारदा सोलंकी भी वहां पहुंचीं। हालांकि, मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इस बात पर उनकी सबलगढ़ थाना प्रभारी (टीआई) राजकुमारी परमार से कहासुनी हो गई।

टीआई ने महापौर से कहा कि ये किसी का घर है, मैडम। इस पर महापौर ने आपत्ति जताते हुए कहा- ये मेरा भी घर है। मैं नगर की प्रथम नागरिक हूं, भाजपा की वरिष्ठ नेता हूं। मंत्री से मेरे पारिवारिक संबंध हैं और प्रदेश के मुखिया आए हैं, ऐसे में प्रोटोकॉल के तहत मुझे वहां होना चाहिए।

बाद में अन्य नेताओं के हस्तक्षेप के बाद महापौर को अंदर जाने की अनुमति दे दी गई। हालांकि, इस दौरान महापौर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- मजाक बना रखा है इन लोगों ने, मैं एक घंटे से खड़ी हूं।

वहीं, टीआई राजकुमारी परमार ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी के साथ अभद्रता या बहस नहीं की, बल्कि सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाई। महापौर के एक घंटे इंतजार वाले बयान पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा- एक घंटा तो मुख्यमंत्री जिले में भी नहीं रुके।

मुरैना में सीएम से मिलने पहुंची महापौर को रोका तो उनकी पुलिसकर्मियों से बहस हो गई।
मुरैना में सीएम से मिलने पहुंची महापौर को रोका तो उनकी पुलिसकर्मियों से बहस हो गई।

पूर्व मंत्री का मंच से निशाना, भाजपा में खींचतान मंडला जिले की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम ने बिना नाम लिए मंत्री संपतिया उईके पर तीखा हमला बोल दिया। उनके बयान से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

दरअसल, सैयाम नैनपुर में आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंच से ही मंत्री और स्थानीय विधायक पर मनमानी करने का आरोप लगाया। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर उन्होंने नाराजगी जताई।

पूर्व मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और भेदभाव किसी भी सरकारी कार्यक्रम में ठीक नहीं है। सभी को सम्मान मिलना चाहिए और इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने एक साल पहले हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मुख्यमंत्री भी मौजूद थे, लेकिन उन्हें मंच पर जगह नहीं दी गई। सैयाम ने कहा कि मंत्री रहते हुए उन्होंने ही इस योजना की शुरुआत की थी, इसके बावजूद उन्हें मंच से दूर रखा गया, जो अनुचित है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस कार्यक्रम में सरपंच तक मंच पर मौजूद थे, लेकिन पूर्व मंत्री होने के बावजूद उन्हें मंच पर नहीं जाने दिया गया। गौरतलब है कि जिस सरपंच का जिक्र किया जा रहा है, वह मंत्री संपतिया उईके की बेटी हैं।

अब इस पूरे घटनाक्रम को लोग भाजपा के अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कम से कम मंडला में तो ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का भाजपा का नारा पूरी तरह से जमीन पर उतरता नजर नहीं आ रहा।

मंडला में पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम ने मंत्री संपतिया उईके को बिना नाम लिए खरी-खोटी सुनाई।
मंडला में पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम ने मंत्री संपतिया उईके को बिना नाम लिए खरी-खोटी सुनाई।

जब भाजपा पार्षद को खुद उठाना पड़ा कचरा भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। हैरानी की बात यह रही कि यहां भाजपा पार्षद को ही खुद कचरा उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

दरअसल, एक शादी समारोह के बाद इलाके में कचरे का बड़ा ढेर लग गया था, जिससे लोगों का वहां से गुजरना मुश्किल हो रहा था। स्थानीय लोगों ने भी परेशानी जताई।

इस पर भाजपा पार्षद अरविंद वर्मा ने स्वास्थ्य अधिकारी और सफाई दरोगा को कई बार फोन कर कचरा उठाने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि वे सुबह से लगातार संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

जब दोपहर तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्षद ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया और कचरा उठाना शुरू कर दिया। इसी दौरान नगर निगम का कचरा वाहन मौके पर पहुंच गया, जिसके बाद पार्षद ने कचरा उसमें डाल दिया।

यह घटना न सिर्फ सफाई व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी-कभी जनप्रतिनिधियों को खुद ही मैदान में उतरना पड़ता है।

भोपाल में सिस्टम से नाराज भाजपा पार्षद को खुद कचरा उठाकर फेंकना पड़ा।
भोपाल में सिस्टम से नाराज भाजपा पार्षद को खुद कचरा उठाकर फेंकना पड़ा।

इनपुट सहयोग – आकाश कौरव (नरसिंहपुर), दुष्यंत सिकरवार (मुरैना), विवेक अग्निहोत्री (मंडला), ईश्वर परमार (भोपाल)

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