दुबई में भी ड्रग तस्कर शाहवर मछली की प्रॉपर्टी

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भोपाल के ड्रग-हथियार तस्करी और यौन शोषण मामले में आरोपी मछली परिवार के सदस्य न सिर्फ रसूख की दम पर अतिक्रमण कर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर चुके हैं। बल्कि विदेशों में भी उनकी संपत्तियां मौजूद हैं।

जेल में बंद शाहवर अहमद उर्फ मछली की मोबाइल जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। शाहवर के मोबाइल में शशांक दुबई नाम से एक नंबर सेव है। इसने पिछले 7 महीनों में शाहवर के बताए अलग-अलग खातों में रुपए ट्रांसफर किए हैं।

रकम ट्रांसफर करने के बाद मैसेज के स्क्रीन शॉट शाहवर को वॉट्सऐप किए जाते थे। अब तक दोनों के बीच मिली चैट्स में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन की पुष्टि हो चुकी है।

इन चैट्स में दुबई की कई संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का जिक्र है। वहां की कई प्रॉपर्टीज के फोटो भी हैं। इधर, जेल में बंद भतीजे यासीन से जब पुलिस ने पूछताछ की थी तो उसने अपने बयानों में चाचा शाहवर की निजी जिंदगी से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे।

शाहवर को जेल में कैदी नंबर 2253 और यासीन को 2318 के रूप में जाना जाता है।
शाहवर को जेल में कैदी नंबर 2253 और यासीन को 2318 के रूप में जाना जाता है।

चाचा से सीखे लड़कियों को ब्लैकमेल करने के तरीके शाहवर का परवलिया सड़क पर एक ढाबा है, जिसमें हुक्का के साथ स्नूकर खेलने की भी व्यवस्था है। यहां से भी खास ग्राहकों को ड्रग बेचे जाने की बात पुलिस जांच में साफ हुई है।

सूत्रों के मुताबिक यासीन ने पिछले दिनों तक क्राइम ब्रांच द्वारा की गई पूछताछ में बताया कि लड़कियों को ड्रग का आदी कर संबंध बनाने और तस्करी कराने का तरीका उसने अपने चाचा शाहवर से सीखा है।

वे लड़कियों के ड्रग लेते हुए वीडियो मोबाइल फोन में सेव रखते थे। बात न मानने की हालत में लड़कियों को ब्लैकमेल किया जाता था। वह अपने चाचा से दोस्ताना रिश्ता रखता था। उनके साथ घूमने फिरने के साथ ही अय्याशियां भी करता था।

हालांकि कोरोना की सेकेंड वेव के बाद से शाहवर ज्यादातर समय दुबई में बिताने लगा था। वह रियल स्टेट का बड़ा साम्राज्य खड़ा करने में जुटा था। इधर, भोपाल में चाचा की राह पर चलते हुए यासीन ने पब लाउंज और क्लब्स में दहशत कायम कर रखी थी। यहीं से तस्करी का पूरा नेटवर्क चलाया जाता था। गिरफ्तारी से महज एक दिन पहले ही शाहवर भोपाल आया था। यहां यासीन की निशानदेही पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

23 जुलाई को पुलिस ने यासीन और शाहवर को गिरफ्तार किया था।
23 जुलाई को पुलिस ने यासीन और शाहवर को गिरफ्तार किया था।

चाचा-भतीजे की एक ही गर्लफ्रेंड रही विदिशा जिले की एक तहसील में रहने वाली युवती पढ़ाई के लिए भोपाल आई थी। यहां वह शाहवर के संपर्क में एक लाउंज में आई। दोनों में दोस्ती हुई और शाहवर ने उसे ड्रग्स की लत लगा दी। जब शाहवर दुबई में कारोबार में व्यस्त रहने लगा तो यासीन ने इस युवती को अपनी गर्लफ्रेंड बनाया।

इसे कई बार तस्करी में इस्तेमाल किया गया, इस बात का खुलासा यासीन ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने इस युवती को हिरासत में लिया। हालांकि युवती प्रेग्नेंट थी और उसने चाचा-भतीजे की प्रताड़ना की पूरी कहानी पुलिस को बताई है। काउंसलिंग के बाद भी युवती दोनों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए राजी नहीं हुई तब उसे छोड़ दिया गया।

यासीन की ड्रग्स पार्टी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें डांसर्स को भी बुलाया जाता था।
यासीन की ड्रग्स पार्टी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें डांसर्स को भी बुलाया जाता था।

दान पत्र पर गुर्गे बेच रहे थे कब्जे की जमीन शाहवर की शह पर गुर्गे भी सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उसे दान पत्र पर बेच रहे थे। मछली परिवार के संरक्षण में नौकर और उनसे जुड़े लोगों का यह गोरखधंधा बीते 12 साल से चल रहा था। उन्होंने हथाईखेड़ा डैम के पास वन विभाग की जमीन कब्जा रखी थी और वहां सैकड़ों प्लॉट काटकर पूरी कॉलोनी ही बना दी थी।

जमीन के दस्तावेज न होने का बहाना बनाकर वे दान पत्र के जरिए कब्जा देते थे। वहीं, अनुबंध पत्र बनाकर एक प्लॉट को डेढ़ से ढाई लाख रुपए में बेचते थे। पिछले महीने मछली परिवार का कब्जा जमींदोज करने से पहले एसडीएम ने इन जमीनों की जांच भी की थी, जिसमें पाया गया कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे दान पत्र के नाम पर बेचा गया है। इस मामले में बिलखिरिया थाने में 6 केस दर्ज हैं।

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