6 महीने में 75 नाबालिग दुल्हनें बनीं मां

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बाल विवाह रुकवाने के तमाम दावों के बीच मध्य प्रदेश में बाल विवाह कुप्रथा अब भी गहरी जड़ें जमाए हुए है। कुप्रथा, झगड़ा प्रथा और बदनामी के डर के कारण मासूम उम्र की बच्चियां ब्याही जा रही हैं। इस कुप्रथा से न केवल नाबालिगों का बचपन छीना जा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी कुपोषण की खाई में धकेल दिया है।

भास्कर की 23 दिन की पड़ताल में ये चौंकाने वाली सच्चाई उजागर हुई है। पड़ताल में खुलासा हुआ कि मार्च से अगस्त-2025 के बीच 6 माह में राजगढ़ जिला अस्पताल में 75 नाबालिग वधुएं प्रसव के लिए पहुंचीं।

इनमें से 52 नाबालिग माताओं (70.66%) ने 53 कुपोषित (सामान्य से कम, बहुत कम और अति कम वजन वाले) बच्चों को जन्म दिया। इनमें से 10 बच्चों की मौत हो गई। इनमें 1 किलो से कम वजन वाले सभी 7 नवजात जन्म के कुछ दिनों बाद ही दम तोड़ गए।

वहीं, डेढ़ किलो से कम वजन वाले 7 में से तीन बच्चे (43%) की भी मौत हो गई। शेष कम वजन वाले बच्चे जीवित तो हैं, पर उनका शारीरिक विकास नहीं हो पा रहा है।

बता दें कि जिले में बाल विवाह रुकवाने का जिम्मा पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जनपद पंचायत के सीईओ, एसडीएम सहित महिला बाल विकास विभाग के आला अफसरों पर हैं। लेकिन हर साल इनके बड़ी संख्या में बाल विवाह रुकवाने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं।

अति कम वजन वाले बच्चे जीवित बच्चों का शारीरिक विकास थमा

1. 20 साल की रश्मि चौथी बार मां बनी लसूड़ली महाराजा गांव की रश्मि की शादी 16 साल की उम्र में 3 साल पहले हुई थी। 19 अप्रैल को वह चौथी बार मां बनी। जिला अस्पताल में उसने 1 किलो 800 ग्राम के बच्चे को जन्म दिया।

पति धर्मेंद्र ने बताया कि जन्म के बाद 14 दिन बच्चे को जिला अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती रखा। डॉक्टर से बहस के बाद बच्चे की छुट्टी कर दी गई, घर गए तो बच्चे की मौत हो गई। इनके दो गर्भपात कराने पड़े थे। स्वास्थ्य विभाग इन्हें भी प्रसव मानता है।

2. 18 साल में दूसरी बार मां बनी, 860 ग्राम की बच्ची जन्मी फतेहपुर गांव की रागिनी 18 साल की उम्र में दूसरी बार मां बनी। शादी 3 साल पहले हुई थी। शिवानी ने 28 जुलाई को जिला अस्पताल में 860 ग्राम की बच्ची को जन्म दिया। बच्ची को पहले एनआईसीयू में भर्ती किया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया, दो माह इलाज चला, बच्ची की हालत में थोड़ा सुधार आया है।

3. 400 ग्राम का बच्चा, जन्म के कुछ घंटे बाद मौत राजगढ़ के प्रतापगंज क्षेत्र में रहने वाली लक्ष्मी की शादी 1 साल पहले साढ़े 16 साल की उम्र में हुई थी। वह एक साल बाद साढ़े 17 साल की उम्र में पहली बार मां बनी। जिला अस्पताल में 15 अगस्त को उसने 400 ग्राम के बच्चे को जन्म दिया, जिसे एनआईसीयू में भर्ती किया गया। रागिनी के चाचा ससुर भरत गुर्जर ने बताया कि जन्म के कुछ ही घंटे बाद बच्चे की मौत हो गई।

4. 7 साल की उम्र में शादी, 19 की उम्र में तीसरा प्रसव गुराड़िया गांव की सोनल की शादी मोहन सिंह के साथ 7 साल की उम्र में 12 साल पहले हुई थी। 19 साल की उम्र में जिला अस्पताल में 17 जून को संजू ने तीसरे बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन 2 किलो 470 ग्राम था। इससे पहले के 2 बच्चे भी बहुत कम वजन वाले थे, दोनों की मौत हो चुकी थी। तीसरा बच्चा जीवित है, लेकिन वजन नहीं बढ़ रहा।

5. बचपन में शादी, 20 की उम्र में दूसरी बार मां बनी गंगाबाई सुवाहेड़ी गांव की रहने वाली गंगाबाई (20) के पति बताते हैं कि उनकी शादी बचपन में हो गई थी। उन्हें भी नहीं पता कि तब उनकी उम्र कितनी रही होगी, यही कोई शायद 10-12 साल। 5 साल पहले गौना की रस्म (दुल्हन का ससुराल आना-जाना) हुई।

गंगाबाई 12 अगस्त को दूसरी बार मां बनी। उन्होंने 700 ग्राम के एक मेल बच्चे को जन्म दिया। वे बताते हैं कि जन्म के बाद ही बच्चे की मौत हो गई थी। गंगाबाई की एक 3 साल की बेटी है।

6. 16 साल में दुल्हन बनी, 20 साल में मां, नवजात का वजन-920 ग्राम 4 साल पहले 16 साल की उम्र में दुल्हन बनी देहरा की भूरी बाई ने जिला अस्पताल में 6 जून को एक फीमेल बच्चे को जन्म दिया, जिसका वजन 920 ग्राम था। भूरीबाई के देवर राजू बताते हैं कि बच्ची काफी कमजोर थी, उसे डेढ़ माह तक एनआईसीयू में डॉक्टर्स की निगरानी में रखा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भूरीबाई का ये पहला प्रसव था।

ऐसा हर माह…जन्म के 28 दिन भी नहीं जी पाते औसतन 14 बच्चे

स्वास्थ्य विभाग की चाइल्ड डेथ रिपोर्ट के अनुसार अकेले राजगढ़ जिला अस्पताल में प्रसव के बाद हर माह औसतन 14 बच्चे जन्म के 28 दिनों के अंदर मौत के शिकार हो रहे हैं। अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच राजगढ़ जिला अस्पताल में 37 नवजातों की मौतें रिकॉर्ड की गई।

जनजागरण के लिए 50 से अधिक गांवों में जाएंगे युवा अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी के समन्वयक मनीष दांगी ने बताया कि वैवाहिक सीजन शुरू हो रहा है। जिले में बाल सगाई, बाल विवाह बंद हो, इसके लिए हम गांव-गांव जा रहे हैं। अगली कड़ी में प्रशासन के साथ मिलकर 50 से ज्यादा उन गांवों में जाएंगे, जहां बाल विवाह, बाल सगाई के मामले ज्यादा सामने आए। वहां हम युवाओं को और समाज के सक्रिय लोगों को जोड़ेंगे, उन्हें दुष्परिणाम बताएंगे। विशेषकर युवाओं की टीम ये काम करेंगी।

लंबाई व वजन से पता चलता है कुपोषित बच्चों का ग्वालियर के रिटायर्ड शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश जैन ने बताया कि जन्म के बाद लंबाई व वजन को मापकर कम वजन वाले बच्चों का पता लगाया जाता है- यदि बच्चे का वजन इस पैमाने पर -3 एसडी से कम है तो वह लो बर्थ वेट की श्रेणी में आता है। कम उम्र में मां बनने वाली महिलाएं ऐसे बच्चों को अक्सर जन्म देती है।

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