इंद्र का प्रकोप : चम्बल अंचल में पिछड़ी खरीब फसलों की बोबनी ( श्याम चौरसिया)

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महाकौशल, बुन्देलखण्ड,विंध्य मालवा, निमाड़, में 15-20 दिन की ही चुकी खरीब फसलों की रंगत से किसान मग्न है। दूसरी तरफ चम्बल के भिंड, टीकमगढ़, शिवपुरी,दतिया,मुरैना,श्योपुर में इंद्र के प्रकोप से बोबनी के मिजाज अभी तक नही बनने से किसान तनाव में है। चिंतित है। किसानों ने बोवनी के लिए खाद बीज तैयार कर रखे है। जरूरी दवाई खरीदने पर हजारों रूपया दाव पर लगा दिया।
बोबनी के लिए उतावले किसान बेसब्री से इंद्र के थम जाने का इंतजार कर रहे है। मगर इंद्र है कि सावन लगने से पूर्व ही बारिस का कोटा पूरा करने पर तुले दिखते है। तमाम जलाशय छलकने लगे। सिंध ,चम्बल,कुवारी पार्वती सहित तमाम नदिया,नाले उफ़न रहे है।
05-06 जुलाई को चमकी धूप से 07 जुलाई को बोबनी के योग साधने को बेताब किसानों के मंसूबो पर 07 जुलाई की अल सुबह हुई मूसलधार बारिस ने पानी फेर दिया। खेतो में पानी भर गया। रास्ते बंद हो गए।किसानों की माने तो यदि तीन दिन कड़ाके की धूप खिले तभी बराफ़, बत्तर आने के योग बन सकते है। कृषि वैज्ञानिकों ने दस जुलाई तक बोबनी न करने पर नुकसान की चेतावनी देकर किसानों की चिंता और बढ़ा दी।
चम्बल अंचल में अभी 10 % भी बोबनी नही हो पाई है। जबकि मालवा, निमाड़, महाकौशल में 100% बुंदेलखंड, विंध्य में 70% बोबनी होने की खबर है।

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