गुरु मंत्रों के बिना जीवन सफल नही हो सकता (जगदीश रघुवंशी )
राजगढ़ के सबसे गतिशील नगर ब्यावरा में गुरु पूर्णिमा के शुभ पुण्य योग पर विश्व प्रेम मंदिर पर प्रोफेसर केदार नारायण जोशी के मुख्य आथित्य, प्रोफेसर राधारमण त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्पन्न व्यख्यान माला में गुरु की महिमा,उत्सर्ग, से समाज,राष्ट्र, परिवार,समाज को मिलने वाले वैचारिक, आध्यात्मिक लाभों को विस्तार से बताया। प्रोफे0 जोशी ने गुरु सांदीपनि के दैवीय योग को विस्तार से बताते हुए कहाकि उन्होंने अपने आश्रम में श्री कृष्ण, सुदामा जैसे सेकड़ो विद्यार्थियों को शिक्षा दीक्षा दी। कृष्ण हर तरह से सक्षम थे। ठीक उलट सुदामा दीन हीन। मगर बिना किसी भेदभाव के गुरु ने शिक्षा- दीक्षा दी। समता,ममता की इससे बड़ी मिसाल दुर्लभ सी है। गुरु हमेशा अपने से अधिक योग्य प्रतिभा को गढ़ने की कामना करता है।
समारोह के बतौर अध्यक्ष राधारमण त्रिपाठी ने मौजूदा डिजिटल क्रांति से समाज, परिवार, रिश्तो में आरहे बदलाव का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहाकि कम्प्यूटर ने गुरु, कक्षाओं की जरूरतों को ही कम कर दिया। विद्यार्थी अब क्लास में जाकर समय खर्च करने की बजाय यूट्यूब से ही वांछित लेक्चर सुन,देख,पढ़ लेता है। इससे सामाजिक ढांचे,मानवीय धर्म और सवेधनाओ को चोट पहुच रही है। रिश्ते कमजोर हो रहे है। पारिवारिक कर्तव्य,धर्म मे दरार आ रही है। इस केंसर को रोकने का समाधान डिजिटल युग को मानवीय धर्म,कर्तव्य से जोड़ने से ही सम्भव है।
आरएसएस के पदाधिकारी,प्रचारक राजवीर जी ने इस मौके पर राष्ट्र निर्माण में बाधक भेदभाव को खत्म कर एक जाजम पर बैठ सवांद करने, पॉलिथीन का प्रचलन कम करके पर्यावरण सुधारने सहित 05 सूत्रों पर अमल करके मानव कल्याण की पैरवी की।
इस मौके पर गुरु पाद पूजन, ध्वज वंदना भजन, प्रार्थना आदि सम्पन्न हुए।
विश्व प्रेम मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक गुरु धिवदत्त भारद्वाज और उनके साथियों के योगदान का भी उल्लेख किया। प्रो0 जोशी और प्रो0 त्रिपाठी का अभिनंदन भी किया।
