हम आखिर किस तरह का विकास चाहते हैं? क्या हम अपनी ही सांसों को, अपने ही जीवन की जड़ों को काटकर विकास करना चाहते हैं?
हम आखिर किस तरह का विकास चाहते हैं? क्या हम अपनी ही सांसों को, अपने ही जीवन की जड़ों को काटकर विकास करना चाहते हैं?
अब समय आ गया है कि हम केवल सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) की नहीं, बल्कि इकोलॉजिकल सस्टेनेबल डेवलपमेंट (पर्यावरणीय सतत विकास) की दिशा में सोचें — ऐसा विकास जो प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़े।
हमें केवल पेड़ों और वनस्पतियों को ही नहीं, बल्कि उन पेड़ों पर बने घोंसलों और उनमें बसे नन्हे पंछियों को भी बचाना होगा। यदि हम ऐसा नहीं कर पाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
जब कोई कहता है, “मेरे घर में धूप नहीं आती, पेड़ काट दो” या “मुझे निर्माण करना है, पेड़ काट दो” या डेवलपमेंट करना है पेड़ काट दो— अब इस सोच को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सच्चा विकास वही है, जो प्रकृति को नष्ट किए बिना, उसके साथ मिलकर आगे बढ़े।🌳🙏🌳🙏🌳
Dr. Yogendra Kumar Saxena
Scientist
Environmentalist
8817677175
9425677776
