तीसरी कसम की यूनिट पर पथराव की हकीकत

साठ के दशक में कवि शैलेन्द्र की फिल्म तीसरी कसम की शूटिंग मध्यप्रदेश के सागर जिले के बीना के आसपास ग्रामीण इलाके में हुई थी.बीना भले छोटा क़स्बा है पर रेलवे का बड़ा जंक्शन होने से जाना पहचाना है.शूटिंग के बाद ट्रेन से लौट रही फिल्म की सितारों भरी यूनिट के साथ हुए हादसे के बारे में आज बड़े अखबार दैनिक भास्कर के पुलआउट डीबी स्टार ने अपने आर्काइव रिकार्ड के हवाले से बेसिर पैर की गलत सलत जानकारी पाठकों को परोसी है.यह हादसा बीना के समीप (आर्काइव के अनुसार पांच मिनट के फासले पर) होना बताया गया है जबकि यह हुआ विदिशा में था जहाँ बीना से ट्रेन को पहुँचने में एक घंटे से ज्यादा समय लगता है.बीच में मंडी बमोरा,गंज बासोदा जैसे नगर और गुलाबगंज स्टेशन भी पड़ता है.हादसे का चश्मदीद होने से मैं इस उम्मीद में तथ्यपरक जानकारी दे रहा हूँ की सिनेमाप्रेमी पाठकों के साथ भास्कर वाले भी अपना आर्काइव रिकार्ड (अन्य मामलों में भी) दुरुस्त कर लें.
मैं उस समय दसवीं का छात्र था और भोपाल के समीप जिला मुख्यालय विदिशा में ही रहता था जो बीना से ७०-८० किमी दूर है.पिताश्री के रेलवे में होने से क्वार्टर स्टेशन से सटा हुआ मिला था.बीना में फिल्म की शूटिंग लम्बी चली,शायद हफ्ते दस दिन या उससे भी ज्यादा.इस कारण विदिशा से सिनेमाप्रेमी अक्सर शूटिंग देखने बीना जाते रहते थे.शूटिंग खत्म होने के बाद यूनिट के पंजाब मेल ट्रेन से मुंबई लौटने की जानकारी विदिशा में आग की तरह फ़ैल गई.यूनिट में राजकपूर और वहीदा रहमान भी थे.फिर क्या था उस दिन शाम को छह बजे से ही स्टेशन पर जनता इकट्ठा होने लगी और ट्रेन के वहां पहुँचने तक तो भीड़ का मेला सा लग गया था.
पंजाब मेल के स्टेशन पर रुकने पर राजकपूर एसी डिब्बे के गेट पर नमूदार हुए ना की नीचे उतर कर जनता से मिले जैसा रिपोर्ट में बखान किया गया है.तब भीड़ ने वहीदा रहमान को भी गेट पर लाने का शोर मचाया जिसे राजकपूर ने नहीं माना.इस पर भारी शोरगुल और पथराव के हालत बनने पर उन्होने हवाई फायर भी किया और अन्दर चले गए जिस पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया.तब स्टेशन स्टाफ और ट्रेन ड्राइवर की होशियारी से पथराव के दौरान ट्रेन को रवाना कर दिया गया था.बाद में विदिशा से आठ किमी दूर बौद्ध तीर्थ स्टेशन साँची में ट्रेन रोक कर हालत सामान्य होते ही मुंबई रवाना कर दिया गया था.यह जानकारी हास्यास्पद और फूहड़ लगती है की राजकपूर को बाहर जाने से रोकने वहीदा रहमान उनके सीने पर बैठ गईं थीं.! श्री प्रकाश दीक्षित
