मानसून ने 3 दिन में पूरा एमपी कवर किया

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दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 3 दिन में ही भिंड को छोड़ बाकी पूरे मध्यप्रदेश को कवर कर लिया है। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को मानसून ने 35 जिलों में दस्तक दी।

इनमें भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, आगर-मालवा, सागर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, मैहर, नरसिंहपुर, मुरैना, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर और दतिया शामिल हैं। इससे पहले पिछले दो दिन में इंदौर समेत 19 जिलों में मानसून पहुंच चुका है। अब सिर्फ भिंड ही ऐसा जिला है, जहां मानसून को दस्तक देना है। गुरुवार को इस जिले में भी मानसून पहुंच सकता है।

बुधवार को गुजरात-राजस्थान से सटे 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इनमें मालवा-निमाड़ (इंदौर-उज्जैन संभाग) के धार, झाबुआ, रतलाम, नीमच और मंदसौर शामिल हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में बारिश, तेज आंधी और गरज-चमक वाला मौसम रहेगा। बुधवार को बड़वानी जिले के कई इलाकों में बारिश हुई। अंजड़ में सबसे ज्यादा 20 मिमी पानी गिरा।

बड़वानी के अंजड़ में 20 मिमी बारिश हुई।
बड़वानी के अंजड़ में 20 मिमी बारिश हुई।

सिंगरौली में बिजली गिरने से 2 बच्चियों की मौत इससे पहले मंगलवार को प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। सिंगरौली में आकाशीय बिजली गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गई। वहीं, भोपाल, राजगढ़, धार, रतलाम, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सतना, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई।

बारिश की वजह से दिन के तापमान में भी गिरावट हुई है। शिवपुरी में पारा सबसे ज्यादा 40 डिग्री रहा। वहीं, सबसे कम तापमान इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 34.4 डिग्री, इंदौर में 32.2 डिग्री, ग्वालियर में 38.5 डिग्री, उज्जैन में 33 डिग्री और जबलपुर में पारा 34.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

छिंदवाड़ा में मंगलवार दोपहर को तेज बारिश हुई।
छिंदवाड़ा में मंगलवार दोपहर को तेज बारिश हुई।

अभी आंधी-बारिश के 4 सिस्टम एक्टिव सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि फिलहाल आंधी और बारिश के 4 सिस्टम एक्टिव हैं। गुजरात क्षेत्र और पड़ोसी हिस्से में लो प्रेशर एरिया (कम दवाब क्षेत्र) और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय है।

वेस्टर्न डिस्टरबेंस और टर्फ की एक्टिविटी भी देखने को मिल रही है। इस वजह से अगले चार दिन तक पूरे मध्यप्रदेश में मौसम बदला रहेगा। कुछ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। 24 घंटे में सवा 4 इंच पानी गिर सकता है।

इस बार एक दिन लेट पहुंचा मानसून इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया था। ऐसे में अनुमान था कि मध्यप्रदेश में यह जून के पहले सप्ताह में ही आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। इस वजह से एमपी में इसकी एंट्री नहीं हो पाई। 13-14 जून को मानसून आगे बढ़ा। यह प्रदेश में 1 दिन लेट हो गया। बता दें कि एमपी में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून ही है। पिछले साल यह 21 जून को एंटर हुआ था।

तीन में मानसून ने पूरे एमपी को कवर कर लिया है। सिर्फ भिंड में मानसून नहीं पहुंचा है।
तीन में मानसून ने पूरे एमपी को कवर कर लिया है। सिर्फ भिंड में मानसून नहीं पहुंचा है।

एमपी में कितना तापमान, ग्राफिक्स से जानिए…

अब जानिए, 10 साल में कैसा रहा मौसम…

भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर दिखा है। 4 साल तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। वहीं, रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी।

वहीं, पिछले साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी। 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था।

इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश जून में इंदौर में दिन के टेम्प्रेचर में खासी गिरावट होती है। पिछले 5 साल यानी- 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.1 डिग्री के बीच रहा है। पिछले साल तापमान 40.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल करीब 4 इंच पानी गिरा था।

बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1980 में यहां जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था। 3 जून 1991 में इंदौर में दिन का पारा 45.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था।

ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका टेम्प्रेचर ग्वालियर में मई के बाद जून में भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 2024 में पारा 45.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस महीने अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है।

मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2019 को पारा 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 1962 में पूरे महीने साढ़े 28 इंच बारिश हो गई थी। एक दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जून 1952 को बना था। साल 2024 में यहां पूरे महीने 5.7 इंच पानी गिरा था।

जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यहीं से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2015 से 2024 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोटे की 30% तक बारिश हो चुकी है। पिछले साल साढ़े 7 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर संभाग के दक्षिण हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार, जबलपुर में 1998 में एक महीने में करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 16 जून 1882 को 24 घंटे में साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल भी पूरे महीने करीब 8 इंच पानी गिरा था।

उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2015 से 2024 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।

उज्जैन में बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1970 में पूरे महीने साढ़े 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 15 जून 2001 को बना था। इस दिन करीब साढ़े 6 इंच बारिश हुई थी। साल 2024 में पूरे महीने साढ़े 5 इंच पानी गिरा था।

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