सोयाबीन की बोवनी अब न करके बड़े नुकसान से बचे। (जगदीश रघुवंशी )
चम्बल,बुंदेलखंड के कुछ अंचलों मे लगातार हो रही बारिस ने किसानों को सोयाबीन सहित खरीब की अन्य फसलों की बोवनी का मौका नही दिया। नतीजन शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, भिंड,मुरैना, श्योपुर,दतिया, टीकमगढ़ के किसान बोबनी से पिछड़ चुके है। जमीन तरबतर होने से सोयाबीन,टमाटर सहित अन्य सब्जियों के अंकुरण की क्षमता खो चुकी है। बोबनी से पिछड़ चुके किसानों को कृषि वैज्ञानिकों, कृषि पंडितों ने अब सोयाबीन की बोबनी न करने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों, कृषि पंडितों ने बारिस थमने, बत्तर आने पर सोयाबीन की बजाय कम समय मे वांछित उत्पादन देने वाली फसल उड़द की बोबनी पर जोर दिया है। ताकि भावी फ़सल चक्र प्रभावित न हो। एक बीघा में 04-05 किलो उड़द बीज प्रयोग की सलाह दी है। उड़द के लिए अब मौसम अनुकूल है।
