मुख्यमंत्री जी, ट्रैक्टर की सवारी से पहले ये भी देख लेते…?

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*मुख्यमंत्री जी, ट्रैक्टर की सवारी से पहले ये भी देख लेते…?*

 

लेख -राजेन्द्र सिंह जादौन

 

मुख्यमंत्री जी, किसान सम्मेलन में ट्रैक्टर पर बैठना प्रतीकात्मक रूप से अच्छा लगता है। तस्वीरें संदेश देती हैं, नारों में जमीन की गंध आती है और मंच से खेत तक की दूरी पाटने का दावा भी पूरा हो जाता है। लेकिन प्रतीक जब सड़क पर उतर आता है, तो वह नियमों से टकराता है। और तब सवाल तस्वीर का नहीं, सुरक्षा का होता है।

 

मैं यह नियम आपको ज्ञान देने के लिए नहीं गिना रहा। न तो मैं आरटीओ हूं, न सुरक्षा अधिकारी। बस एक कॉमन मैन हूं।और शायद इसी नाते आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मुझ पर भी आ जाती है। क्योंकि जब मुख्यमंत्री सड़क पर होते हैं, तो सड़क भी मुख्यमंत्री की हो जाती है। और सड़क पर नियम सबसे पहले बोलते हैं।

 

ट्रैक्टर खेती का औजार है, प्रदर्शन का मंच नहीं। कानून भी यही कहता है। ट्रैक्टर LMV श्रेणी में आता है, उसके लिए वैध रजिस्ट्रेशन, बीमा और फिटनेस जरूरी है। सड़क पर उतरते ही खेत के सारे अपवाद खत्म हो जाते हैं। खेत में लाइसेंस न भी हो तो चल जाता है, सड़क पर नहीं। और ट्रॉली जुड़ते ही नियमों की सूची और लंबी हो जाती है—ओवरलोडिंग नहीं, सवारी नहीं, रजिस्ट्रेशन अलग, क्षमता तय।

 

अब जरा सोचिए।जब आम किसान की ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठी बारात पुलिस उतार देती है, जब मजदूरों को ढोते ट्रैक्टर पर चालान कटता है, जब हाईवे पर रोक-टोक होती है तो मुख्यमंत्री की सवारी पर नियम किस खांचे में जाएंगे? नियम किताब में हैं या तस्वीर के बाहर?

स्पीड लिमिट भी है। ट्रैक्टर रेसिंग बाइक नहीं है। 25 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा।वह भी सड़क और राज्य के हिसाब से। दर्पण, लाइट, इंडिकेटर सब फिट हों, तभी सड़क पर उतरने की इजाजत है। यह सब इसलिए नहीं कि कागज पूरे हों, बल्कि इसलिए कि हादसे पूरे न हों।

यह कहना भी जरूरी है कि किसानों का ट्रैक्टर पर चलना गलत नहीं। किसान सम्मेलन गलत नहीं। गलत तब होता है जब कानून को मंच की सजावट समझ लिया जाए। जब नियम आम आदमी के लिए हों और प्रतीक VIP के लिए। तब कानून कमजोर नहीं पड़ता विश्वास कमजोर पड़ता है।

 

मुख्यमंत्री जी, आपकी सुरक्षा आपके सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी है, यह सही है। लेकिन आपकी मिसाल पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी बन जाती है। कल कोई किसान कहेगा जब मुख्यमंत्री ट्रैक्टर पर बैठे, तो हम क्यों नहीं?” तब जवाब किसके पास होगा आरटीओ के पास या मंच के फोटोग्राफर के पास?

 

कानून का सौंदर्य यही है कि वह सबके लिए एक जैसा दिखे। किसान के लिए भी, मुख्यमंत्री के लिए भी। ट्रैक्टर खेत में राजा है, सड़क पर नियमों का प्रजा। और नियमों के बिना कोई भी सवारी चाहे वह प्रतीक हो या प्रचार सुरक्षित नहीं होती।

 

बस इतना ही निवेदन है, मुख्यमंत्री जी ट्रैक्टर की सवारी से पहले नियम भी साथ बिठा लिया कीजिए। तस्वीर और ताली तो मिल ही जाएगी, भरोसा भी मिल जाए तो बात पूरी

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