शहर डूबे, गांव डूबे, गरीब परेशान और सरकार बांट रही है स्वच्छता पुरस्कार
शहर डूबे, गांव डूबे, गरीब परेशान और सरकार बांट रही है स्वच्छता पुरस्कार
NITIN DUBEY ✍🏻 096301 30003
कौन सा स्वच्छता प्रमाण पत्र? कैसा स्वच्छता प्रमाण पत्र? बड़े ही शर्म की बात है कि थोड़ी सी बारिश में ही लोग परेशान हो गए, दर्जनों लोग मौत के मुंह में समा गए और लाखों लोग इस बरसात के कारण बेघर हैं।
घरों में नालियों का पानी भर चुका है, सड़कें बदतर स्थिति में हैं। यह तस्वीर मध्य प्रदेश के गांवों की ही नहीं बल्कि प्रदेश की राजधानी भोपाल, इंदौर सहित करीब 21 से ज्यादा जिले बारिश और गंदगी से परेशान हैं।
अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के कुछ शहरों को स्वच्छता में अव्वल आने पर पुरस्कृत किया गया। राजधानी भोपाल,इंदौर सहित नगर पंचायतों को भी स्वच्छता के लिए पुरस्कृत किया गया,लेकिन इस पुरस्कार के पीछे की कहानी बड़ी दर्दनाक है। जिस नगर निगम, नगर पंचायत से बारिश से पहले नाले साफ नहीं हुए, सड़कों की गंदगी नहीं हटी और नालों पर हुआ अतिक्रमण नहीं हटा उस संस्था को पुरस्कृत करने का क्या मतलब? पुरस्कृत तो तब किया जाता जब बरसात से लोग बेहाल नहीं होते, इस बरसात में लोगों की मृत्यु नहीं होती, इस बरसात से लोगों का जीवन दूभर नहीं होता और इस बरसात से लोग पलायन नहीं करते तब उन शहरों को पुरस्कृत किया जाता तो अच्छा लगता। दरअसल इस पुरस्कार योजना के पीछे एक ग्लैमर है इस पुरस्कार के पीछे अपनी लापरवाही छुपाई जा रही है।
आपको जान कर दुख होगा इस बरसात में अकेले राजधानी भोपाल में पांच लोगों की मृत्यु हो चुकी है। प्रदेश के दूसरे जिलों की बात करें तो कई गांव और शहर ऐसे हैं जहां लोगों का जीवन दूभर हो चुका है करीब दो दर्जन से ज्यादा जिले इस बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राजधानी भोपाल से रायसेन सागर का तो सड़क संपर्क ही टूट चुका है। अकेले भोपाल की बात करें तो शहर के कई इलाकों में पानी भरा हुआ है नाले साफ नहीं होने के कारण उनमें उबाल आ गया और हजारों घरों में वो गंदा पानी घुस चुका है। दरअसल सरकार स्वच्छता पुरस्कार बांटकर खुद ही की पीठ थपथपा रही है,खुद को ही पुरस्कार देने से क्या हम पुरस्कृत माने जाएंगे? शायद नहीं।
