अंतर्राष्ट्रीय गीता जयन्ती महोत्सव

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हरियाणा के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नायबसिंह सैनी जी के सत्संकल्प से ब्रह्मसरोवर, कुरुक्षेत्र में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय गीता जयन्ती महोत्सव” केवल एक सांस्कृतिक आयाम नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा के पुनर्जागरण का एक विराट अभियान है।

 

“कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड” के तत्वाधान में इस वर्ष “१०वें अंतर्राष्ट्रीय गीता जयन्ती महोत्सव” के अंतर्गत विविध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला बड़ी भव्यता के साथ सम्पन्न हुई। इसी क्रम में, श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनन्तश्रीविभूषित जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य आचार्यश्री जी” की अध्यक्षता में आयोजित “सन्त-सम्मेलन” इस महोत्सव का केन्द्रीय आकर्षण सिद्ध हुआ।

 

“पूज्य आचार्यश्री” के उद्बोधन ने उपस्थित जन-समूह को उपनिषदों की उज्ज्वल परम्परा और गीता के आध्यात्मिक सार से अनुप्राणित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कठिन कलिकाल में यदि कोई ग्रन्थ मानवता को मोक्ष, शान्ति और समष्टि-कल्याण की दिशा प्रदान कर सकता है तो वह है – श्रीमद्भगवद्गीता; जो उपनिषदों का सार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मन में अंतर्निहित भ्रम, भय, अकर्मण्यता और पलायन का समूलोच्छेदन तथा यथार्थ बोध एवं ईश्वर-उपलब्धि, ये सभी गीता-अध्ययन की दिव्य फलश्रुतियाँ हैं। गीता का नित्य अध्ययन हर साधक को अवसाद से आनन्द की ओर ले जाने वाली मंगलमयी यात्रा प्रदान करता है। यह केवल ग्रन्थ नहीं, बल्कि जीवन-नेतृत्व का शाश्वत प्रकाशस्तम्भ है।

 

इस महोत्सव के आयोजन में प्रतिवर्ष की भाँति इस बार भी महामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज “गीता मनीषी जी” की नाभिकीय एवं प्रेरक भूमिका उल्लेखनीय रही। उनकी उपस्थिति, मार्गदर्शन और आध्यात्मिक नेतृत्व ने सम्पूर्ण आयोजन को गहन ऊर्जा और दिशा प्रदान की। गीता के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान इस महोत्सव की आत्मा के समान रहा।

 

सन्त-सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों और परम्पराओं से अनेक विचारवान, पूज्य और सन्त-सत्पुरुष उपस्थित हुए। इस अवसर पर केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री आदरणीय श्री मनोहर लाल जी, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री आदरणीय श्री पुष्कर सिंह धामी जी, मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री आदरणीय श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी जी ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को और ऊँचा किया।

 

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष आदरणीय श्री पंकज सेतिया जी, जैन धर्म के प्रमुख सन्त पूज्य श्री स्वामी लोकेश मुनि जी महाराज, जूना अखाड़ा के उप-आचार्य गोकर्ण पीठाधीश्वर पूज्य श्री स्वामी कपिल पुरी जी महाराज, इस्कोन के पूज्य श्री साक्षी गोपाल जी महाराज, पूज्य बाबा श्री भूपेन्द्र सिंह जी, पूज्य श्री दिनेशानन्द जी महाराज, पूज्य श्री विकासदास जी महाराज, पूज्य श्री अरुणलाल जी महाराज, पूज्य श्री गुरु भैया दास जी, पूज्य श्री कालिदास जी महाराज सहित अनेक देशप्रसिद्ध सन्तों ने आत्मीय सहभागिता की। साथ ही प्रबुद्धजन, प्रशासनिक अधिकारीगण और अनेक सम्मानित विभूतियों ने भी अपनी श्रद्धापूर्ण उपस्थिति से इस आध्यात्मिक पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।

 

इस प्रकार “सन्त-सम्मेलन” न केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक संवाद का मंच बना, बल्कि यह राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला एक महत्त्वपूर्ण आयोजन सिद्ध हुआ। गीता का सार्वभौमिक सन्देश-धर्म, कर्तव्य, ज्ञान और आत्मोन्नति इस पूरे कार्यक्रम के माध्यम से जन-मन तक पहुँचा। ऐसे आयोजन भारतीय अध्यात्म की उस जीवन्त परम्परा को पुनः स्थापित करते हैं, जो मानवता को प्रकाश, प्रेम और पथदर्शन प्रदान करती है।

 

गीता जयन्ती महोत्सव के अंतर्गत, आज “जयराम विद्यापीठ आश्रम”, कुरुक्षेत्र में पूज्य ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप जी महाराज की प्रेरणा से “सामूहिक कन्या विवाह” का महान आयोजन किया गया। “पूज्य आचार्यश्री” के पावन सान्निध्य में यह कार्यक्रम दिव्य वातावरण में सम्पन्न हुआ, जहाँ उन्होंने नव-विवाहित युगलों को मंगलमय, सौभाग्यशाली और संस्कारपूर्ण जीवन के लिए आशीष प्रदान किए।

 

Nayab Saini

Manohar Lal

Pushkar Singh Dhami

Dharmendra Singh Lodhi mla

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