धर्मेंद्र अस्पताल से डिसार्ज हो गये

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धर्मेंद्र अस्पताल से डिसार्ज हो गये हैं. यह बहुत दुखद है कि रियल टाइम सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में भी लंबे अनुभव से लैस हमारे मीडिया ने उनके स्वास्थ्य की रियल टाइम रिपोर्ट की पुष्टि किये बगैर धर्मेंद्र की मृत्यु की खबरें प्रसारित कर दीं, छाप दीं! मीडिया चाहे प्रिंट हो, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल या फिर ऑडियो हो या वीडियो या वेब; सबसे पहले खबर ब्रेक करने की उतावली ऐसी होती है कि पत्रकार पत्रकारिता का मूल मंत्र–तथ्यों की सभी सोर्सेस से पुष्टि करना, उसे क्रासचेक करना ताक पर रख देते हैं. किसी मशहूर व्यक्ति की मृत्यु की खबर सबसे पहले देने का जुनून इतना तीव्र होता है कि पत्रकार यह तक भूल जाते हैं कि मृत्यु की उनकी झूठी खबर का उस व्यक्ति के परिजनों, शुभचिंतकों, समर्थकों के मन पर क्या असर पड़ेगा? 1972-73 में जब मैंने वर्किंग जर्नलिस्ट के रूप में काम शुरू किया तो हमारे दैनिक समाचारपत्र के संपादकीय विभाग में लगे यू एन आइ के टिकर (टेलिप्रिंटर) पर एक दिन दोपहर में एक लाइन का फ्लैश चलने लगा: “Goa CM Shashikala Kakodkar is no more” टिकर से निरंतर निकलने वाली काॅपी को अपनी सीट से उठकर समय-समय पर पढ़ना मेरी आदत थी; इससे ताजा खबरें तुरंत पता लग जाती थीं. यू एन आइ के टिकर पर यह फ्लैश देखकर मैंने पीटीआइ का टिकर चेक किया. उस पर ऐसा कोई फ्लैश नहीं था. न्यूज एजेंसियों में भी सबसे पहले खबर ब्रेक करने की होड़ थी! यू एन आइ खबरें ब्रेक करने के मामले में पीटीआइ से आगे रहती थी; शायद इसलिए कि उसके संवाददाताओं, स्ट्रिंगर्स को हर बड़ी खबर तुरंत रिलीज़ करने का निर्देश था, भले उसकी पर्याप्त पुष्टि हुई हो नहीं. शशिकला काकोडकर की मृत्यु की खबर भी ऐसी ही थी. शायद यू एन आइ का टिकर गोवा की सीएम के दफ्तर में भी लगा था; जहां सीएम की मृत्यु का यू एन आइ का यह फ्लैश उनके किसी स्टाफ ने देख लिया. परिणाम यह कि फ्लैश जारी करने के 5 मिनट के भीतर ही यू एन आइ को इस फ्लैश का आइटम नंबर लिखकर उसे “Kill…Kill…Kill” करने का मैसेज अनेक बार भेजना पड़ा! न्यूज एजेंसियां आज भी गलत खबर के लिए ऐसा ही करती हैं; लेकिन अपुष्ट, गैर-जिम्मेदाराना खबर जारी करने के लिए तब तक माफी नहीं मांगती जब तक पीड़ित पक्ष न्यूज एजेंसी को कोर्ट में खींच नहीं लेता! 1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद संपूर्ण क्रांति के पुरोधा लोकनायक जयप्रकाश नारायण की मृत्यु की झूठी खबर न्यूज एजेंसियों ने जारी कर दी, हद तो तब हो गयी कि जनता पार्टी के अनेक नये-नवेले नेताओं ने तुरत-फुरत जेपी को श्रद्धांजलि भी अर्पित कर दी! मीडिया समय-समय पर अनेक प्रसिद्ध व्यक्तियों को असमय “मार चुका” है: और भविष्य में भी “मारता रहेगा”, और अपने उतावलेपन और मूर्खता के लिए कभी क्षमा नहीं मांगेगा, जब तक उसे कोई नाथ न ले!

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