मालवा ए कश्मीर नरसिंहगढ: व्रन्दावन में बदलने बेताब ( श्याम चौरसिया)

मालवा ए कश्मीर नरसिंहगढ के लिए सावन भादौ धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक स्वास्थ के लिए वरदानकारी होता है। कदम कदम पर स्थित विभिन्न देवी देवताओं के देवालयों में अल सुबह से बजती घण्टिया, होते अभिषेक,अनुष्ठान की रंगत,आभा का कोई तोड़ है तो वह है सिर्फ व्रन्दावन। उमड़ा आस्था, भक्ति का अटूट सैलाब और सतपुड़ा की पर्वत मालाओं से झरते झरनों की गुंजन की दीवानगी का आनंद लेने हजारों श्रद्धालु, पर्यटक नित्य डेरा डालते है। मोहक छटा।
बड़ा महादेव,छोटा महादेव, गुप्तेश्वर, कोदुपानी, हनुमान गढ़ी, जल मंदिर सहित सेकड़ो देवालयों में होते अभिषेक और फिर दाल बाफले की गोट/भोज का सुस्वादु आनंद से तन मन खिल उठता है। सारी थकान सारा तनाव छूमंतर। इसमें योग होता है। कुंडों का अमृत तुल्य जल का। कुंडों का जल स्वास्थ्य के लिर वरदानकारी माना जाता है।
छोटा महादेव के आध्यात्मिक वैभव दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को होटलनुमा रेहड़ियां खूब भाती है। दो ढाई महीने में ये रेहड़ियां खासी कमाई कर लेती है।
तमाम पहाड़िया हरीतिमा से लद पीले चावल देती है।आओ। लूटो। प्रकृति को। जियो। प्रकृति की गोद मे।
नरसिंहगढ से सिर्फ 11 किमी दूर कोटरा के प्राकृतिक वैभव के मुरीद कम नही है। होम स्ट्रे बन जाने से सैलानियों को डूब जाने के अवसर बढ़ गए। वन अभ्यारण चिढ़ी खो में अटखेलिया भरते वन्य जीवों के दर्शन अदभुद है।
