बिना NOC लिए तत्कालीन राष्ट्रपति से कराया था भूमिपूजन
नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिलने के कारण भोपाल में लगने वाले हेल्थ से जुड़े दो मेगा प्रोजेक्ट बीते 3 साल से शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। खास बात तो यह है कि इन दोनों प्रोजेक्ट का तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों भूमिपूजन भी करा दिया गया था, लेकिन आज तक दोनों प्रोजेक्ट की एक ईंट भी नहीं रखी गई है।
28 मई 2022 को लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति कोविंद ने ईदगाह हिल्स पर 150 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले दो मेगा प्रोजेक्ट का वर्चुअल भूमिपूजन किया था।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईदगाह हिल्स पर जिस जगह ये दोनों सेंटर बनने थे, एयरपोर्ट अथॉरिटी और आर्मी से इनके निर्माण के लिए एनओसी नहीं ली गई थी। आर्मी और एयरपोर्ट अथॉरिटी की आपत्तियां आने के बाद दोनों ठेकेदार बिना काम शुरू किए ही चले गए।

सेंट्रल इंडिया के लिए मिली थी सौगात मध्यभारत के मरीजों के लिए भोपाल में 150 करोड़ के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज और सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ऑर्थोपेडिक शुरू होने थे। यह प्रोजेक्ट शुरू होते तो लंग कैंसर, अस्थमा, टीबी से लेकर स्पोर्ट्स इंजरी और हड्डियों के जटिल ऑपरेशन का सस्ता इलाज भोपाल में ही मिलता।
ये प्रोजेक्ट राज्य सरकार के एक अहम विजन मेडिकल टूरिज्म को नया आयाम देते। जिसके लिए देश ही नहीं, विदेश से भी मरीज इलाज कराने आते। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और पीआईयू के अफसरों की अधूरी तैयारी और लापरवाही ने इन प्रोजेक्ट्स को चौथी बार अटका दिया है। हैरानी की बात यह है कि दोनों प्रोजेक्ट्स के अटकने की वजह गांधी मेडिकल कॉलेज और निजी एजेंसी के बीच हुआ एक एमओयू है।

निजी एजेंसी के साथ विवाद भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में अब नई सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें संचालित हो रही हैं। लेकिन दो माह पहले तक पुराने भवन में एक निजी एजेंसी का सेंटर था। नई व्यवस्था बनने पर प्रबंधन ने इस एजेंसी को नोटिस देकर जगह खाली करने के लिए कहा।
एजेंसी का आरोप है कि भुगतान रोककर उन्हें बाहर करने की कोशिश की जा रही है, जबकि एग्रीमेंट की अवधि में अभी ढाई साल बचे हैं। ऐसे में जब तक विवाद नहीं खत्म होता, तब तक पुराने भवन को पूरी तरह तोड़ा नहीं जा सकता है।

हमीदिया अस्पताल के नए भवन में बनाए जाएंगे वर्ष 2017 में एमपी फाल्गुनी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दस साल के लिए सीटी स्कैन और एमआरआई संचालन का ठेका मिला था। शर्तों के अनुसार, मरीजों को बाजार दर से कम दर पर जांच सुविधा मिलनी थी। जीएमसी प्रबंधन का कहना है कि कॉलेज में नई एमआरआई मशीन आ चुकी है, इसलिए पुरानी आउटसोर्स सेवाओं की आवश्यकता नहीं है।
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि अब रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज और सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ऑर्थोपेडिक, हमीदिया अस्पताल के नए भवन में बनाए जाएंगे। लेकिन अब तक न तो डिजाइन तैयार है और न ही नया प्लान सामने आया है।

अधिकारियों ने बदला प्लान, इसलिए अटका प्रोजेक्ट पीआईयू के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विजय सिंह का कहना है कि पहले प्लान एक मंजिला भवन का था। भूमिपूजन के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग और गांधी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने इन दोनों प्रोजेक्ट के प्लान में फेरबदल कराए, जिसकी वजह से वर्टिकल हाइट ज्यादा हो गई।
इस पर एविएशन डिपार्टमेंट से मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद अक्टूबर 2022 में मेरा ट्रांसफर दूसरी जगह हो गया। उसके बाद की मुझे जानकारी नहीं है।

