14 करोड़ की गोल्ड रॉबरी- आरोपी पकड़ाए, रिकवरी नहीं
जबलपुर के सिहोरा में इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में 14 करोड़ का सोना और 5 लाख कैश लूटने के मामले का खुलासा हो गया है। 17 अगस्त, रविवार को पुलिस ने 4 आरोपियों को दमोह से गिरफ्तार किया। हालांकि, लूटा गया सोना बरामद नहीं हुआ है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने इसे बिहार के साथियों के पास रखा है।
पुलिस की एक टीम जल्द ही इसे रिकवर करेगी, हालांकि कितना सोना वापस मिलेगा? अभी ये साफ नहीं है। दूसरी तरफ बैंक में गहने गिरवी रखकर लोन लेने वाले ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं। वे जानना चाहते हैं कि उन्हें सोने के गहने वापस कैसे मिलेंगे? लुटेरों ने गहनों को गला दिया तो जितनी कीमत के गहने थे उतना ही पैसा वापस मिलेगा या कम मिलेगा?
जिन्होंने गहने के बदले लोन लिया उनके लोन की रकम काटकर कितना पैसा वापस मिलेगा? भास्कर ने इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए एक्सपर्ट से बात की। साथ ही उन लोगों से भी बात की जिन्होंने इस बैंक में सोना गिरवी रखकर लोन लिया था। पढ़िए रिपोर्ट…

इसाफ बैंक ग्राहकों की आपबीती पढ़िए…
केस-1: पत्नी के गहने गिरवी रखे थे सिहोरा के बुधारी गांव के बसंत पटेल ने एक साल पहले तीन तोला सोने के गहने इसाफ बैंक में गिरवी रखे थे। वे बताते हैं कि कुछ रुपयों की जरूरत थी। मैंने पत्नी से गहने मांगे, ये उसे हमारी शादी में मिले थे। किसी भी महिला का शादी में मिले गहनों से बड़ा इमोशनल अटैचमेंट होता है। पत्नी ने बेमन से गहने दिए।
इसके पीछे मेरी मंशा थी कि लोन तो मिलेगा ही, गहने लॉकर में भी सुरक्षित रहेंगे और जब चाहेंगे वापस उठा लेंगे। एक महीना पहले जुलाई में ही मैंने रिन्युअल कराया था। 11 अगस्त को बैंक लूट के बारे में मुझे पता चला तो मैं बैंक आया। यहां अधिकारियों ने कहा कि लुटेरे पकड़े जाते हैं और उनके पास से पूरे गहने बरामद हो जाते हैं तो आपको गहने रिटर्न मिलेंगे।

केस-2: मां कहती है चेन ही चाहिए, पैसा नहीं सीहोरा के सौरभ साहू बताते हैं, दो महीने अचानक मुझे रुपयों की जरूरत पड़ी तो 47 ग्राम गोल्ड गिरवी रखा था। 15 दिन पहले मैंने गिरवी रखा सोना वापस लेने का प्लान बनाया था। पैसों की व्यवस्था भी कर ली थी, लेकिन किसी ने सलाह दी कि ज्यादा जरूरत हो तो वापस लो, वर्ना रहने दो।
मैंने भी सोचा कि कुछ दिन बाद वापस ले लूंगा। 11 अगस्त को बैंक में जब लूट की खबर सुनी तो मैं तो हक्का बक्का रह गया। बैंक वालों का कहना है कि सारा गोल्ड इंश्योर्ड था। किसी का कोई नुकसान नहीं होगा। यहां सवाल पैसों का नहीं है, इससे हमारी इमोशनल वैल्यू जुड़ी है।

केस-3: चोरी हुई तो लिया था गोल्ड लोन बैंक के बाहर बैठे नैगुवा के सोनू कुमार पटेल ने बताया कि दो–तीन महीने पहले मेरे खेत में चोरी हो गई थी। करीब 45 हजार कीमत का मेरा सबमर्सिबल पंप समेत वायर और रस्सी भी चुरा ले गए थे। इसके बाद ज्यादा बारिश की वजह से फसल को नुकसान हुआ, तो मैं गोल्ड लोन लेने को मजबूर हुआ।
पत्नी का सवा तोले का हार बैंक में रखकर मैंने 52 हजार रुपए लोन लिया। मैंने सोचा था कि धान की फसल आने पर पैसा चुकाकर हार वापस ले लूंगा। जब से पत्नी को बैंक लूट के बारे में पता चला है वो पूछ रही है कि हार वापस कैसे मिलेगा?

अब जानिए कैसे वापस मिल सकता है सोना?
जानकारों के मुताबिक इस मामले में तीन स्थितियां बन रही हैं….
- लुटेरे पकड़े गए, लेकिन लूटा गया सोना रिकवर नहीं होता।
- लुटेरों से सोना जस का तस बरामद हो जाता है।
- लुटेरों ने गहने गलवाकर इसका सोना बना लिया।
इन तीनों स्थितियों के बारे में सिलसिलेवार जानिए….
पहली: लुटेरे पकड़े गए, लेकिन लूटा गया सोना रिकवर नहीं होता इसाफ स्माल फाइनेंस बैंक के नेशनल मार्केटिंग हेड श्रीकांत बताते हैं कि बैंक में रखे पूरे गोल्ड का बीमा है। लूट की घटना के बाद हमने बीमा कंपनी को सूचना दी। उन्होंने अगले दो से तीन दिन में अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी। इस प्रक्रिया में समय लगेगा और इसके बाद अगले 30 से 45 दिनों बाद ग्राहकों को उनके सोने की कीमत देना शुरू कर देंगे।

लूट के दिन सोने का जो भाव होगा उससे तय होगी कीमत रिटायर्ड बैंक अफसर अनिल चौबे बताते हैं कि बैंक की जो भी शाखा जो गोल्ड लोन के लिए निर्धारित की जाती है। वो शाखा गोल्ड लोन को रिटेंशन लिमिट के अन्तर्गत निर्धारित करती है और उसका इंश्योरेंस कराती है। जब डकैती, लूट या अन्य किसी कारण से सोने के आभूषण चोरी होते है। तब बैंक उस इंश्योरेंस कंपनी को अपना क्लेम दर्ज कराती है।
इंश्योरेंस कंपनी मार्केट वैल्यू के हिसाब से केलकुलेशन करती है और बैंक को क्लेम की रकम जारी करती है। दूसरी तरफ जो खाताधारक है उन्हें बैंक से क्लेम हासिल करने के लिए अपने गिरवी रखे गहनों की पावती की कॉपी के साथ बैंक को आवेदन करना होता है। आवेदन के बाद बैंक क्लेम की गई राशि से बकाया बैंक मूलधन और ब्याज की राशि काटकर मार्केट वैल्यू के हिसाब से धनराशि वापस करती है।

दूसरा: लुटेरों से सोना जस का तस बरामद हो जाता है यदि लुटेरों से सोना जस का तस बरामद होता है तो जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर कोर्ट के आदेश पर उसे बैंक के सुपुर्द करेगी। इस प्रक्रिया में भी एक से दो महीने का वक्त लग सकता है।
नेशनल मार्केटिंग हेड श्रीकांत कहते हैं कि सोना जस का तस मिलने की स्थिति में कहीं कोई समस्या ही नहीं है। हमारे पास सभी ग्राहकों की ज्वेलरी की फोटो और वजन है, जब्त सोना छुड़ाने के बाद प्रक्रिया पूरी करके ग्राहकों को दे दिया जाएगा।

तीसरा: लुटेरों ने गहने गलवाकर इसका सोना बना लिया इस स्थिति में ग्राहकों को उनके गहने नहीं मिलेंगे, बल्कि गिरवी रखे सोने के वजन की कीमत का आकलन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया वो ही रहेगी जो सोना रिकवर न होने की स्थिति में है। यानी सोने के बदले जितना लोन दिया गया है और ब्याज की रकम काटकर जो कीमत बचती है वो ग्राहक को लौटा दी जाएगी।

इसाफ बैंक की किसी भी ब्रांच में गार्ड नहीं केरल से शुरू हुआ इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक मार्च 2017 में लघु वित्तीय बैंक बना और जनवरी 2018 से इसका संचालन शुरू हुआ। इससे पहले यह एक एनजीओ के रूप में काम करता था। प्रदेश में इसकी 69 ब्रांच हैं। ग्रामीण इलाकों में इसकी अच्छी पकड़ है और कम ब्याज दर के कारण ग्रामीण यहां सोना गिरवी रखना पसंद करते हैं, लेकिन इसका संचालन अब भी पुराने तरीके से हो रहा है।
बैंक के मानकों के अनुसार इसाफ की किसी ब्रांच में एक भी गार्ड नहीं है, इसी का फायदा लुटेरों ने उठाया। सीहोरा एसडीओपी आदित्य सिंघारिया बताते हैं कि पुलिस ने इस ओर ध्यान दिया है। हमारा ध्यान अभी इस वारदात को सुलझाने पर है, इसके बाद सभी बैंकों की बैठक बुलाकर एसओपी जारी करेंगे।

